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देवा मेला में सारे जहां की खुशबू
Barabanki
Updated Tue, 21 Oct 2014 05:31 AM IST
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देवा (बाराबंकी)। देवा महोत्सव परिसर में सजी विभिन्न स्टाल दुकानों को देखकर यूं लगता है कि, मानों इस मेले में पूरा देश सिमट आया हो। चाहे पंजाब का हलुवा पराठा हो, कश्मीर की गुलाबी चाय या अवध के मुगलई व्यंजनों की श्रंखला हो, या फिर आगरे का पेठा, औरैया का खजला या चाइनीज डिश। इन सभी विख्यात चीजों का केंद्र बन गया है देवा मेला। सारे जहां की खुशबू अपने आप में समाए देवा मेला 2014 भले ही समापन की ओर बढ़ रहा हो, लेकिन परिसर में लगे इन स्टालों/ दुकानों पर देश-विदेश के ग्राहकों की भीड़ जुट रही है।
देवा महोत्सव को अवध की शान माना जाता है और हो भी क्यों न, इस मेले की बेहतरीन व उम्दा खासियतें ही इसे अन्य मेले से कहीं अधिक बल्कि सर्वाधिक हाइटेक व आकर्षक मेले का दर्जा दिलाती हैं। बीते 10 अक्तूबर से शुरू हुए देवा मेला के आठवें दिन मेला अपने पूरे शबाब पर है। संपूर्ण मेला परिसर में जायरीन की भीड़ व शोर के सिवाए सिर्फ पुलिस व प्रशासनिक, राजनेताओं की गाड़ियों के हूटर ही सुनाई पड़ते हैं। इस मेले की खासियत यह है कि, मेला दस दिनों तक पूरे देश की विभिन्न खुशबुओं की भीनी-भीनी महक से सराबोर रहता है। मसलन मेला परिसर में कश्मीरी गुलाबी चाय के स्वाद का लुफ्त महज आठ रुपये में और लखनऊ से लेकर दुबई तक अपनी बिरयानी व मुगलई व्यंजनों के दिलकश स्वाद का लोहा मनवा चुके वाहिद बिरयानी के शौकीनों की भारी भीड़ लगती है। पंजाबी डिश हलुवा पराठा हो या औरैया का मीठा, नमकीन व खोआ का प्रसिद्ध खजला से लेकर चायनीज डिश मोमोज, भेलपूरी, जानीपूरी, चाउमीन, बर्गर, डोसा आदि की धूम है। वहीं परिसर में फिरोजाबाद की चूड़ियां, बरेली का सुरमा, हरियाणा, लुधियाना के गर्म कंबल, रजाई, चादर, मुरादाबाद के बर्तन, मुंबई की आर्टीफिशियल ज्वैलरी से लेकर चायनीज खिलौने आदि की तमाम दुकानें व स्टाल इस मेले की शोभा का चार चांद लगा रहे हैं।
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देवा महोत्सव को अवध की शान माना जाता है और हो भी क्यों न, इस मेले की बेहतरीन व उम्दा खासियतें ही इसे अन्य मेले से कहीं अधिक बल्कि सर्वाधिक हाइटेक व आकर्षक मेले का दर्जा दिलाती हैं। बीते 10 अक्तूबर से शुरू हुए देवा मेला के आठवें दिन मेला अपने पूरे शबाब पर है। संपूर्ण मेला परिसर में जायरीन की भीड़ व शोर के सिवाए सिर्फ पुलिस व प्रशासनिक, राजनेताओं की गाड़ियों के हूटर ही सुनाई पड़ते हैं। इस मेले की खासियत यह है कि, मेला दस दिनों तक पूरे देश की विभिन्न खुशबुओं की भीनी-भीनी महक से सराबोर रहता है। मसलन मेला परिसर में कश्मीरी गुलाबी चाय के स्वाद का लुफ्त महज आठ रुपये में और लखनऊ से लेकर दुबई तक अपनी बिरयानी व मुगलई व्यंजनों के दिलकश स्वाद का लोहा मनवा चुके वाहिद बिरयानी के शौकीनों की भारी भीड़ लगती है। पंजाबी डिश हलुवा पराठा हो या औरैया का मीठा, नमकीन व खोआ का प्रसिद्ध खजला से लेकर चायनीज डिश मोमोज, भेलपूरी, जानीपूरी, चाउमीन, बर्गर, डोसा आदि की धूम है। वहीं परिसर में फिरोजाबाद की चूड़ियां, बरेली का सुरमा, हरियाणा, लुधियाना के गर्म कंबल, रजाई, चादर, मुरादाबाद के बर्तन, मुंबई की आर्टीफिशियल ज्वैलरी से लेकर चायनीज खिलौने आदि की तमाम दुकानें व स्टाल इस मेले की शोभा का चार चांद लगा रहे हैं।
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