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Barabanki News: छह जिलों के 4980 किसान करेंगे अफीम की खेती, अकेले बाराबंकी से 4812 शामिल
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हरख क्षेत्र में लहलहाती अफीम की फसल।
- फोटो : हरख क्षेत्र में लहलहाती अफीम की फसल।
बाराबंकी। बाराबंकी एक बार फिर काले सोने यानी अफीम उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। लाइसेंस प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार की ओर से जारी नई सूची के मुताबिक बाराबंकी समेत छह जिलों के कुल 4980 किसानों को अफीम की खेती का लाइसेंस मिला है, जिनमें 4812 किसान अकेले बाराबंकी के हैं। बाकी पांच जिलों अयोध्या, लखनऊ, रायबरेली, गाजीपुर और मऊ में केवल 168 किसानों को ही यह अनुमति दी गई है। इनमें मऊ जिले में सिर्फ एक किसान को ही लाइसेंस जारी किया गया है।
दरअसल, देश भर में अफीम की सबसे अधिक खेती बाराबंकी जिले में होती है, जिसकी निगरानी सीधे भारत सरकार के अधीन होती है। बाराबंकी का जिला अफीम कार्यालय ही आसपास के छह जिलों के किसानों को लाइसेंस जारी करता है और फसल कटाई के बाद यहीं अफीम जमा की जाती है। इसके बाद अफीम को गाजीपुर की सरकारी फैक्टरी भेजा जाता है। जिला अफीम अधिकारी करुण बिलग्रामी ने बताया कि बाराबंकी अफीम उत्पादन का सबसे प्रमुख जिला है और हर साल यहां के किसान उच्च गुणवत्ता वाली अफीम तैयार करते हैं। करीब एक महीने पहले लाइसेंस प्रक्रिया शुरू हुई थी और अब जारी आंकड़ों में 90 फीसदी से अधिक लाइसेंस बाराबंकी के किसानों के नाम हैं। अधिकारियों के अनुसार बाराबंकी जिले की फतेहपुर तहसील को छोड़कर बाकी सभी तहसीलों में अफीम की खेती होगी। वहीं लखनऊ जिले में केवल मोहनलालगंज, गाजीपुर में जमानिया, और अयोध्या में सोहावल, मिल्कीपुर और रुदौली क्षेत्र में अफीम उत्पादन की अनुमति दी गई है। (संवाद)
758 किसान निकालेंगे अफीम, बाकी डोडा समेत देंगे फसल
अफीम किसानों में से 758 किसान स्वयं अफीम निकालने के लिए चीरा लगाने का कार्य करेंगे, जबकि बाकी 4422 किसान डोडा समेत फसल जमा करेंगे। डोडा के साथ जमा करने वाले लाइसेंस को सीपीएस श्रेणी कहा जाता है।
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जिलेवार किसानों की संख्या
बाराबंकी-4812
लखनऊ-89
अयोध्या- 58
रायबरेली- 11
गाजीपुर- 9
मऊ-1
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दरअसल, देश भर में अफीम की सबसे अधिक खेती बाराबंकी जिले में होती है, जिसकी निगरानी सीधे भारत सरकार के अधीन होती है। बाराबंकी का जिला अफीम कार्यालय ही आसपास के छह जिलों के किसानों को लाइसेंस जारी करता है और फसल कटाई के बाद यहीं अफीम जमा की जाती है। इसके बाद अफीम को गाजीपुर की सरकारी फैक्टरी भेजा जाता है। जिला अफीम अधिकारी करुण बिलग्रामी ने बताया कि बाराबंकी अफीम उत्पादन का सबसे प्रमुख जिला है और हर साल यहां के किसान उच्च गुणवत्ता वाली अफीम तैयार करते हैं। करीब एक महीने पहले लाइसेंस प्रक्रिया शुरू हुई थी और अब जारी आंकड़ों में 90 फीसदी से अधिक लाइसेंस बाराबंकी के किसानों के नाम हैं। अधिकारियों के अनुसार बाराबंकी जिले की फतेहपुर तहसील को छोड़कर बाकी सभी तहसीलों में अफीम की खेती होगी। वहीं लखनऊ जिले में केवल मोहनलालगंज, गाजीपुर में जमानिया, और अयोध्या में सोहावल, मिल्कीपुर और रुदौली क्षेत्र में अफीम उत्पादन की अनुमति दी गई है। (संवाद)
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758 किसान निकालेंगे अफीम, बाकी डोडा समेत देंगे फसल
अफीम किसानों में से 758 किसान स्वयं अफीम निकालने के लिए चीरा लगाने का कार्य करेंगे, जबकि बाकी 4422 किसान डोडा समेत फसल जमा करेंगे। डोडा के साथ जमा करने वाले लाइसेंस को सीपीएस श्रेणी कहा जाता है।
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जिलेवार किसानों की संख्या
बाराबंकी-4812
लखनऊ-89
अयोध्या- 58
रायबरेली- 11
गाजीपुर- 9
मऊ-1