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विभाग में फंसा कोटेदारों का लाखों रुपया
Barabanki
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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बाराबंकी। राशन के उठान के लिए लागू की गई नई व्यवस्था कोटेदारों पर भारी पड़ने लगी है। धनराशि पूरी जमा कराने के बाद उठान के समय पूरा राशन नहीं दिया जाता है। यही नहीं अवशेष धनराशि को अगले माह समायोजित भी नहीं किया जा रहा है। जिससे जिले भर के सभी कोटेदारों का लाखों रुपया विभाग के पास फंस गया है। कोटेदारों की शिकायतों के बाद जिला विपणन अधिकारी ने अवशेष धन को समायोजित करने को शासन को पत्र लिखकर दिशा निर्देश मांगे हैं।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन का पैसा सीधे सरकार के खाते में पहुंचे इसके लिए तीन माह पूर्व जीपीएस सिस्अम लागू किया गया। इसके तहत आवंटन के अनुसार धनराशि का ई-चालान भरकर कोटेदारों को बैंक में जमा करना होता है। चालान जमा करने के बाद निर्धारित धनराशि कोटेदार के खाते से काटकर सीधे सरकार के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। ई-चालान में अवशेष धनराशि के समायोजन की कोई व्यवस्था नहीं है। सूत्रों की माने तो इधर दो-तीन माह से कोटेदारों से पूरा पैसा तो जमा करा लिया जाता है पर राशन 80 से 85 प्रतिशत ही दिया जाता है। विपणन के गोदामों पर मौजूद प्रभारी धनराशि को अगले माह में समायोजित करने की बात कहकर कोटेदारों को टाल देते हैं। उदाहरण के तौर पर नवंबर में जिले के करीब 1250 कोटेदारों से आवंटन के सापेक्ष पूरा पैसा जमा कराया गया। उठान का समय आया तो 22 सौ एमटी चावल की उठान एफसीआई गोदाम से नहीं हो सकी जिससे कोटेदारों को आवंटन से कम चावल दिया जाना लगभग तय है। ऐसे में कोटेदारों का लाखों रुपया विभाग के पास फंस गया है जिसके समायोजन की कोई व्यवस्था विभाग के पास नहीं है।
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सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन का पैसा सीधे सरकार के खाते में पहुंचे इसके लिए तीन माह पूर्व जीपीएस सिस्अम लागू किया गया। इसके तहत आवंटन के अनुसार धनराशि का ई-चालान भरकर कोटेदारों को बैंक में जमा करना होता है। चालान जमा करने के बाद निर्धारित धनराशि कोटेदार के खाते से काटकर सीधे सरकार के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। ई-चालान में अवशेष धनराशि के समायोजन की कोई व्यवस्था नहीं है। सूत्रों की माने तो इधर दो-तीन माह से कोटेदारों से पूरा पैसा तो जमा करा लिया जाता है पर राशन 80 से 85 प्रतिशत ही दिया जाता है। विपणन के गोदामों पर मौजूद प्रभारी धनराशि को अगले माह में समायोजित करने की बात कहकर कोटेदारों को टाल देते हैं। उदाहरण के तौर पर नवंबर में जिले के करीब 1250 कोटेदारों से आवंटन के सापेक्ष पूरा पैसा जमा कराया गया। उठान का समय आया तो 22 सौ एमटी चावल की उठान एफसीआई गोदाम से नहीं हो सकी जिससे कोटेदारों को आवंटन से कम चावल दिया जाना लगभग तय है। ऐसे में कोटेदारों का लाखों रुपया विभाग के पास फंस गया है जिसके समायोजन की कोई व्यवस्था विभाग के पास नहीं है।
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