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बंटी-बबली की साजिश में फंसे युवा, खातों से लाखों के लेनदेन से हड़कंप
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बाराबंकी। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री योजना के लाभ का लालच देकर बंटी व बबली ने युवाओं को अपने जाल में फंसाया। उसके बाद बैंक में खाते खुलवाकर पासबुक हासिल कर ली। फिर चारों युवकों के खाते से लाखों रुपये का लेनदेन एक माह में कर डाला। इसकी जानकारी मिली तो युवाओं में हड़कंप मच गया। मामले की शिकायत एसपी से हुई तो जांच सीओ साइबर सेल को दी गई।
मामला नगर कोतवाली के बंकी दक्षिण टोला का है। एसपी से की गई शिकायत में पीड़ित युवकों ने बताया कि एक माह पहले पड़ोस में रहने वाली युवती ने सगीर आलम, मो. रियाज, मो. फुरकान व मो. सुहेल को प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री योजना का लाभ दिलाने की बात कही। उसके बाद वह उन्हें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की सट्टी बाजार शाखा ले गई। जहां उसका सहयोगी एक युवक उसके भाई के साथ आया।
वहां पर खाता खोलने वाले फार्म पर हस्ताक्षर कराकर घर भेज दिया। उन्होंने बताया कि उनकी पासबुक 15 माह बाद मिलेगी। कुछ दिन बीतने के बाद दो युवक बैंक शाखा पहुंचे और अपनी पासबुक ले आए। जिसमें उसके खाते में साढ़े 14 लाख तो एक अन्य के खाते में नौ लाख 99 हजार रुपये आए थे। यह देख अन्य युवकों को भी पासबुक की उत्सुकता बढ़ी। मगर, बैंक से उन्हें पासबुक नहीं मिली।
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मगर पैसे आने के करीब चार-पांच दिन में ही लाखों की राशि खाते से निकल गई। उसके बाद भी राशि आने व निकालने का खेल चारों खातों में चलता रहा। जिसकी जानकारी से हड़कंप मच गया। इसकी शिकायती पीड़ितों ने आईजीआरएस के साथ एसपी से की। इसके बाद एसपी ने मामले की जांच सीओ साइबर सेल को सौंपी। जिस पर मंगलवार को साइबर सेल की टीम पीड़ित चारों युवक को साथ लेकर मामले की जांच में जुटी है।
बैंक कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध
खाताधारक के अलावा किसी अन्य द्वारा लाखों के लेनदेन का खेल किया जा रहा है। मगर, बैंक कर्मियों को इसकी भनक तक नहीं। ऐसे में अगर पारदर्शी जांच हुई तो कई बैंक कर्मी भी इस दायरे में होंगे।
कई खातों से लाखों के लेनदेन की एक शिकायत मिली है। इसकी जांच साइबर सेल कर रही है। जल्द ही घटना का खुलासा होगा।
-आतिश कुमार सिंह, सीओ सिटी/ साइबर सेल
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मामला नगर कोतवाली के बंकी दक्षिण टोला का है। एसपी से की गई शिकायत में पीड़ित युवकों ने बताया कि एक माह पहले पड़ोस में रहने वाली युवती ने सगीर आलम, मो. रियाज, मो. फुरकान व मो. सुहेल को प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री योजना का लाभ दिलाने की बात कही। उसके बाद वह उन्हें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की सट्टी बाजार शाखा ले गई। जहां उसका सहयोगी एक युवक उसके भाई के साथ आया।
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वहां पर खाता खोलने वाले फार्म पर हस्ताक्षर कराकर घर भेज दिया। उन्होंने बताया कि उनकी पासबुक 15 माह बाद मिलेगी। कुछ दिन बीतने के बाद दो युवक बैंक शाखा पहुंचे और अपनी पासबुक ले आए। जिसमें उसके खाते में साढ़े 14 लाख तो एक अन्य के खाते में नौ लाख 99 हजार रुपये आए थे। यह देख अन्य युवकों को भी पासबुक की उत्सुकता बढ़ी। मगर, बैंक से उन्हें पासबुक नहीं मिली।
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मगर पैसे आने के करीब चार-पांच दिन में ही लाखों की राशि खाते से निकल गई। उसके बाद भी राशि आने व निकालने का खेल चारों खातों में चलता रहा। जिसकी जानकारी से हड़कंप मच गया। इसकी शिकायती पीड़ितों ने आईजीआरएस के साथ एसपी से की। इसके बाद एसपी ने मामले की जांच सीओ साइबर सेल को सौंपी। जिस पर मंगलवार को साइबर सेल की टीम पीड़ित चारों युवक को साथ लेकर मामले की जांच में जुटी है।
बैंक कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध
खाताधारक के अलावा किसी अन्य द्वारा लाखों के लेनदेन का खेल किया जा रहा है। मगर, बैंक कर्मियों को इसकी भनक तक नहीं। ऐसे में अगर पारदर्शी जांच हुई तो कई बैंक कर्मी भी इस दायरे में होंगे।
कई खातों से लाखों के लेनदेन की एक शिकायत मिली है। इसकी जांच साइबर सेल कर रही है। जल्द ही घटना का खुलासा होगा।
-आतिश कुमार सिंह, सीओ सिटी/ साइबर सेल