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Barabanki News: डॉटा फीडिंग में बीएलओ बेहाल
Sun, 30 Nov 2025 12:47 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 30 Nov 2025 12:47 AM IST
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सिद्धौर ब्लाॅक के पत्थर पुरवा गांव में गणना प्रपत्र भरवाते बीएलओ व शिक्षक। संवाद
बाराबंकी। विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत मतदाताओं को बांटे गए गणना प्रपत्र (विवरण फॉर्म) को वापस लेने और उनकी बीएलओ एप पर फीडिंग करने में कर्मचारियों का हाल बेहाल है।
बीएलओ बने कर्मचारियों की मुख्य परेशानी यह है कि प्रपत्र पर मतदाता को अपना नवीनतम पासपोर्ट साइज़ फोटो भी चिपकाना जरूरी है, लेकिन अधिकांश मतदाता फोटो उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। कई गांवों में बीएलओ प्रपत्र बांटने के बाद उन्हें सही भरा हुआ वापस पाने के लिए जूझ रहे हैं।
हरख ब्लॉक के ग्राम बरेहटा के बीएलओ पीके श्रीवास्तव बताते हैं कि इस समय वैवाहिक कार्यक्रम चल रहे हैं। घर-घर जाने पर पता चलता है कि कोई मायके गया है तो कोई बहन या रिश्तेदार के यहां शादी में। तमाम लोग कई दिन बाद भी अपनी फोटो नहीं दे रहे हैं। ऐसे लोगों का प्रपत्र भरवाने के बाद भी फोटो के अभाव में फीडिंग नहीं हो पा रही है।
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बीएलओ पवन का कहना है कि इस काम ने उनकी पूरी सहालग निगल ली है, वे किसी रिश्तेदार की शादी में भी नहीं जा पाए। उन्होंने बताया कि बीएलओ एप भी अक्सर बंद हो जाता है। जब एप चलता है, तब संबंधित मतदाता उपलब्ध नहीं होते हैं। वहीं, अधिकारी लगातार डाटा फीडिंग के लिए दबाव बनाए हैं।
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बीएलओ बने कर्मचारियों की मुख्य परेशानी यह है कि प्रपत्र पर मतदाता को अपना नवीनतम पासपोर्ट साइज़ फोटो भी चिपकाना जरूरी है, लेकिन अधिकांश मतदाता फोटो उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। कई गांवों में बीएलओ प्रपत्र बांटने के बाद उन्हें सही भरा हुआ वापस पाने के लिए जूझ रहे हैं।
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हरख ब्लॉक के ग्राम बरेहटा के बीएलओ पीके श्रीवास्तव बताते हैं कि इस समय वैवाहिक कार्यक्रम चल रहे हैं। घर-घर जाने पर पता चलता है कि कोई मायके गया है तो कोई बहन या रिश्तेदार के यहां शादी में। तमाम लोग कई दिन बाद भी अपनी फोटो नहीं दे रहे हैं। ऐसे लोगों का प्रपत्र भरवाने के बाद भी फोटो के अभाव में फीडिंग नहीं हो पा रही है।
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बीएलओ पवन का कहना है कि इस काम ने उनकी पूरी सहालग निगल ली है, वे किसी रिश्तेदार की शादी में भी नहीं जा पाए। उन्होंने बताया कि बीएलओ एप भी अक्सर बंद हो जाता है। जब एप चलता है, तब संबंधित मतदाता उपलब्ध नहीं होते हैं। वहीं, अधिकारी लगातार डाटा फीडिंग के लिए दबाव बनाए हैं।