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Barabanki News: कोर्ट पहुंचा जनेस्मा के सामने चबूतरे उजाड़ने का मामला
Fri, 21 Feb 2025 12:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 21 Feb 2025 12:39 AM IST
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बाराबंकी। जनेस्मा के सामने चबूतरे उजाड़ने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले में आधा दर्जन आवंटियोें की तरफ से बीते सप्ताह दो याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल की गईं थी। कोर्ट की लखनऊ पीठ ने बीती 18 फरवरी को इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नगर पालिका को छह हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिका दाखिल करने वालों में भारत यादव, चंद्रिका प्रसाद, अश्विनी, आमिर हुसैन व किरन सोनी प्रमुख तौर पर शामिल हैं। नगर पालिका के ईओ संजय कुमार शुक्ल ने बताया कि कोर्ट द्वारा तय समयावधि में जवाब दाखिल करने की कवायद शुरू कर दी गई है। ईओ का कहना है कि याचिका करने वालों ने चबूतरा हटाए जाने के बारे में सही तथ्य कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किए हैं। सिर्फ चबूतरा हटाने की बात पर ही जोर दिया गया है। जबकि हकीकत में जिन लोगों को चबूतरे वर्ष 2015 में आवंटित किए गए थे, उन्होंने शर्तों का उल्लंघन करने के साथ ही चबूतरों का स्वरूप भी बदल दिया।
जांच में 104 चबूतरों मेें से 84 चबूतरों पर लोहे की बड़ी-बड़ी दुकानें रखी पाई गईं। चबूतरों का किराया 47 रुपये प्रतिदिन की दर से निर्धारित किया गया था, वह भी आवंटियों ने जमा नहीं किया । लगातार जारी नोटिस के बाद कुछ आवंटियों ने ही आंशिक किराया जमा कराया। अभी भी इन आवंटियों पर किराया राशि का 1.30 करोड़ रुपये बकाया है। बताया कि कुछ आवंटियों द्वारा नियमों के इतर चबूतरे दूसरे लोगों को बेचे जाने की बात भी सामने आई। इसकी जांच भी कराई जा रही है। कोर्ट में इस मसले पर प्रभावी पैरवी कर बकाया किराया राशि की वसूली सुनिश्चित कराई जाएगी।
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याचिका दाखिल करने वालों में भारत यादव, चंद्रिका प्रसाद, अश्विनी, आमिर हुसैन व किरन सोनी प्रमुख तौर पर शामिल हैं। नगर पालिका के ईओ संजय कुमार शुक्ल ने बताया कि कोर्ट द्वारा तय समयावधि में जवाब दाखिल करने की कवायद शुरू कर दी गई है। ईओ का कहना है कि याचिका करने वालों ने चबूतरा हटाए जाने के बारे में सही तथ्य कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किए हैं। सिर्फ चबूतरा हटाने की बात पर ही जोर दिया गया है। जबकि हकीकत में जिन लोगों को चबूतरे वर्ष 2015 में आवंटित किए गए थे, उन्होंने शर्तों का उल्लंघन करने के साथ ही चबूतरों का स्वरूप भी बदल दिया।
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जांच में 104 चबूतरों मेें से 84 चबूतरों पर लोहे की बड़ी-बड़ी दुकानें रखी पाई गईं। चबूतरों का किराया 47 रुपये प्रतिदिन की दर से निर्धारित किया गया था, वह भी आवंटियों ने जमा नहीं किया । लगातार जारी नोटिस के बाद कुछ आवंटियों ने ही आंशिक किराया जमा कराया। अभी भी इन आवंटियों पर किराया राशि का 1.30 करोड़ रुपये बकाया है। बताया कि कुछ आवंटियों द्वारा नियमों के इतर चबूतरे दूसरे लोगों को बेचे जाने की बात भी सामने आई। इसकी जांच भी कराई जा रही है। कोर्ट में इस मसले पर प्रभावी पैरवी कर बकाया किराया राशि की वसूली सुनिश्चित कराई जाएगी।
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