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Barabanki News: 900 की जगह 1800 बंदी, लेटने की दिक्कत, बिगड़ रही सेहत
Fri, 26 May 2023 12:58 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 26 May 2023 12:58 AM IST
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बाराबंकी। जेल में क्षमता से दोगुने बंदी होने से दिक्कतें खड़ी हो रही हैं। दिन तो कट जाता है, मगर रात में जब बंदी सोने जाते हैं तो लेटने के लिए जगह खोजनी पड़ती है। बंदी बैैरकों के अंदर से लेकर रास्ते तक जैसे-तैसे लेट रहे हैं। इससे भीषण गर्मी में परेशानी बढ़ गई है। जेल अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 200 से अधिक बंदी इलाज व दवा के लिए पहुंच रहे हैं। भीड़ को देखते हुए जेल प्रशासन ने बैरकों की फर्श समतल करा दी है।
जिला जेल में करीब डेढ़ दर्जन बैैरक हैं। इनकी क्षमता अधिकतम 960 बंदी रखने की है। लेकिन कुछ साल से जेल में बंदियों की संख्या 1800 तक पहुंच रही है। यानी कि क्षमता से करीब दोगुनी संख्या। ऐसे में व्यवस्थाओं की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। बंदियों की संख्या बढ़ने के कारण उन्हें लेटने की दिक्कतें शुरु हो गईं हैं। बैरकों में बंदियों को लेटने के लिए सीमेंट के चबूतरे बनाए गए थे, मगर जब इनकी संख्या दोगुनी हो गई तो जेल प्रशासन ने चबूतरे हटवा कर बैैरकों की फर्श को समतल करा दिया, ताकि बंदियों को लेटने की जगह मिल सके।
अब जहां एक बंदी लेटता था, वहां दो लेट रहे हैं। रात में बैरक में जगह नहीं होती है। शौचालय आदि जाने के लिए बंदियों को रास्ता नहीं मिलता। अक्सर एक-दूसरे पर पैर पड़ जाने से बहस तक हो जाती है। भीषण गर्मी में बंदी एक-दूसरे से सटकर लेटने को मजबूर हैं। जेल प्रशासन भले ही इससे कोई समस्या पैदा होने की बात नहीं कहता, मगर हकीकत यह है कि भीड़ बढ़ने से बेहाल बंदी बीमार हो रहे हैं। मौजूदा समय में करीब 1600 बंदी जेल में निरुद्घ हैं। अधिकारियों के ही अनुसार रोजाना 200 से अधिक बंदी ओपीडी में दवा लेने जाते हैं। जबकि सात बंदियों का इलाज लखनऊ के केजीएमयू व बाहरी अस्पतालों में चल रहा है। अभी एक सप्ताह पहले ही एक बंदी की हृदयगति रुकने से मौत हो चुकी है। (संवाद)
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एक बैरक में 50 की जगह 90 बंदी
कुछ साल पहले तक जेल में बंदियों की संख्या 1200 के आसपास रहती थी तो हर बैरक में 40 से 50 बंदी रहते थे। लेकिन अब मजबूरी में एक-एक बैरक में 80 से 90 बंदी मजबूरी में रखे जा रहे हैं।
बढ़ाए गए इंतजाम, त्वरित सुनवाई शुरु
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बंदियों की सुनवाई त्वरित हो रही है। इससे बंदियों के रिहा होने की संख्या बढ़ने लगी है। बीते 15 दिन में करीब 100 बंदी रिहा हुए। गर्मी को देखते हुए पंखों की संख्या बढ़ा गई हैं। बंदियों को खाने में हरी सब्जियां दी जा रही हैं। ठंडे पानी का इंतजाम है।
- पीपी सिंह, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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जिला जेल में करीब डेढ़ दर्जन बैैरक हैं। इनकी क्षमता अधिकतम 960 बंदी रखने की है। लेकिन कुछ साल से जेल में बंदियों की संख्या 1800 तक पहुंच रही है। यानी कि क्षमता से करीब दोगुनी संख्या। ऐसे में व्यवस्थाओं की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। बंदियों की संख्या बढ़ने के कारण उन्हें लेटने की दिक्कतें शुरु हो गईं हैं। बैरकों में बंदियों को लेटने के लिए सीमेंट के चबूतरे बनाए गए थे, मगर जब इनकी संख्या दोगुनी हो गई तो जेल प्रशासन ने चबूतरे हटवा कर बैैरकों की फर्श को समतल करा दिया, ताकि बंदियों को लेटने की जगह मिल सके।
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अब जहां एक बंदी लेटता था, वहां दो लेट रहे हैं। रात में बैरक में जगह नहीं होती है। शौचालय आदि जाने के लिए बंदियों को रास्ता नहीं मिलता। अक्सर एक-दूसरे पर पैर पड़ जाने से बहस तक हो जाती है। भीषण गर्मी में बंदी एक-दूसरे से सटकर लेटने को मजबूर हैं। जेल प्रशासन भले ही इससे कोई समस्या पैदा होने की बात नहीं कहता, मगर हकीकत यह है कि भीड़ बढ़ने से बेहाल बंदी बीमार हो रहे हैं। मौजूदा समय में करीब 1600 बंदी जेल में निरुद्घ हैं। अधिकारियों के ही अनुसार रोजाना 200 से अधिक बंदी ओपीडी में दवा लेने जाते हैं। जबकि सात बंदियों का इलाज लखनऊ के केजीएमयू व बाहरी अस्पतालों में चल रहा है। अभी एक सप्ताह पहले ही एक बंदी की हृदयगति रुकने से मौत हो चुकी है। (संवाद)
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एक बैरक में 50 की जगह 90 बंदी
कुछ साल पहले तक जेल में बंदियों की संख्या 1200 के आसपास रहती थी तो हर बैरक में 40 से 50 बंदी रहते थे। लेकिन अब मजबूरी में एक-एक बैरक में 80 से 90 बंदी मजबूरी में रखे जा रहे हैं।
बढ़ाए गए इंतजाम, त्वरित सुनवाई शुरु
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बंदियों की सुनवाई त्वरित हो रही है। इससे बंदियों के रिहा होने की संख्या बढ़ने लगी है। बीते 15 दिन में करीब 100 बंदी रिहा हुए। गर्मी को देखते हुए पंखों की संख्या बढ़ा गई हैं। बंदियों को खाने में हरी सब्जियां दी जा रही हैं। ठंडे पानी का इंतजाम है।
- पीपी सिंह, वरिष्ठ जेल अधीक्षक