{"_id":"60c5024e8ebc3e20271705d0","slug":"crime-barabanki-news-lko5821860195","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रैवेल एजेंसी में अटैच कर बेच लेते थे लग्जरी कार, 32 कार बरामद, एक गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रैवेल एजेंसी में अटैच कर बेच लेते थे लग्जरी कार, 32 कार बरामद, एक गिरफ्तार
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बाराबंकी। लखनऊ में ट्रैवेल एजेंसी खोलकर उसमें लग्जरी कार अटैच करने के बाद उन्हें चोरी से बेचने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने इस मामले का एक गिरोह का खुलासा करते हुए विभिन्न कंपनियों की 32 लग्जरी कार बरामद कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। एसपी का दावा है कि यह गिरोह करीब सवा सौ कार इसी तरह से बेच चुका है। पुलिस इस गिरोह के अन्य शातिरों का भी पता लगाने का प्रयास कर रही है।
एसपी यमुना प्रसाद ने शनिवार को पुलिस लाइन सभागार में पत्रकार वार्ता में बताया कि पवन कुमार मौर्या निवासी ग्राम व पोस्ट हसौर थाना टिकैतनगर ने बीते दिनों शहर कोतवाली में सूचना दी थी कि आरआर कार बाजार एण्ड ट्रैवल्स हजरतगंज लखनऊ के मालिक रजीउल्ला खान मेरी कार को प्रतिमाह बीस हजार रुपये किराया देने के नाम पर इकरारनामा किया था। लेकिन बीते चार महीने तक किराया देने के उपरांत बंद कर दिया। इसके बाद पता चला है कि मेरी कार को कूटरचित दस्तावेज तैयार करके धोखाधड़ी व जालसाजी से दूसरों को बेच दिया है।
जब कार वापस मांगी गई तो गाली व धमकी दी जा रही है। इस पर एसपी ने पुलिस की तीन टीमों को लगाया। पुलिस ने जब केस दर्ज कर जांच शुरू की तो एक आरोपी रजीउल्ला खां निवासी मोहल्ला बांसगांव महोली थाना हुजूरपुर जिला बहराइच को पुलिस ने शुक्रवार रात रोडवेज बस स्टॉप बाराबंकी से गिरफ्तार किया। आरोपी के निशानदेही पर धोखाधड़ी कर बेची गयी 32 लग्जरी कारों को भी बरामद किया गया। शहर कोतवाली और क्राइम ब्रांच की टीम को यह सफलता मिली।
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दस से 50 हजार में लगती थी गाड़ी मालिक को चपत
पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसका आरआर कार बाजार टूर एण्ड ट्रेवेल्स के नाम से हजरतगंज लखनऊ में ऑफिस है। वह अपने ऑफिस के सहारे लोगों की लग्जरी कार को ट्रेवेल्स में लगाने व प्रतिमाह अच्छा किराया देने का प्रलोभन देकर गाड़ी ले लेता था।
इसके बाद वाहन लेकर एक खरीद/बेचीनामा फर्जी तैयार करके उनकी बिक्री होने तक कीमत के हिसाब से 10 हजार से 50 हजार रुपये तक प्रतिमाह देने के लिए कार के मालिकों को कहता था किन्तु वाहन स्वामियों को 2-3 माह ही पैसा देकर मोबाइल पर कॉल नहीं उठाता था और न ही मिलता था। इधर गाड़ियों को सस्ते दामों में बेच दिया जाता था और तय दाम में से ग्राहक से लगभग 80 फीसदी रुपये इसके द्वारा ले लिया जाता था और 20 फीसदी रुपये यह कहकर नहीं लिया जाता था कि गाड़ियों के ट्रांसफर होने पर दीजिएगा, जिससे वाहन स्वामी को अपनी गाड़ी की बिक्री का पता न चल सके।
इस तरह सारे रुपयों को अपने पास रख लेता था। न तो गाड़ी को ग्राहक के नाम ट्रांसफर कराता था और न ही वाहन स्वामी को गाड़ी वापस करता था। अभी तक आरोपी द्वारा करीब सवा सौ वाहनों की बिक्री किया जाना बताया गया है। पुलिस गिरोह के अन्य लोगों का भी पता लगा रही है। खुलासा करने वाली टीम में शहर कोतवाल पंकज सिंह, सर्विलांस सेल प्रभारी अक्षय कुमार, मनीष यादव, प्रवीण शुक्ला आदि शामिल रहे।
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एसपी यमुना प्रसाद ने शनिवार को पुलिस लाइन सभागार में पत्रकार वार्ता में बताया कि पवन कुमार मौर्या निवासी ग्राम व पोस्ट हसौर थाना टिकैतनगर ने बीते दिनों शहर कोतवाली में सूचना दी थी कि आरआर कार बाजार एण्ड ट्रैवल्स हजरतगंज लखनऊ के मालिक रजीउल्ला खान मेरी कार को प्रतिमाह बीस हजार रुपये किराया देने के नाम पर इकरारनामा किया था। लेकिन बीते चार महीने तक किराया देने के उपरांत बंद कर दिया। इसके बाद पता चला है कि मेरी कार को कूटरचित दस्तावेज तैयार करके धोखाधड़ी व जालसाजी से दूसरों को बेच दिया है।
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जब कार वापस मांगी गई तो गाली व धमकी दी जा रही है। इस पर एसपी ने पुलिस की तीन टीमों को लगाया। पुलिस ने जब केस दर्ज कर जांच शुरू की तो एक आरोपी रजीउल्ला खां निवासी मोहल्ला बांसगांव महोली थाना हुजूरपुर जिला बहराइच को पुलिस ने शुक्रवार रात रोडवेज बस स्टॉप बाराबंकी से गिरफ्तार किया। आरोपी के निशानदेही पर धोखाधड़ी कर बेची गयी 32 लग्जरी कारों को भी बरामद किया गया। शहर कोतवाली और क्राइम ब्रांच की टीम को यह सफलता मिली।
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दस से 50 हजार में लगती थी गाड़ी मालिक को चपत
पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसका आरआर कार बाजार टूर एण्ड ट्रेवेल्स के नाम से हजरतगंज लखनऊ में ऑफिस है। वह अपने ऑफिस के सहारे लोगों की लग्जरी कार को ट्रेवेल्स में लगाने व प्रतिमाह अच्छा किराया देने का प्रलोभन देकर गाड़ी ले लेता था।
इसके बाद वाहन लेकर एक खरीद/बेचीनामा फर्जी तैयार करके उनकी बिक्री होने तक कीमत के हिसाब से 10 हजार से 50 हजार रुपये तक प्रतिमाह देने के लिए कार के मालिकों को कहता था किन्तु वाहन स्वामियों को 2-3 माह ही पैसा देकर मोबाइल पर कॉल नहीं उठाता था और न ही मिलता था। इधर गाड़ियों को सस्ते दामों में बेच दिया जाता था और तय दाम में से ग्राहक से लगभग 80 फीसदी रुपये इसके द्वारा ले लिया जाता था और 20 फीसदी रुपये यह कहकर नहीं लिया जाता था कि गाड़ियों के ट्रांसफर होने पर दीजिएगा, जिससे वाहन स्वामी को अपनी गाड़ी की बिक्री का पता न चल सके।
इस तरह सारे रुपयों को अपने पास रख लेता था। न तो गाड़ी को ग्राहक के नाम ट्रांसफर कराता था और न ही वाहन स्वामी को गाड़ी वापस करता था। अभी तक आरोपी द्वारा करीब सवा सौ वाहनों की बिक्री किया जाना बताया गया है। पुलिस गिरोह के अन्य लोगों का भी पता लगा रही है। खुलासा करने वाली टीम में शहर कोतवाल पंकज सिंह, सर्विलांस सेल प्रभारी अक्षय कुमार, मनीष यादव, प्रवीण शुक्ला आदि शामिल रहे।