{"_id":"5b4247554f1c1bbf248b5432","slug":"61531070293-barabanki-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़क, बिजली जैसी कई सुविधाओं से अछूता है तिवारीपुरवा गांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़क, बिजली जैसी कई सुविधाओं से अछूता है तिवारीपुरवा गांव
Updated Sun, 08 Jul 2018 11:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सड़क, बिजली से अछूता है तिवारीपुरवा गांव
क्रासर
- कीचड़ भरे रास्ते व गंदगी के ढेर बनी पहचान
फोटो-29, 30
अमर उजाला ब्यूूरो
बेलहरा (बाराबंकी)। तिवारीपुरवा गांव के लोग आज भी बिजली, पानी व सड़क के लिए तरस रहे हैं। कहने के लिए भले ही कई योजनाएं चल रही हों, पर इस गांव में एक भी योजना का लाभ नहीं पहुंच सका है। ग्रामीण कच्चे रास्ते पाटते हैं, पानी के लिए खुद ही हैंडपंप लगवाते हैं। जरा ही बारिश होने पर गांव का संपर्क टूट जाता है, लोग कीचड़ से होकर पूरा सीजन गुजरने को मजबूर रहते हैं। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों से सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
विकास खंड सूरतगंज क्षेत्र के करीब 500 आबादी वाले तिवारीपुरवा मजरे भिरिया गांव में आजादी के 70 साल बाद भी बिजली नसीब नहीं हुई है। यहां के ग्रामीण आज भी बिना बिजली के अंधेरो में जीवन व्यतीत करने को विवश हैं। यही नहीं गांव को जाने वाले मार्ग पर सड़क तो दूर की बात है खड़ंजा तक नहीं लगा है। एक दशक पूर्व जो सरकारी हैंडपंप लगे भी थे वह खराब पड़े हैं। लोग प्यास बुझाने के लिए निजी हैंडपंप का सहारा ले रहे हैं। गांव में बिजली न होने अंधेरे में चिराग जलाकर पढ़ाई करने को बच्चे मजबूर हैं। गांव के रामलखन व महेश बताते हैं कि आजादी के 70 साल बीतने के बाद शहर और गांव तरक्की कर रहे हैं, लेकिन हमारा गांव आज भी मूलभूत विकास योजनाओं से कोसों दूर है।
वर्जन-
गांव में आखिर क्यों कार्य नहीं कराए गए इसके लिए खंड विकास अधिकारी से पूछा जाएगा। उसके बाद योजना बद्घ तरीके से गांव तक योजनाएं हर हाल में पहुंचाई जाएंगी।
विज्ञापन
- राम नरायण यादव, एसडीएम फतेहपुर
विज्ञापन
क्रासर
- कीचड़ भरे रास्ते व गंदगी के ढेर बनी पहचान
फोटो-29, 30
अमर उजाला ब्यूूरो
बेलहरा (बाराबंकी)। तिवारीपुरवा गांव के लोग आज भी बिजली, पानी व सड़क के लिए तरस रहे हैं। कहने के लिए भले ही कई योजनाएं चल रही हों, पर इस गांव में एक भी योजना का लाभ नहीं पहुंच सका है। ग्रामीण कच्चे रास्ते पाटते हैं, पानी के लिए खुद ही हैंडपंप लगवाते हैं। जरा ही बारिश होने पर गांव का संपर्क टूट जाता है, लोग कीचड़ से होकर पूरा सीजन गुजरने को मजबूर रहते हैं। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों से सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
विकास खंड सूरतगंज क्षेत्र के करीब 500 आबादी वाले तिवारीपुरवा मजरे भिरिया गांव में आजादी के 70 साल बाद भी बिजली नसीब नहीं हुई है। यहां के ग्रामीण आज भी बिना बिजली के अंधेरो में जीवन व्यतीत करने को विवश हैं। यही नहीं गांव को जाने वाले मार्ग पर सड़क तो दूर की बात है खड़ंजा तक नहीं लगा है। एक दशक पूर्व जो सरकारी हैंडपंप लगे भी थे वह खराब पड़े हैं। लोग प्यास बुझाने के लिए निजी हैंडपंप का सहारा ले रहे हैं। गांव में बिजली न होने अंधेरे में चिराग जलाकर पढ़ाई करने को बच्चे मजबूर हैं। गांव के रामलखन व महेश बताते हैं कि आजादी के 70 साल बीतने के बाद शहर और गांव तरक्की कर रहे हैं, लेकिन हमारा गांव आज भी मूलभूत विकास योजनाओं से कोसों दूर है।
विज्ञापन
वर्जन-
गांव में आखिर क्यों कार्य नहीं कराए गए इसके लिए खंड विकास अधिकारी से पूछा जाएगा। उसके बाद योजना बद्घ तरीके से गांव तक योजनाएं हर हाल में पहुंचाई जाएंगी।
विज्ञापन
- राम नरायण यादव, एसडीएम फतेहपुर