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एकेटीयू: अब बीटेक-बीई के बाद सीधे कर सकेंगे पीएचडी
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लखनऊ। एकेटीयू ने पीएचडी अध्यादेश 2023-24 में अहम संशोधन करते हुए बीटेक-बीई के बाद सीधे पीएचडी करने को हरी झंडी दे दी है। इसके लिए अब एमटेक होना अनिवार्य नहीं होगा। विद्या परिषद की मंजूरी के बाद विवि ने शोध की गुणवत्ता बढ़ाने व पीएचडी को यूजीसी के नए निर्देशों के अनुरूप बनाया है।
निर्देश में कहा गया कि चार वर्षीय स्नातक (बीटेक-बीई) के बाद छात्र सीधे पीएचडी कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें 75 प्रतिशत या समकक्ष सीजीपीए प्राप्त करना होगा। ऐसे अभ्यर्थी नियमित प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होकर सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकेंगे। कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि ऐसे छात्रों को पीएचडी के पहले दो वर्षों में न्यूनतम 24 क्रेडिट के 8 पाठ्यक्रम पूरे करने होंगे। इनमें रिसर्च मेथडोलॉजी तथा रिसर्च पब्लिकेशन एंड एथिक्स विषय अनिवार्य होंगे। उन्हें थीसिस जमा करने से पहले दो शोध-पत्र प्रकाशित करना अनिवार्य होगा।
उन्होंने कहा कि इसमें एक शोध-पत्र एबीसीडी सूचीबद्ध जर्नल में प्रकाशित होना चाहिए। दूसरा शोध-पत्र स्कोपस या एबीसीडी सूची के जर्नल में प्रकाशित होना आवश्यक होगा। शोधार्थी प्रथम लेखक होगा, जबकि शोध-निर्देशक सह-लेखक होंगे तथा कुल लेखकों की संख्या पांच से अधिक नहीं होगी।
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कार्यरत पेशेवरों के लिए पार्ट टाइम पीएचडी
विवि ने कार्यरत पेशेवरों के लिए पार्टटाइम पीएचडी को सरल बनाया है। नौकरीपेशा अभ्यर्थी नियोक्ता से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर यूजीसी के प्रावधानों के अनुरूप पार्ट-टाइम पीएचडी में प्रवेश ले सकेंगे। यह नॉन-फेलोशिप श्रेणी में होगी।
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निर्देश में कहा गया कि चार वर्षीय स्नातक (बीटेक-बीई) के बाद छात्र सीधे पीएचडी कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें 75 प्रतिशत या समकक्ष सीजीपीए प्राप्त करना होगा। ऐसे अभ्यर्थी नियमित प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होकर सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकेंगे। कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि ऐसे छात्रों को पीएचडी के पहले दो वर्षों में न्यूनतम 24 क्रेडिट के 8 पाठ्यक्रम पूरे करने होंगे। इनमें रिसर्च मेथडोलॉजी तथा रिसर्च पब्लिकेशन एंड एथिक्स विषय अनिवार्य होंगे। उन्हें थीसिस जमा करने से पहले दो शोध-पत्र प्रकाशित करना अनिवार्य होगा।
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उन्होंने कहा कि इसमें एक शोध-पत्र एबीसीडी सूचीबद्ध जर्नल में प्रकाशित होना चाहिए। दूसरा शोध-पत्र स्कोपस या एबीसीडी सूची के जर्नल में प्रकाशित होना आवश्यक होगा। शोधार्थी प्रथम लेखक होगा, जबकि शोध-निर्देशक सह-लेखक होंगे तथा कुल लेखकों की संख्या पांच से अधिक नहीं होगी।
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कार्यरत पेशेवरों के लिए पार्ट टाइम पीएचडी
विवि ने कार्यरत पेशेवरों के लिए पार्टटाइम पीएचडी को सरल बनाया है। नौकरीपेशा अभ्यर्थी नियोक्ता से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर यूजीसी के प्रावधानों के अनुरूप पार्ट-टाइम पीएचडी में प्रवेश ले सकेंगे। यह नॉन-फेलोशिप श्रेणी में होगी।