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लाल निशान से दो सेमी ऊपर पहुंचा जलस्तर
Barabanki
Updated Sun, 14 Sep 2014 05:30 AM IST
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रामनगर (बाराबंकी)। घाघरा नदी का जलस्तर फिर बढ़ने से तराई में हड़कंप मच गया है। नदी का जलस्तर खतरे का निशान पार कर गया है। नदी का पानी एक सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। नदी में हलचल देख प्रशासन भी सतर्क हो गया है। राजस्व कर्मियाें को नदी के जलस्तर पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
बाढ़ की दुश्वारियां झेल रहे पीड़िताें का दर्द अभी कम भी नहीं हुआ है कि नदी के बढ़ते जलस्तर ने तराई के वासियों की रातों की नींद उड़ा दी है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.070 से बढ़कर 106.096 पहुंच गया है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से दो सेमी ऊपर पहुंच गया है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि नदी का पानी एक सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। वहीं हाल ही में आई बाढ़ से यहां के पीड़ितों को अभी राहत भी नहीं मिली है कि एक बार फिर से नदी के तेवर देख तराई वासी सहम गए हैं। नेपाली पानी ने ऐसा कहर बरपाया था कि चार लोगों की जान चली गई और तीन तहसीलों रामनगर, सिरौलीगौसपुर, रामसनेहीघाट के करीब 200 गांव प्रभावित हो गए थे। गांवों में पानी भर जाने से लोग बंधे पर जीवन गुजार रहे थे। वहीं जो लोग गांव में फंसे थे उनकी रातें छतों पर या फिर पेड़ों पर बने मचान पर गुजर रही थीं। बाढ़ पीड़ितों को दी जाने वाली मदद महज औपचारिकता बनकर रह गई है। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी दिख रही है।
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बाढ़ की दुश्वारियां झेल रहे पीड़िताें का दर्द अभी कम भी नहीं हुआ है कि नदी के बढ़ते जलस्तर ने तराई के वासियों की रातों की नींद उड़ा दी है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.070 से बढ़कर 106.096 पहुंच गया है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से दो सेमी ऊपर पहुंच गया है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि नदी का पानी एक सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। वहीं हाल ही में आई बाढ़ से यहां के पीड़ितों को अभी राहत भी नहीं मिली है कि एक बार फिर से नदी के तेवर देख तराई वासी सहम गए हैं। नेपाली पानी ने ऐसा कहर बरपाया था कि चार लोगों की जान चली गई और तीन तहसीलों रामनगर, सिरौलीगौसपुर, रामसनेहीघाट के करीब 200 गांव प्रभावित हो गए थे। गांवों में पानी भर जाने से लोग बंधे पर जीवन गुजार रहे थे। वहीं जो लोग गांव में फंसे थे उनकी रातें छतों पर या फिर पेड़ों पर बने मचान पर गुजर रही थीं। बाढ़ पीड़ितों को दी जाने वाली मदद महज औपचारिकता बनकर रह गई है। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी दिख रही है।
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