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रिश्तों की याद दिला सियासी हलचल बढ़ा गए अख्निलेश
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बाराबंकी। बेनी और मुलायम की जोड़ी राजनीति में सबसे यादगार जोड़ी रही है। इटावा का सैफई और बाराबंकी का सिरौलीगौसपुर के विकास की नींव एक साथ रखी गई। ब्लॉक से लेकर तहसील का दर्जा भी एक ही कैबिनेट की बैठक में पास हुआ। राजनीति के उतार चढ़ाव में कभी मनमुटाव आया तो कभी पार्टी से अलग भी हुए पर रिश्तों की डोर टूटी नहीं। शायद यही कारण है कि आज उनकी पहली पुण्यतिथि पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव रिश्तों पर खुलकर बोले।
कहा जिस तरह से बेनी बाबू नेताजी के साथ हमेशा खड़े रहे उसी तरह हम सभी समाजवादी राकेश के साथ खड़े हैं। उनका हमारा रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं है। मैं बाराबंकी पहली बार राकेश की शादी में आया था। यह बहुत कम लोगों को पता है। वह यहीं नहीं रुके। कहा आजादी के बाद वंचित और पिछड़ों को हक दिलाने के लिए जो संघर्ष नेताजी और बाबूजी ने किया और कभी सिद्धातों से समझौता नहीं किया, उसी संघर्ष की आज जरूरत है।
शनिवार को बेनी प्रसाद वर्मा की पहली पुण्यतिथि पर पहुंचे अखिलेश ने प्रतिमा का अनावरण करने से पहले उनकी पत्नी मालती वर्मा के पैर छूकर आशीर्वाद लिया तो इस मौके पर राकेश वर्मा ने पत्नी, बेटियों और भाई के साथ अखिलेश की अगुवानी में कोई कसर बाकी नहीं रखी। मंच पर पहली बार परिवार की इतनी सक्रियता दिखी। अपने भाषण में राकेश ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा था कि आपके घर कब चलें तो हमने कहा था हम बताएंगे। एक माह पहले कार्यक्रम तय हो गया था पर कुछ लोगों ने मेरे समाज को भड़काने का काम किया।
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मगर आज बाबूजी और नेताजी के विचारों को मानने वालों की भीड़ ये संकल्प लेकर जाए कि साल 2022 में अखिलेश को सीएम बनाएंगे। यहीं बाबूजी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अखिलेश ने भाषण के दौरान जहां पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप का जिक्र कर अंदर होने वाले फैसलों में उनके शामिल होने का संतुलन भी बनाया।
चुनावी वर्ष में सपा अध्यक्ष पार्टी के भीतर संतुलन, भरोसा और जोश का सामंजस्य पैदा कर सबको सिर्फ 22 में समाजवादियों की सरकार बनाने का संदेश दिया। नपेतुले शब्दों में उनके भाषण के निहितार्थ निकाले जाएं तो चाहे जो हो पर आज का ये पूरा आयोजन बाराबंकी से एक चुनावी शंखनाद है। जिसे लेकर जितनी हलचल पहले थी उससे ज्यादा अखिलेश के जाने के बाद और बढ़ गई है।
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कहा जिस तरह से बेनी बाबू नेताजी के साथ हमेशा खड़े रहे उसी तरह हम सभी समाजवादी राकेश के साथ खड़े हैं। उनका हमारा रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं है। मैं बाराबंकी पहली बार राकेश की शादी में आया था। यह बहुत कम लोगों को पता है। वह यहीं नहीं रुके। कहा आजादी के बाद वंचित और पिछड़ों को हक दिलाने के लिए जो संघर्ष नेताजी और बाबूजी ने किया और कभी सिद्धातों से समझौता नहीं किया, उसी संघर्ष की आज जरूरत है।
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शनिवार को बेनी प्रसाद वर्मा की पहली पुण्यतिथि पर पहुंचे अखिलेश ने प्रतिमा का अनावरण करने से पहले उनकी पत्नी मालती वर्मा के पैर छूकर आशीर्वाद लिया तो इस मौके पर राकेश वर्मा ने पत्नी, बेटियों और भाई के साथ अखिलेश की अगुवानी में कोई कसर बाकी नहीं रखी। मंच पर पहली बार परिवार की इतनी सक्रियता दिखी। अपने भाषण में राकेश ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा था कि आपके घर कब चलें तो हमने कहा था हम बताएंगे। एक माह पहले कार्यक्रम तय हो गया था पर कुछ लोगों ने मेरे समाज को भड़काने का काम किया।
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मगर आज बाबूजी और नेताजी के विचारों को मानने वालों की भीड़ ये संकल्प लेकर जाए कि साल 2022 में अखिलेश को सीएम बनाएंगे। यहीं बाबूजी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अखिलेश ने भाषण के दौरान जहां पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप का जिक्र कर अंदर होने वाले फैसलों में उनके शामिल होने का संतुलन भी बनाया।
चुनावी वर्ष में सपा अध्यक्ष पार्टी के भीतर संतुलन, भरोसा और जोश का सामंजस्य पैदा कर सबको सिर्फ 22 में समाजवादियों की सरकार बनाने का संदेश दिया। नपेतुले शब्दों में उनके भाषण के निहितार्थ निकाले जाएं तो चाहे जो हो पर आज का ये पूरा आयोजन बाराबंकी से एक चुनावी शंखनाद है। जिसे लेकर जितनी हलचल पहले थी उससे ज्यादा अखिलेश के जाने के बाद और बढ़ गई है।