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देवता भी तरसते हैं मानव जीवन को -शंकराचार्य
Updated Sat, 10 Jun 2017 02:31 AM IST
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देवता भी तरसते हैं मानव जीवन को : शंकराचार्य
-हजारों श्रद्धालुओं से तन्मयता से सुना शंकराचार्य को
-सत्संग से होती है परम लक्ष्य की प्राप्ति
फोटो- 32, 34
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। दार्शनिक, व्यवहारिक व वैज्ञानिक धरातल पर मानव जीवन का बहुत महत्व है। मानव परमात्मा की कृपा से मिले स्थूल शरीर के माध्यम से ही सभी तरह की अभिव्यक्ति कर पाता है। आध्यात्मिक जीवन में अति महत्वपूर्ण इस संदेश को पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी ने बाराबंकी शहर में स्थित ओएसिस लॉन में आयोजित धर्मसभा में दिया।
हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि मानव जीवन के लिये देवता भी तरसते हैं क्योंकि सभी प्राणियों में मानव ही है जो अपने कर्मों के द्वारा परमात्मा तत्व की प्राप्ति और जीवन-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो सकता है। इसी क्रम में मानव शरीर के महत्व पर बोलते हुए शंकराचार्य जी ने कहा कि मानव के तीन शरीर होते हैं स्थूल, सूक्ष्म व कारण शरीर, वह स्थूल से वाह्य जगत में अपनी दिखने वाली इंन्द्रियों का उपायोग करके सांसारिक कर्म प्रपंच करता है, और इसी स्थूल के माध्यम से सूक्ष्म शरीर में स्थित काम, क्रोध आदि की अभिव्यक्ति करता है और कारण शरीर से जीव व्यक्त होता है, जीव शिव का स्वरूप है। शिव को ही आत्म तत्व कहते है इसी में हमारे जीवन की अपार सामर्थ्य छिपी हुई है जो सद्गुरु और सत्संग से प्रकट होकर हमारा कल्याण करती है।
प्रतिदिन तीन वर्षों से हो रही है प्रभात फेरी
कार्यक्रमों की शुरुआत प्रात: 5 बजे धनावत सेवा ट्रस्ट के तत्वाधान में आयोजित प्रभात फेरी से हुई। पिछले तीन वर्षों से लगातार प्रतिदिन होने वाली प्रभात फेरी में पालकी के ऊपर भगवान नारायण की पादुकाओं को सैकड़ों श्रद्धालु अपने कंधे पर उठाये व जयकारा लगाते गोविंद बोलो, गोपाल बोलो......भजन गाते हुए चल रहे थे। प्रभात फेरी की शुरुआत धनोखर हनुमान मंदिर से हुई इसके बाद निबलेट चौराहा, छाया चौराहा, कैलाश आश्रम, सरावगी जैन मंदिर से होते हुए विश्राम सदन धर्मशाला में फेरी कार्यक्रम ने विश्राम अगले दिन तक विश्राम लिया। दोपहर 12 बजे धनावत सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष कमल जैन के निवास पर आयोजित गोष्ठी में आये श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य जी से प्रश्न पूछकर अपनी-अपनी जिज्ञासायें शांत की। गोष्ठी में पूर्व न्यायाधीश, शिक्षाविद सहित कई क्षेत्रों के महत्वपूर्ण लोग मौजूद रहे।
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-हजारों श्रद्धालुओं से तन्मयता से सुना शंकराचार्य को
-सत्संग से होती है परम लक्ष्य की प्राप्ति
फोटो- 32, 34
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। दार्शनिक, व्यवहारिक व वैज्ञानिक धरातल पर मानव जीवन का बहुत महत्व है। मानव परमात्मा की कृपा से मिले स्थूल शरीर के माध्यम से ही सभी तरह की अभिव्यक्ति कर पाता है। आध्यात्मिक जीवन में अति महत्वपूर्ण इस संदेश को पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी ने बाराबंकी शहर में स्थित ओएसिस लॉन में आयोजित धर्मसभा में दिया।
हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि मानव जीवन के लिये देवता भी तरसते हैं क्योंकि सभी प्राणियों में मानव ही है जो अपने कर्मों के द्वारा परमात्मा तत्व की प्राप्ति और जीवन-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो सकता है। इसी क्रम में मानव शरीर के महत्व पर बोलते हुए शंकराचार्य जी ने कहा कि मानव के तीन शरीर होते हैं स्थूल, सूक्ष्म व कारण शरीर, वह स्थूल से वाह्य जगत में अपनी दिखने वाली इंन्द्रियों का उपायोग करके सांसारिक कर्म प्रपंच करता है, और इसी स्थूल के माध्यम से सूक्ष्म शरीर में स्थित काम, क्रोध आदि की अभिव्यक्ति करता है और कारण शरीर से जीव व्यक्त होता है, जीव शिव का स्वरूप है। शिव को ही आत्म तत्व कहते है इसी में हमारे जीवन की अपार सामर्थ्य छिपी हुई है जो सद्गुरु और सत्संग से प्रकट होकर हमारा कल्याण करती है।
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प्रतिदिन तीन वर्षों से हो रही है प्रभात फेरी
कार्यक्रमों की शुरुआत प्रात: 5 बजे धनावत सेवा ट्रस्ट के तत्वाधान में आयोजित प्रभात फेरी से हुई। पिछले तीन वर्षों से लगातार प्रतिदिन होने वाली प्रभात फेरी में पालकी के ऊपर भगवान नारायण की पादुकाओं को सैकड़ों श्रद्धालु अपने कंधे पर उठाये व जयकारा लगाते गोविंद बोलो, गोपाल बोलो......भजन गाते हुए चल रहे थे। प्रभात फेरी की शुरुआत धनोखर हनुमान मंदिर से हुई इसके बाद निबलेट चौराहा, छाया चौराहा, कैलाश आश्रम, सरावगी जैन मंदिर से होते हुए विश्राम सदन धर्मशाला में फेरी कार्यक्रम ने विश्राम अगले दिन तक विश्राम लिया। दोपहर 12 बजे धनावत सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष कमल जैन के निवास पर आयोजित गोष्ठी में आये श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य जी से प्रश्न पूछकर अपनी-अपनी जिज्ञासायें शांत की। गोष्ठी में पूर्व न्यायाधीश, शिक्षाविद सहित कई क्षेत्रों के महत्वपूर्ण लोग मौजूद रहे।
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