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पोटैशियम क्लोरेट, एल्यूनियम व सल्फर से बना था टाइम बम
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बाराबंकी। जिले में 20 दिन पहले सफेदाबाद रेलवे स्टेशन के पास मिले कथित टाइम बम चार चीजों से मिलकर बने थे। इसमें पोटैशियम क्लोरेट, एल्युमीनियम व सल्फर का प्रयोग किया गया था। आखिर इसके बनाने का मकसद क्या होगा, यह छानबीन के बाद ही पता चलेगा। मगर एसपी ने एक्सपर्ट की राय जानने के लिए चिट्ठी लिख दी है। एसपी ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला को पत्र भेजकर यह जानकारी मांगी है कि ये विस्फोटक है की नहीं। यदि है तो कितना है।
बीती 8 अप्रैल को जिले के सफेदाबाद रेलवे स्टेशन से करीब 300 मीटर दूरी पर चार कथित टाइम बम मिले थे। नित्यक्रिया के लिए गए ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा था। बम निरोधक दस्ते ने कथित बमों को डिफ्यूज किया था। एटीएस व एडीजी जोन भी मौके पर पहुंचे थे। बम जैसे दिखनी वाली वाले चारों चीजों को सील करके जांच के लिए आगरा लैब भेजा गया था।
अब आगरा से जो रिपोर्ट आई है उसमें पता चला है कि बम बनाने में पोटैशियम क्लोरेट, एल्युमीनियम व सल्फर का प्रयोग किया गया था। इस बाबत एसपी अनुराग वत्स का कहना है कि हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि जिन चीजों को मिलाकर बम बनाया गया था वह विस्फोटक थे या नहीं। अगर थे तो कितना थे। पूरे मामले की छानबीन लगातार जारी है।
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आतिशबाजी में होता है एल्युमीनियम व सल्फर का प्रयोग
जानकारों के अनुसार, एल्युमीनियम व सल्फर का प्रयोग आतिशबाजी की चीजों में होता है। इसका उपयोग सफेद लपटों व चिंगारियों के उत्पादन के लिए होता है। यह फुलझड़ियों का घटक है। जबकि पोटैशियम क्लोरेट का प्रयोग मिश्रण को ऑक्सीकरण करने में मदद करता है। वहीं सल्फर का प्रयोग आतिशबाजी में प्रणोदक ईंधन के रुप में किया जाता है। मामले की विवेचना कर रहे सतरिख थाने की लखैचा चौकी इंचार्ज धर्मेंद्र प्रताप सिंह का भी कहना है कि विस्फोटक के एक्सपर्ट ही पूरी बात बता सकते हैं।
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बीती 8 अप्रैल को जिले के सफेदाबाद रेलवे स्टेशन से करीब 300 मीटर दूरी पर चार कथित टाइम बम मिले थे। नित्यक्रिया के लिए गए ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा था। बम निरोधक दस्ते ने कथित बमों को डिफ्यूज किया था। एटीएस व एडीजी जोन भी मौके पर पहुंचे थे। बम जैसे दिखनी वाली वाले चारों चीजों को सील करके जांच के लिए आगरा लैब भेजा गया था।
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अब आगरा से जो रिपोर्ट आई है उसमें पता चला है कि बम बनाने में पोटैशियम क्लोरेट, एल्युमीनियम व सल्फर का प्रयोग किया गया था। इस बाबत एसपी अनुराग वत्स का कहना है कि हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि जिन चीजों को मिलाकर बम बनाया गया था वह विस्फोटक थे या नहीं। अगर थे तो कितना थे। पूरे मामले की छानबीन लगातार जारी है।
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आतिशबाजी में होता है एल्युमीनियम व सल्फर का प्रयोग
जानकारों के अनुसार, एल्युमीनियम व सल्फर का प्रयोग आतिशबाजी की चीजों में होता है। इसका उपयोग सफेद लपटों व चिंगारियों के उत्पादन के लिए होता है। यह फुलझड़ियों का घटक है। जबकि पोटैशियम क्लोरेट का प्रयोग मिश्रण को ऑक्सीकरण करने में मदद करता है। वहीं सल्फर का प्रयोग आतिशबाजी में प्रणोदक ईंधन के रुप में किया जाता है। मामले की विवेचना कर रहे सतरिख थाने की लखैचा चौकी इंचार्ज धर्मेंद्र प्रताप सिंह का भी कहना है कि विस्फोटक के एक्सपर्ट ही पूरी बात बता सकते हैं।