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गलत मूल्यांकन पर 50-50 हजार का जुर्माना
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बाराबंकी। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा की उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन में बढ़ी लापरवाही उजागर हुई है। अपनी मेधा पर भरोसा कर छात्रा ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया तो कोर्ट ने भी छात्रा के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उत्तर पुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन कराया।
पहले किए गए मूल्यांकन में त्रुटि मिलने पर उच्च न्यायालय ने लापरवाही करने वाले परीक्षक व उप प्रधान परीक्षक पर 50-50 हजार रुपये के जुर्माने के साथ बोर्ड के कार्यों से पांच वर्ष के लिए डिबार कर दिया। वहीं पुनर्मूल्यांकन में मिले आठ अंक के आधार पर परीक्षाफल संशोधित कर अंक-पत्र व प्रमाण-पत्र छात्रा को उपलब्ध कराने के आदेश सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद को दिए।
मामला बाराबंकी जिले से जुड़ा है। यहां जमील-उर-रहमान किदवाई इस्लामिया गर्ल्स इंटर कॉलेज को वर्ष 2020 की यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा का मूल्यांकन केंद्र बनाया गया था। यहां छात्रा शिवानी राजपूत के अनुक्रमांक 1503327 के गणित विषय की उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन किया गया। मगर, परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद गणित विषय में मिले अंक से छात्रा संतुष्ट नहीं हुई। उसने अपनी मेधा पर भरोसा कर उच्च न्यायालय इलाहाबाद का दरवाजा खटखटाया।
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छात्रा के भविष्य से जुड़े मामले को न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए उसकी उत्तर पुस्तिका का विशेषज्ञों से पुनर्मूल्यांकन कराकर सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश प्रयागराज को कोर्ट में तलब होने के आदेश दिए। इस पर परीक्षा समिति ने दो विषय विशेषज्ञों से अलग-अलग मूल्यांकन कराया तो पूर्व में किया गया मूल्यांकन त्रुटिपूर्ण मिला।
इस पर कोर्ट ने छात्रा को पुनर्मूल्यांकन में मिले आठ अंकों के आधार पर परीक्षाफल को संशोधित कर अंक-पत्र व प्रमाण-पत्र देने के आदेश दिए। वहीं मूल्यांकन में लापरवाही के दोषी परीक्षक व अजीमुद्दीन अशरफ इस्लामियां इंटर कॉलेज के शिक्षक मुहीबुद्दीन और उप प्रधान परीक्षक व डीएवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक घनश्याम को परिषद के कार्यों से पांच वर्ष के लिए डिबार करते हुए प्रत्येक से 50-50 हजार रुपये की धनराशि राजस्व की भांति वसूलने के आदेश डीएम व डीआईओएस को दिए हैं।
डीआईओएस ने दोनों दोषी शिक्षकों को जुर्माने की धनराशि सरकारी खजाने में जमा करने का नोटिस भेजते हुए सेवा पुस्तिका पर न्यायालय का आदेश अंकित करा दिया है।
जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि मूल्यांकन में लापरवाही के दोषी पाए गए दो शिक्षकों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना किया गया है। इसका आदेश मिलते ही उन्हें नोटिस भेजकर एक सप्ताह का समय दिया गया है।
इस अवधि में जुर्माने की रकम न जमा करने पर राजस्व की भांति उनकी परिसंपत्तियों से यह धनराशि वसूल की जाएगी। वहीं पांच साल के लिए डिबार करने का आदेश सेवा पुस्तिका पर दर्ज करा दिया गया है।
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पहले किए गए मूल्यांकन में त्रुटि मिलने पर उच्च न्यायालय ने लापरवाही करने वाले परीक्षक व उप प्रधान परीक्षक पर 50-50 हजार रुपये के जुर्माने के साथ बोर्ड के कार्यों से पांच वर्ष के लिए डिबार कर दिया। वहीं पुनर्मूल्यांकन में मिले आठ अंक के आधार पर परीक्षाफल संशोधित कर अंक-पत्र व प्रमाण-पत्र छात्रा को उपलब्ध कराने के आदेश सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद को दिए।
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मामला बाराबंकी जिले से जुड़ा है। यहां जमील-उर-रहमान किदवाई इस्लामिया गर्ल्स इंटर कॉलेज को वर्ष 2020 की यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा का मूल्यांकन केंद्र बनाया गया था। यहां छात्रा शिवानी राजपूत के अनुक्रमांक 1503327 के गणित विषय की उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन किया गया। मगर, परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद गणित विषय में मिले अंक से छात्रा संतुष्ट नहीं हुई। उसने अपनी मेधा पर भरोसा कर उच्च न्यायालय इलाहाबाद का दरवाजा खटखटाया।
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छात्रा के भविष्य से जुड़े मामले को न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए उसकी उत्तर पुस्तिका का विशेषज्ञों से पुनर्मूल्यांकन कराकर सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश प्रयागराज को कोर्ट में तलब होने के आदेश दिए। इस पर परीक्षा समिति ने दो विषय विशेषज्ञों से अलग-अलग मूल्यांकन कराया तो पूर्व में किया गया मूल्यांकन त्रुटिपूर्ण मिला।
इस पर कोर्ट ने छात्रा को पुनर्मूल्यांकन में मिले आठ अंकों के आधार पर परीक्षाफल को संशोधित कर अंक-पत्र व प्रमाण-पत्र देने के आदेश दिए। वहीं मूल्यांकन में लापरवाही के दोषी परीक्षक व अजीमुद्दीन अशरफ इस्लामियां इंटर कॉलेज के शिक्षक मुहीबुद्दीन और उप प्रधान परीक्षक व डीएवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक घनश्याम को परिषद के कार्यों से पांच वर्ष के लिए डिबार करते हुए प्रत्येक से 50-50 हजार रुपये की धनराशि राजस्व की भांति वसूलने के आदेश डीएम व डीआईओएस को दिए हैं।
डीआईओएस ने दोनों दोषी शिक्षकों को जुर्माने की धनराशि सरकारी खजाने में जमा करने का नोटिस भेजते हुए सेवा पुस्तिका पर न्यायालय का आदेश अंकित करा दिया है।
जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि मूल्यांकन में लापरवाही के दोषी पाए गए दो शिक्षकों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना किया गया है। इसका आदेश मिलते ही उन्हें नोटिस भेजकर एक सप्ताह का समय दिया गया है।
इस अवधि में जुर्माने की रकम न जमा करने पर राजस्व की भांति उनकी परिसंपत्तियों से यह धनराशि वसूल की जाएगी। वहीं पांच साल के लिए डिबार करने का आदेश सेवा पुस्तिका पर दर्ज करा दिया गया है।