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रामसरन को मिला पदमश्री सम्मान, दौलतपुर समेत जिले भर में खुशी
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पद्मश्री रामसरन ने बढ़ाया जिले का गौरव
बाराबंकी। जिले के छोटे से गांव दौलतपुर में जन्मे और सह फसली खेती से अपनी अलग पहचान बनाकर जगजीवन राम पुरस्कार से लेकर पद्मश्री पाने तक रामसरन वर्मा का सफर किसानों के लिए आईकॉन साबित हो रहा है।
अपने सौम्य स्वभाव से सबका दिल जीतने वाले रामसरन की खेती देखने के लिए देशभर के ही नहीं बल्कि विदेशों तक के लोग यहां आ चुके हैं। सोमवार को रामसरन वर्मा को दिल्ली में राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री पुरस्कार मिला तो दौलतपुर समेत जिलेभर के लोग टीवी पर ये नजारा देखकर झूम उठे। लोगों ने कहा कि रामसरन का सम्मान किसानों के लिए प्रेरणा बनकर प्रगति के मार्ग खोलेगा।
जिले के हरख ब्लॉक के छोटे से गांव दौलतपुर में वर्ष 1968 में जन्मे प्रगतिशील किसान रामसरन वर्मा मैट्रिक पास हैं। धान व गेहूं की खेती से अपना सफर शुरू करने वाले रामसरन ने केला, टमाटर, आलू, मेंथा की सह फसली उन्नतशील खेती कर अपनी जो पहचान बनाई, उसके विदेशी भी कायल हो गए।
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फिर क्या रामसरन की ख्याति देखकर 26 जनवरी को पद्मश्री पुरस्कार के लिए उन्हें चुना गया था। तभी से रामसरन को बधाई मिल रही थी। सोमवार को पूरा देश रामसरन को पद्मश्री लेते न्यूज चैनलों पर देख रहा था।
छह एकड़ भूमि में धान व गेहूं की खेती करने वाले रामसरन मुनाफा न होने से मायूस हो गए थे। मगर, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पंजाब, महाराष्ट्र, हरियाणा व गुजरात के किसानों से मिलकर उनके कृषि फार्म देखे। इसके बाद रामसरन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
फसल चक्र अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन का तरीका खोजा। टिश्यू कल्चर विधि से केला व सहारा विधि से टमाटर की खेती का फार्मूला ईजाद किया। ये फार्मूला किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है।
टमाटर के साथ ही रामसरन ने केला, मेंथा व आलू की खेती में क्रांति लाने का काम किया। रामसरन ने उन्नतशील खेती से अपने आसपास के गांवों के किसानों व खेतिहर मजदूरों का पलायन भी रोका। वह सफदरगंज व कुर्सी में करीब तीन सौ बीघे में केला की खेती सहकारिता विधि से करा रहे हैं।
इस काम में प्रतिदिन 50 मजदूरों को रोजगार मिलता है। प्रगतिशील किसान रामसरन के कृषि फार्म पर तत्कालीन राज्यपाल बीएल जोशी व मौजूदा राज्यपाल रामनाईक दो बार आ चुके हैं।
देश के अलावा विदेशों के भी कृषि वैज्ञानिक व विशेषज्ञ, आईएएस व पीसीएस प्रशिक्षण के दौरान रामसरन की खेती देखने आते रहते हैं। रामसरन अपनी वेबसाइट वर्मा एग्री डॉट कॉम पर उन्नतशील खेती के गुर भी बताते हैं।
देशभर के करीब एक लाख लोग रामसरन की वेबसाइट देखते हैं। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने एक कार्यक्रम के दौरान रामसरन को किसान भगवान कहकर सलाम किया था।
इससे पहले रामसरन को जगजीवनराम पुरस्कार, उत्तर प्रदेश बागवानी पुरस्कार, केला, टमाटर व आलू के बेहतरीन उत्पादन का पुरस्कार भी मिल चुका है। सोमवार को दिल्ली में राष्ट्रपति ने रामसरन वर्मा को पद्मश्री पुरस्कार देकर सम्मानित किया तो जिले के लोगों ने फख्र महसूस किया।
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बाराबंकी। जिले के छोटे से गांव दौलतपुर में जन्मे और सह फसली खेती से अपनी अलग पहचान बनाकर जगजीवन राम पुरस्कार से लेकर पद्मश्री पाने तक रामसरन वर्मा का सफर किसानों के लिए आईकॉन साबित हो रहा है।
अपने सौम्य स्वभाव से सबका दिल जीतने वाले रामसरन की खेती देखने के लिए देशभर के ही नहीं बल्कि विदेशों तक के लोग यहां आ चुके हैं। सोमवार को रामसरन वर्मा को दिल्ली में राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री पुरस्कार मिला तो दौलतपुर समेत जिलेभर के लोग टीवी पर ये नजारा देखकर झूम उठे। लोगों ने कहा कि रामसरन का सम्मान किसानों के लिए प्रेरणा बनकर प्रगति के मार्ग खोलेगा।
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जिले के हरख ब्लॉक के छोटे से गांव दौलतपुर में वर्ष 1968 में जन्मे प्रगतिशील किसान रामसरन वर्मा मैट्रिक पास हैं। धान व गेहूं की खेती से अपना सफर शुरू करने वाले रामसरन ने केला, टमाटर, आलू, मेंथा की सह फसली उन्नतशील खेती कर अपनी जो पहचान बनाई, उसके विदेशी भी कायल हो गए।
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फिर क्या रामसरन की ख्याति देखकर 26 जनवरी को पद्मश्री पुरस्कार के लिए उन्हें चुना गया था। तभी से रामसरन को बधाई मिल रही थी। सोमवार को पूरा देश रामसरन को पद्मश्री लेते न्यूज चैनलों पर देख रहा था।
छह एकड़ भूमि में धान व गेहूं की खेती करने वाले रामसरन मुनाफा न होने से मायूस हो गए थे। मगर, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पंजाब, महाराष्ट्र, हरियाणा व गुजरात के किसानों से मिलकर उनके कृषि फार्म देखे। इसके बाद रामसरन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
फसल चक्र अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन का तरीका खोजा। टिश्यू कल्चर विधि से केला व सहारा विधि से टमाटर की खेती का फार्मूला ईजाद किया। ये फार्मूला किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है।
टमाटर के साथ ही रामसरन ने केला, मेंथा व आलू की खेती में क्रांति लाने का काम किया। रामसरन ने उन्नतशील खेती से अपने आसपास के गांवों के किसानों व खेतिहर मजदूरों का पलायन भी रोका। वह सफदरगंज व कुर्सी में करीब तीन सौ बीघे में केला की खेती सहकारिता विधि से करा रहे हैं।
इस काम में प्रतिदिन 50 मजदूरों को रोजगार मिलता है। प्रगतिशील किसान रामसरन के कृषि फार्म पर तत्कालीन राज्यपाल बीएल जोशी व मौजूदा राज्यपाल रामनाईक दो बार आ चुके हैं।
देश के अलावा विदेशों के भी कृषि वैज्ञानिक व विशेषज्ञ, आईएएस व पीसीएस प्रशिक्षण के दौरान रामसरन की खेती देखने आते रहते हैं। रामसरन अपनी वेबसाइट वर्मा एग्री डॉट कॉम पर उन्नतशील खेती के गुर भी बताते हैं।
देशभर के करीब एक लाख लोग रामसरन की वेबसाइट देखते हैं। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने एक कार्यक्रम के दौरान रामसरन को किसान भगवान कहकर सलाम किया था।
इससे पहले रामसरन को जगजीवनराम पुरस्कार, उत्तर प्रदेश बागवानी पुरस्कार, केला, टमाटर व आलू के बेहतरीन उत्पादन का पुरस्कार भी मिल चुका है। सोमवार को दिल्ली में राष्ट्रपति ने रामसरन वर्मा को पद्मश्री पुरस्कार देकर सम्मानित किया तो जिले के लोगों ने फख्र महसूस किया।