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हंगामें के बाद परिवारीजनों को मिला शव वाहन
Updated Sat, 22 Jul 2017 12:19 AM IST
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बाराबंकी। इनेमिया ग्रसित एक मासूम को गंभीर हालत में परिजन जिला अस्पताल लेकर गुरुवार की शाम पहुंचे थे। इलाज के दौरान मौत होने के बाद परिजनों ने शव वाहन के लिए चालक को फोन किया तो उसने डीजल न होने का बहाना बनाते हुए मना कर दिया। आक्रोशित परिजनों ने हंगामा काटना शुरू किया तो देर रात शव वाहन से शव को घर भेजा गया।
टिकैतनगर क्षेत्र के ग्राम लोधपुरवा निवासी बुधराम का डेढ़ वर्षीय पुत्र गोलू कई दिनों से इनेमिया (खून की कमी) से ग्रसित था। गुरुवार की शाम करीब सवा छह बजे हालत बिगड़ने पर परिवारीजन उसे लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे। यहां पर बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा बच्चे का इलाज शुरू कर दिया गया। आनकॉल आए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एम पांडेय ने बच्चे की पल्स काफी धीरे होने की बात कहते हुए उसे रेफर करने को कहा। कुछ देर बीते ही थे कि बच्चे की सांसे थम गई। पीड़ित परिवार ने अस्पताल परिसर में दर्ज नि:शुल्क शव वाहन चालक विनोद को फोन किया तो उसने वाहन में डीजल न होने की बात कहते हुए ले जाने को इन्कार कर दिया। आक्रोशित परिवारीजनों ने अस्पताल परिसर में शव वाहन की सुविधा दिलाए जाने के लिए हंगामा काटना शुरू कर दिया। मामला बिगड़ता देख चालक 9.30 बजे शव वाहन लेकर आया और शव ले गया।
शव वाहन में डीजल कम था। चालक को अपने पास से डीजल भराकर शव भेजने को कहा गया था। - डॉ. एसके शुक्ला, नोडल अधिकारी शव वाहन सेवा
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टिकैतनगर क्षेत्र के ग्राम लोधपुरवा निवासी बुधराम का डेढ़ वर्षीय पुत्र गोलू कई दिनों से इनेमिया (खून की कमी) से ग्रसित था। गुरुवार की शाम करीब सवा छह बजे हालत बिगड़ने पर परिवारीजन उसे लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे। यहां पर बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा बच्चे का इलाज शुरू कर दिया गया। आनकॉल आए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एम पांडेय ने बच्चे की पल्स काफी धीरे होने की बात कहते हुए उसे रेफर करने को कहा। कुछ देर बीते ही थे कि बच्चे की सांसे थम गई। पीड़ित परिवार ने अस्पताल परिसर में दर्ज नि:शुल्क शव वाहन चालक विनोद को फोन किया तो उसने वाहन में डीजल न होने की बात कहते हुए ले जाने को इन्कार कर दिया। आक्रोशित परिवारीजनों ने अस्पताल परिसर में शव वाहन की सुविधा दिलाए जाने के लिए हंगामा काटना शुरू कर दिया। मामला बिगड़ता देख चालक 9.30 बजे शव वाहन लेकर आया और शव ले गया।
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शव वाहन में डीजल कम था। चालक को अपने पास से डीजल भराकर शव भेजने को कहा गया था। - डॉ. एसके शुक्ला, नोडल अधिकारी शव वाहन सेवा