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Barabanki News: ...संभल जाइए, बॉडी बनाना छोड़ एंटीबॉडी बनाइए
Sun, 26 Nov 2023 01:21 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 26 Nov 2023 01:21 AM IST
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बाराबंकी। शहर के कमरियाबाग स्थित यंग स्ट्रीम इंटर कॉलेज में शनिवार को नक्षत्र फाउंडेशन की ओर से वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में विज्ञान संचार की भूमिका विषय पर शैक्षिक दक्षता वृद्धि व्याख्यानमाला की 9वीं प्रस्तुति का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान लखनऊ के पूर्व उपनिदेशक डाॅ. प्रदीप श्रीवास्तव, अंतरराष्ट्रीय कवि एवं वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान पंकज प्रसून मौजूद रहे।
डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव ने कहा कि असफलता ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। किस तरह से उन्होंने एक नई साइंस साइंटूनिक्स को जन्म दिया और कैसे आउट स्टैंडिंग यंग पर्सन ऑफ द वर्ल्ड का खिताब पाया, इसके बारे में छात्र-छात्राओं को रूबरू कराते हुए कहा कि आने वाला भविष्य नैनो टेक्नोलॉजी का है। भविष्य में ऐसे नैनो फाइबर से कपड़े बनाए जाएंगे, जिन्हें धोने की कभी जरूरत नहीं पड़ेगी। इसलिए छात्र-छात्राएं विज्ञान की दुनिया में कुछ नया करते रहें।
पंकज प्रसून ने कहा कि 140 करोड़ आबादी वाले देश को नोबल पुरस्कार नहीं मिलता है तो इसका मतलब यह है कि यहां पर वैज्ञानिक चेतना का अभाव है। जिस डीएनए के बारे में छात्र को नर्सरी में ही जान लेना चाहिए, उसे हाईस्कूल में बताया जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साइंस को सीरियस नहीं बल्कि सेलिब्रेशन बनाने की जरूरत है। उन्होंने अपने कवि अंदाज में बाराबंकी की हवा प्रदूषित हो रही है, संभल जाइए, बॉडी बनाना छोड़ अब एंटीबॉडी बनाइए पढ़कर छात्र-छात्राओं को उत्साहित किया।
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इसके साथ ही समंदर की है बेचैनी उसे साहिल नहीं मिलता, यहां तो आदमी का आदमी से दिल नहीं मिलता। जहां पर खून हिंदुस्तान का रग-रग में बहता है, वहां की पत्तियों में आज क्लोरोफिल नहीं मिलता पढ़कर पर्यावरण पर अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर कॉलेज के प्रधानाचार्य विनय श्रीवास्तव, नक्षत्र फाउंडेशन की संरक्षक रेखा झा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम संचालन डॉ. ऋचा आर्या ने किया।
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डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव ने कहा कि असफलता ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। किस तरह से उन्होंने एक नई साइंस साइंटूनिक्स को जन्म दिया और कैसे आउट स्टैंडिंग यंग पर्सन ऑफ द वर्ल्ड का खिताब पाया, इसके बारे में छात्र-छात्राओं को रूबरू कराते हुए कहा कि आने वाला भविष्य नैनो टेक्नोलॉजी का है। भविष्य में ऐसे नैनो फाइबर से कपड़े बनाए जाएंगे, जिन्हें धोने की कभी जरूरत नहीं पड़ेगी। इसलिए छात्र-छात्राएं विज्ञान की दुनिया में कुछ नया करते रहें।
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पंकज प्रसून ने कहा कि 140 करोड़ आबादी वाले देश को नोबल पुरस्कार नहीं मिलता है तो इसका मतलब यह है कि यहां पर वैज्ञानिक चेतना का अभाव है। जिस डीएनए के बारे में छात्र को नर्सरी में ही जान लेना चाहिए, उसे हाईस्कूल में बताया जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साइंस को सीरियस नहीं बल्कि सेलिब्रेशन बनाने की जरूरत है। उन्होंने अपने कवि अंदाज में बाराबंकी की हवा प्रदूषित हो रही है, संभल जाइए, बॉडी बनाना छोड़ अब एंटीबॉडी बनाइए पढ़कर छात्र-छात्राओं को उत्साहित किया।
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इसके साथ ही समंदर की है बेचैनी उसे साहिल नहीं मिलता, यहां तो आदमी का आदमी से दिल नहीं मिलता। जहां पर खून हिंदुस्तान का रग-रग में बहता है, वहां की पत्तियों में आज क्लोरोफिल नहीं मिलता पढ़कर पर्यावरण पर अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर कॉलेज के प्रधानाचार्य विनय श्रीवास्तव, नक्षत्र फाउंडेशन की संरक्षक रेखा झा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम संचालन डॉ. ऋचा आर्या ने किया।