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घाघरा में ड्रेजिंग कार्य के बीच तेज हुई कटान, कई गांवों पर मंडरा रहा खतरा
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कोटवाधाम (बाराबंकी)। घाघरा की धारा मोड़ने को कराया जा रहा ड्रेजिंग का काम तराई के कई गांवों के लिए खतरा बन गया है। ड्रेजिंग से तराई में बसे टेपरा गांव के पास घाघरा की कटान तेज हो गई है। ऐसे में बेमौसम घाघरा की कटान ने टेपरा, सनावां, सरायसुर्जन व तेलवारी के ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। मगर, प्रशासन इससे अंजान बना है।
तराई के बाशिंदों को बाढ़ से निजात दिलाने के लिए घाघरा में साढ़े आठ करोड़ की लागत से ड्रेजिंग कार्य जनवरी 2018 में प्रदेश सरकार के मंत्री धर्म सिंह व स्वाती सिंह ने पूजा पाठ कर शुरू कराया था। इसका उद्देश्य घाघरा की धारा को मोड़ना था। मगर, इस काम से एक बार भी तराई के किनारे बसे कई गांवों में कटान शुरू हो गई है। ऐसे में किसानों के खेत घाघरा में समा रहे हैं तो उनके मकानों को भी खतरा है।
ग्रामीण साहेबदीन ने बताया कि हो रहे ड्रेजिंग कार्य के कारण नदी का पानी गांव की तरफ मोडे़ जाने से हम लोगों की कृषि योग्य भूमि घाघरा में समाई जा रही है। ग्रामीण गुरूप्रसाद ने बताया कि पहले भी घाघरा ने हमारी जमीनें लील ली हैं, अब बची जमीने भी समा जाने से खाने तक का संकट पैदा हो जाएगा। सोहन, हनोमान, हरिनाम आदि ने बताया कि कट रही जमीनों के लिये प्रशासन व सिंचाई विभाग, बाढ खंण्ड के अधिकारियों ने जल्द ही संज्ञान नही लिया तो खेतों के बाद गांवों में कटान का खतरा और बढ़ जाएगा।
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तराई के बाशिंदों को बाढ़ से निजात दिलाने के लिए घाघरा में साढ़े आठ करोड़ की लागत से ड्रेजिंग कार्य जनवरी 2018 में प्रदेश सरकार के मंत्री धर्म सिंह व स्वाती सिंह ने पूजा पाठ कर शुरू कराया था। इसका उद्देश्य घाघरा की धारा को मोड़ना था। मगर, इस काम से एक बार भी तराई के किनारे बसे कई गांवों में कटान शुरू हो गई है। ऐसे में किसानों के खेत घाघरा में समा रहे हैं तो उनके मकानों को भी खतरा है।
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ग्रामीण साहेबदीन ने बताया कि हो रहे ड्रेजिंग कार्य के कारण नदी का पानी गांव की तरफ मोडे़ जाने से हम लोगों की कृषि योग्य भूमि घाघरा में समाई जा रही है। ग्रामीण गुरूप्रसाद ने बताया कि पहले भी घाघरा ने हमारी जमीनें लील ली हैं, अब बची जमीने भी समा जाने से खाने तक का संकट पैदा हो जाएगा। सोहन, हनोमान, हरिनाम आदि ने बताया कि कट रही जमीनों के लिये प्रशासन व सिंचाई विभाग, बाढ खंण्ड के अधिकारियों ने जल्द ही संज्ञान नही लिया तो खेतों के बाद गांवों में कटान का खतरा और बढ़ जाएगा।
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