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Barabanki News: अलार्म बजते ही बंकर में शरण लेने की मजबूरी

Sat, 05 Oct 2024 05:17 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Sat, 05 Oct 2024 05:17 AM IST
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Compulsion to take shelter in bunker as soon as alarm sounds
कुमुदेश मिश्रा
बाराबंकी। इस्राइल और ईरान के मध्य छिड़ी जंग के बीच बाराबंकी के श्रमिकों और उनके परिवार के लोगों का हाल बेहाल है। अधिक बमबारी वाले इलाकों में काम करने वाले ज्यादातर श्रमिकों को छुट्टी देकर बंकर में रहने की सख्त हिदायत दी गई है। बमबारी होने पर अलार्म बजते ही श्रमिक अपनी बैरकों में शरण लेने को मजबूर हो जाते हैं। फिलहाल वापसी की डगर भी आसान नहीं नजर आ रही है।
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जिले के 250 श्रमिक इस्राइल में रहकर परिवार की बेहतरी के लिए दिनरात एक किए हैं। कोई बेकरी में काम कर रहा है तो कोई किसी बिल्डिंग के निर्माण में लगा हुआ है। कुछ दिनों से दो मुल्कों के बीच तेज हुए घमासान का असर इन श्रमिकों पर भी पड़ रहा है।
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देवा थाना क्षेत्र के ग्राम नई बस्ती, साले नगर, घेरी से तमाम श्रमिक इस्राइल के अलग-अलग शहरों में रह रहे हैं। नई बस्ती निवासी मंगल सिंह अपने गांव के करीब 13 लोगों के साथ गए थे। अभी वह बिस्किट फैक्टरी में काम करते हैं लेकिन तीन दिन से छुट्टी पर हैं। उनके भतीजे नीरज सिंह ने बताया कि वहां से चाचा ने जो वीडियो भेजे हैं, वे बेहद डरावने हैं। ऐसा नजारा आज तक कभी नहीं देखा है।
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राजकुमार, रोशन, संजय, मोनू, सोनू, ललित, दिनेश, लक्ष्मण, राकेश, जितेंद्र, बबलू व चंचल समेत अन्य लोगों के परिजन भी खासा डरे हुए हैं। सुरेश सिंह अपने पुत्र सोनू व लक्ष्मण को घर वापस आने के लिए कह रहे हैं। निंदूरा क्षेत्र के दौलतपुर गांव के शिवकुमार, गोरखनाथ, कमलेश और सरोज इस्राइल के तेलबीन शहर में हैं और मिसाइल के गोले देख दहशत में हैं। परिजनों से बात कर पल-पल की जानकारी दे रहे हैं।

मदीनपुर के मानसिंह, गिरिराज, राकेश, उमेश, रामसजीवन व लालपति सिंह के परिजन भी खासा डरे हुए हैं। परिजन बताते हैं कि श्रमिकों को भारतीय दूतावास के अधिकारियों-कर्मचारियों से संपर्क में रहने को कहा गया है, एसएमएस के जरिये हमलों की जानकारी दी जा रही है।



कुमुदेश मिश्रा छह सालों से इस्राइल में कर रहे रिसर्च
इस्राइल में बमबारी के बीच रामसनेहीघाट के डॉ. कुमदेश मिश्रा रिसर्च में लगे हुए हैं। देवीगंज निवासी डाॅ. कमलेश मिश्रा के पुत्र डाॅ. कुमुदेश (40) छह वर्षों से अपनी पत्नी व पुत्र के साथ इस्राइल के जेरूसलेम के हेबरो यूनिवर्सिटी में न्यूरोसाइंस पर रिसर्च कर रहे हैं। वह बताते हैं कि इस्राइल के अन्य क्षेत्रों की तुलना में जेरुसलेम शहर सुरक्षित है। हालांकि कुछ दिनों पहले हुई बमबारी के समय परिवार सहित आधे घंटे से अधिक समय तक बंकर में रहना पड़ा था। इस्राइल में सरकार के निर्देशों का पालन करने पर सुरक्षित रहा जा सकता है। किसी भी हमले से पहले सरकार द्वारा बने होम कमांड एप पर मैसेज आ जाता है व मोबाइल में चेतावनी का अलार्म भी बजने लगता है। मैसेज आते ही भागकर बंकरों में जाना पड़ता है। खतरा टल जाने के बाद फिर मैसेज आता है। घर पर माता-पिता से प्रतिदिन बात हो जाती है।
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