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किसानों को मनाने में प्रशासन को छूटा पसीना
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 01 Feb 2016 11:33 PM IST
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किसानों के लखनऊ कूच के ऐलान से सोमवार को जिला प्रशासन सिर के बल खड़ा रहा। अपनी मांगों को लेकर गन्ना कार्यालय में मौजूद करीब सात हजार किसानों को मनाने में प्रशासन के पसीने छूट गए। जिले के सभी थानों की पुलिस और पीएसी की जबरदस्त फोर्स होने के बाद भी अधिकारी सख्ती करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। जैसे-जैसे वक्त बीतता जा रहा था, किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा था। दोपहर तीन बजे एक बार जब किसान हाईवे की तरफ बढ़े तो अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए। फिर एडीएम ने भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश सिंह टिकैत और प्रांतीय महासचिव मुकेश सिंह को समझाने का प्रयास किया। कुछ देर बाद किसान नेता मुख्य सचिव से वार्ता के लिए राजी हुए। तब जाकर अधिकारियों ने राहत की सांस ली। इसके बाद किसानों का सात सदस्यीय दल एडीएम के साथ लखनऊ रवाना हुआ।
सोमवार को सुबह से ही गन्ना कार्यालय परिसर में किसानों का जमावड़ा होने लगा। देखते ही देखते दोपहर तक करीब सात हजार किसान एकत्र हो गए। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती जा रही थी वैसे-वैसे प्रशासन के माथे पर शिकन आती जा रही थी। किसानों को संबोधित करते हुए भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को 18 जनवरी को ही अल्टीमेटम दे दिया गया था कि यदि गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ाया गया और किसानों की समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ तो एक फरवरी को हजारों किसान बाराबंकी से लखनऊ कूच करेंगे। मौके पर पहुंचे अपर जिलाधिकारी हरिकेश चौरिसया ने किसानों से वार्ता की लेकिन बात नहीं बन सकी। कोई निराकरण न होता देख किसानों का आक्रोश भड़क उठा। शाम करीब तीन बजे हजारों की संख्या में किसान गन्ना परिसर से लखनऊ की ओर चल पड़े। यह देख जिला प्रशासन का पसीना छूट गया। अधिकारी किसानों की मान मन्नौवल करते रहे।
बाद में यह तय हुआ कि राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्य सचिव से वार्ता के लिए जाएगा। शाम को करीब साढ़े पांच बजे अपर जिलाधिकारी सात किसान नेताओं को लेकर लखनऊ रवाना हो गए। वहीं लखनऊ कूच करने वाले किसानों को जिलाधिकारी आवास के बगल बने ऑफीसर्स क्लब में रोक दिया गया। इस मौके पर भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीवान चंद चौधरी, प्रांतीय महासचिव मुकेश सिंह, जिलाध्यक्ष लखनऊ हरिनाम सिंह, अनिल वर्मा, रामकिशोर पटेल आदि मौजूद रहे।
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सोमवार को सुबह से ही गन्ना कार्यालय परिसर में किसानों का जमावड़ा होने लगा। देखते ही देखते दोपहर तक करीब सात हजार किसान एकत्र हो गए। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती जा रही थी वैसे-वैसे प्रशासन के माथे पर शिकन आती जा रही थी। किसानों को संबोधित करते हुए भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को 18 जनवरी को ही अल्टीमेटम दे दिया गया था कि यदि गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ाया गया और किसानों की समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ तो एक फरवरी को हजारों किसान बाराबंकी से लखनऊ कूच करेंगे। मौके पर पहुंचे अपर जिलाधिकारी हरिकेश चौरिसया ने किसानों से वार्ता की लेकिन बात नहीं बन सकी। कोई निराकरण न होता देख किसानों का आक्रोश भड़क उठा। शाम करीब तीन बजे हजारों की संख्या में किसान गन्ना परिसर से लखनऊ की ओर चल पड़े। यह देख जिला प्रशासन का पसीना छूट गया। अधिकारी किसानों की मान मन्नौवल करते रहे।
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बाद में यह तय हुआ कि राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्य सचिव से वार्ता के लिए जाएगा। शाम को करीब साढ़े पांच बजे अपर जिलाधिकारी सात किसान नेताओं को लेकर लखनऊ रवाना हो गए। वहीं लखनऊ कूच करने वाले किसानों को जिलाधिकारी आवास के बगल बने ऑफीसर्स क्लब में रोक दिया गया। इस मौके पर भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीवान चंद चौधरी, प्रांतीय महासचिव मुकेश सिंह, जिलाध्यक्ष लखनऊ हरिनाम सिंह, अनिल वर्मा, रामकिशोर पटेल आदि मौजूद रहे।
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