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राजकीय संप्रेक्षण गृह की व्यवस्थाओं पर प्रशासन गंभीर
Updated Mon, 06 Aug 2018 11:49 PM IST
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राजकीय संप्रेक्षण गृह की व्यवस्थाओं पर प्रशासन गंभीर
बाराबंकी। बिहार के मुजफ्फरपुर के बाद देवरिया जिले के बालिका गृह में शर्मनाक घटना के खुलासे से सभी बालिका गृहों की व्यवस्था को लेकर मामला गरमा गया है।
जिले में राजकीय संप्रेक्षण गृह के अलावा एक निजी बालिका गृह संचालित हो रहा था। मगर दो साल पहले अव्यवस्था से क्षुब्ध एक किशोरी ने छत से कूदकर जान दे दी थी।
जिसके बाद उक्त निजी बालिका गृह बंद करा दिया गया। जिले में संचालित राजकीय संप्रेक्षण गृह में मौजूदा समय में 26 किशोरियां हैं।
यहां की व्यवस्था को लेकर पिछले माह मंत्री स्वाति सिंह ने निरीक्षण किया था। सोमवार को समाज कल्याण अधिकारी ने पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और किशोरियों से बातचीत की।
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जिले के एकमात्र राजकीय संप्रेक्षण गृह (बालिका) में वर्तमान समय में विधि का उल्लंघन करने वाली 26 किशोरियों रह रही हैं। इसमें हाल ही में मिर्जापुर से आई 10 किशोरियां भी शामिल हैं।
इन किशोरियों को यहां व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इन किशोरियों के प्रति विभाग इतना सजग है कि उन्हें पेशी पर कोर्ट ले जाने वाले पुलिसकर्मियाें तक की गेट पर इंट्री कराई जाती है।
पूरे परिसर की सीसीटीवी कैमरे से निगरानी भी होती है। पूर्व में शहर के नवी गंज में संचालित एक संस्था द्वारा किशोरियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा था।
मगर विभाग का कहना है कि, जिस उद्देश्य से संस्था द्वारा ये कार्य किया जा रहा था उसमें कुछ कमियां थीं। जिसके चलते उक्त संस्था को ब्लैक लिस्टेड कर बंद करा दिया गया था।
देवरिया के बालिका गृह में हुई शर्मनाक घटना के बाद शासन के निर्देश पर डीएम उदयभानु त्रिपाठी ने सोमवार को जिला समाज कल्याण अधिकारी को तत्काल संप्रेक्षण गृह भेजकर वहां रह रही किशोरियों के रहन-सहन व व्यवस्था आदि के बारे में रिपोर्ट मांगी है।
इस पर समाज कल्याण अधिकारी ललिता यादव ने संप्रेक्षण गृह जाकर किशोरियों से बातचीत की। जिसकी रिपोर्ट भी वह डीएम को देंगी।
जिला प्रोबेशन अधिकारी अनिल मौर्या ने बताया कि, राजकीय संप्रेक्षण गृह में 26 किशोरियां रह रही हैं। जिनके रहन-सहन से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक पर नजर रखी जाती है।
परिसर में सीसीटीवी कैमरों के साथ ही तीन शिफ्टों में सिपाहियों को तैनात किया गया है। महिला होमगार्डों की तैनाती के लिए एसपी को पत्र भेजा गया है। पूर्व में एक संस्था द्वारा संचालित बालिका गृह को ब्लैक लिस्टेड कर बंद कराया जा चुका है।
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बाराबंकी। बिहार के मुजफ्फरपुर के बाद देवरिया जिले के बालिका गृह में शर्मनाक घटना के खुलासे से सभी बालिका गृहों की व्यवस्था को लेकर मामला गरमा गया है।
जिले में राजकीय संप्रेक्षण गृह के अलावा एक निजी बालिका गृह संचालित हो रहा था। मगर दो साल पहले अव्यवस्था से क्षुब्ध एक किशोरी ने छत से कूदकर जान दे दी थी।
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जिसके बाद उक्त निजी बालिका गृह बंद करा दिया गया। जिले में संचालित राजकीय संप्रेक्षण गृह में मौजूदा समय में 26 किशोरियां हैं।
यहां की व्यवस्था को लेकर पिछले माह मंत्री स्वाति सिंह ने निरीक्षण किया था। सोमवार को समाज कल्याण अधिकारी ने पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और किशोरियों से बातचीत की।
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जिले के एकमात्र राजकीय संप्रेक्षण गृह (बालिका) में वर्तमान समय में विधि का उल्लंघन करने वाली 26 किशोरियों रह रही हैं। इसमें हाल ही में मिर्जापुर से आई 10 किशोरियां भी शामिल हैं।
इन किशोरियों को यहां व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इन किशोरियों के प्रति विभाग इतना सजग है कि उन्हें पेशी पर कोर्ट ले जाने वाले पुलिसकर्मियाें तक की गेट पर इंट्री कराई जाती है।
पूरे परिसर की सीसीटीवी कैमरे से निगरानी भी होती है। पूर्व में शहर के नवी गंज में संचालित एक संस्था द्वारा किशोरियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा था।
मगर विभाग का कहना है कि, जिस उद्देश्य से संस्था द्वारा ये कार्य किया जा रहा था उसमें कुछ कमियां थीं। जिसके चलते उक्त संस्था को ब्लैक लिस्टेड कर बंद करा दिया गया था।
देवरिया के बालिका गृह में हुई शर्मनाक घटना के बाद शासन के निर्देश पर डीएम उदयभानु त्रिपाठी ने सोमवार को जिला समाज कल्याण अधिकारी को तत्काल संप्रेक्षण गृह भेजकर वहां रह रही किशोरियों के रहन-सहन व व्यवस्था आदि के बारे में रिपोर्ट मांगी है।
इस पर समाज कल्याण अधिकारी ललिता यादव ने संप्रेक्षण गृह जाकर किशोरियों से बातचीत की। जिसकी रिपोर्ट भी वह डीएम को देंगी।
जिला प्रोबेशन अधिकारी अनिल मौर्या ने बताया कि, राजकीय संप्रेक्षण गृह में 26 किशोरियां रह रही हैं। जिनके रहन-सहन से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक पर नजर रखी जाती है।
परिसर में सीसीटीवी कैमरों के साथ ही तीन शिफ्टों में सिपाहियों को तैनात किया गया है। महिला होमगार्डों की तैनाती के लिए एसपी को पत्र भेजा गया है। पूर्व में एक संस्था द्वारा संचालित बालिका गृह को ब्लैक लिस्टेड कर बंद कराया जा चुका है।