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Barabanki News: खतरनाक मांझे पर रोक के लिए अब जागरूकता अभियान
Tue, 01 Sep 2026 12:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 01 Sep 2026 12:10 AM IST
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बाराबंकी। पतंगों में इस्तेमाल किए जाने वाले खतरनाक नायलॉन, सीसालेपित और चीन निर्मित मांझे के इस्तेमाल पर रोक के लिए अब स्कूली बच्चों को जागरूक बनाया जाएगा। शिक्षा विभाग ने इसकी कवायद शुरू करते हुए स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इसके तहत जिले के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन स्कूलों में अब बच्चों को इस जानलेवा धागे से दूर रहने का पाठ पढ़ाया जाएगा।
इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय ने जिले भर के प्रधानाचार्यों को गाइडलाइन जारी कर निर्देशित किया है कि अब स्कूलों की सुबह की प्रार्थना सभा में छात्र-छात्राओं को सिंथेटिक व चीन में निर्मित मांझे के जानलेवा खतरों से रूबरू कराया जाए। सिर्फ इतना ही नहीं, विद्यार्थियों को खुद के साथ ही दूसरों को भी इसका प्रयोग न करने देने के लिए जागरूक बनाते हुए शपथ दिलाई जाए।
अभिभावकों को भी इस मुहिम से जोड़ने के लिए पीटीएम (माता-पिता शिक्षक बैठक) का सहारा लिया जाएगा। यहां अभिभावकों को इस बात के लिए जागरूक किया जाएगा कि वह बच्चों को सूती धागे से ही पतंग उड़ाने के लिए प्रेरित करें। स्कूलों में निबंध और पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिताओं के जरिये भी इसके इस्तेमाल से होने वाले दुष्परिणामों से बच्चों को जागरूक बनाने के साथ सूचना पट्ट पर इसके खतरों की जानकारी को भी चस्पा किया जाएगा।
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पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के मुताबिक, राज्य में नायलॉन, सीसालेपित और चीन निर्मित मांझे को बनाने, बेचने, भंडारण करने और उपयोग में लाने पर पूरी तरह से रोक है। यह न केवल मानव जीवन के लिए बल्कि आसमान में उड़ने वाले बेजुबान पक्षियों के लिए भी घातक साबित हो रहा है। डीआईओएस अमिता सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर जिले के सभी स्कूलों को प्रार्थना सभा, पीटीएम और प्रतियोगिताओं के जरिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देशित किया गया है।
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इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय ने जिले भर के प्रधानाचार्यों को गाइडलाइन जारी कर निर्देशित किया है कि अब स्कूलों की सुबह की प्रार्थना सभा में छात्र-छात्राओं को सिंथेटिक व चीन में निर्मित मांझे के जानलेवा खतरों से रूबरू कराया जाए। सिर्फ इतना ही नहीं, विद्यार्थियों को खुद के साथ ही दूसरों को भी इसका प्रयोग न करने देने के लिए जागरूक बनाते हुए शपथ दिलाई जाए।
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अभिभावकों को भी इस मुहिम से जोड़ने के लिए पीटीएम (माता-पिता शिक्षक बैठक) का सहारा लिया जाएगा। यहां अभिभावकों को इस बात के लिए जागरूक किया जाएगा कि वह बच्चों को सूती धागे से ही पतंग उड़ाने के लिए प्रेरित करें। स्कूलों में निबंध और पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिताओं के जरिये भी इसके इस्तेमाल से होने वाले दुष्परिणामों से बच्चों को जागरूक बनाने के साथ सूचना पट्ट पर इसके खतरों की जानकारी को भी चस्पा किया जाएगा।
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पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के मुताबिक, राज्य में नायलॉन, सीसालेपित और चीन निर्मित मांझे को बनाने, बेचने, भंडारण करने और उपयोग में लाने पर पूरी तरह से रोक है। यह न केवल मानव जीवन के लिए बल्कि आसमान में उड़ने वाले बेजुबान पक्षियों के लिए भी घातक साबित हो रहा है। डीआईओएस अमिता सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर जिले के सभी स्कूलों को प्रार्थना सभा, पीटीएम और प्रतियोगिताओं के जरिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देशित किया गया है।