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संशोधित- घाघरा का जलस्तर थमा, पर दुश्वारियां बढ़ी
Updated Mon, 17 Jul 2017 10:47 PM IST
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घाघरा का जलस्तर थमा, पर दुश्वारियां बढ़ी
आवागमन के रास्ते में जलभराव, मजदूरी के लिए भटक रहे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
फोटो-45पी
बाराबंकी/टिकैतनगर। घाघरा का बढ़ रहा जलस्तर खतरे के निशान के करीब आकर थम गया है। पर तराई के लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई है। गांव में पानी भर जाने से बंधे पर रह रहे लोगों के आवागमन के रास्ते भी बंद हो गए है। गांवों के संपर्क मार्गों में पानी भर जाने से लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतें हो रही है।
सोमवार को घाघरा का जलस्तर एल्गिन ब्रिज पर 105.906 रहा। तराई में बसे सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट तहसील के नाउनपुरवा, चरपुुरवा , परसावल, नैपुरा व कमियार गांवों में पानी भरा है। ग्रामीणों के आवागमन के रास्तें भी जलभराव से बंद है। ऐसे में ग्रामीणों को बंधे से निकलकर आने-जाने में काफी दिक्कतें हो रही है। ट्रैक्टर-ट्राली से राहत कार्य में लगे कर्मचारी व अधिकारी बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंच रहे है। ग्रामीण भी कर्मचारियों को लेकर आने वाले ट्रैक्टर का इंतजार कर रहे है। लोगों को पीने की पानी व मवेशियों को चारे का संकट सता रहा है। तराई क्षेत्र के करीब आधा दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं। अधिकांश बाढ़ पीड़ितों के घरो का व राहत सामग्री के नाम पर मिला राशन भी खत्म हो गया है। हालात यह हैं कि लोग मजदूरी के लिए गोंडा जिले के करनैलगंज, गौरा बाजार व चेचरी बाजार जाते है। मगर, तराई में बाढ़ को लेकर ठंड़ेेेे-पड़े धंधों को लेकर उन्हें कोई काम नही मिल पा रहा है। ऐसे में उन्हें निराश होकर ही वापस लौटना पड़ रहा है।
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आवागमन के रास्ते में जलभराव, मजदूरी के लिए भटक रहे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
फोटो-45पी
बाराबंकी/टिकैतनगर। घाघरा का बढ़ रहा जलस्तर खतरे के निशान के करीब आकर थम गया है। पर तराई के लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई है। गांव में पानी भर जाने से बंधे पर रह रहे लोगों के आवागमन के रास्ते भी बंद हो गए है। गांवों के संपर्क मार्गों में पानी भर जाने से लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतें हो रही है।
सोमवार को घाघरा का जलस्तर एल्गिन ब्रिज पर 105.906 रहा। तराई में बसे सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट तहसील के नाउनपुरवा, चरपुुरवा , परसावल, नैपुरा व कमियार गांवों में पानी भरा है। ग्रामीणों के आवागमन के रास्तें भी जलभराव से बंद है। ऐसे में ग्रामीणों को बंधे से निकलकर आने-जाने में काफी दिक्कतें हो रही है। ट्रैक्टर-ट्राली से राहत कार्य में लगे कर्मचारी व अधिकारी बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंच रहे है। ग्रामीण भी कर्मचारियों को लेकर आने वाले ट्रैक्टर का इंतजार कर रहे है। लोगों को पीने की पानी व मवेशियों को चारे का संकट सता रहा है। तराई क्षेत्र के करीब आधा दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं। अधिकांश बाढ़ पीड़ितों के घरो का व राहत सामग्री के नाम पर मिला राशन भी खत्म हो गया है। हालात यह हैं कि लोग मजदूरी के लिए गोंडा जिले के करनैलगंज, गौरा बाजार व चेचरी बाजार जाते है। मगर, तराई में बाढ़ को लेकर ठंड़ेेेे-पड़े धंधों को लेकर उन्हें कोई काम नही मिल पा रहा है। ऐसे में उन्हें निराश होकर ही वापस लौटना पड़ रहा है।
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