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जान हथेली पर रखकर वाहनों में ढोए जा रहे स्कूली बच्चे

Thu, 06 Jul 2017 04:03 AM IST
Updated Thu, 06 Jul 2017 04:03 AM IST
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जान हथेली पर रखकर वाहनों में ढोए जा रहे स्कूली बच्चे
जान हथेली पर रखकर वाहनों में ढोए जा रहे स्कूली बच्चे
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बाराबंकी। जान जोखिम में डालकर स्कूली बच्चों को अनफिट वाहनों से ढोया जा रहा है। आदेशों के बाद भी परिवहन विभाग इस पर रोक नहीं लगा पा रहा है। विभाग द्वारा वैसे तो समय समय पर अभियान चलाकर अनफिट वाहनों पर कार्रवाई की जाती है लेकिन इन पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पाती। इसके साथ ही स्कूल संचालक व अभिभावक भी यह ध्यान नहीं देते कि आखिर बच्चे जिस वाहन से स्कूल जा रहे है वह किस हालत में है।

टैंपो व आटो पर भी भूसा की तरह भरकर ढोए जाते बच्चे
जिले में संचालित ज्यादातर स्कूलों मेें अनफिट वाहन चलवाए जा रहे है। यहां चलने वाली बस व वैन कंडम होने के बाद भी बच्चों को ढोने का काम कर रही है। वैसे तो स्कूल संचालक दावा करते है कि बच्चों के लाने वाले वाहन फिट व पूरे मानक के अनुसार चलाए जाते हैं लेकिन हकीकत कुछ और ही होती है। इसके साथ एलपीजी गैस से चलने वाले वाहनों से भी बच्चों को लाने व ले जाने का काम किया जाता है। इन सभी बातों को परिवहन विभाग भी सब कुछ जानने के बाद भी अनजान बना हुआ है। इसके साथ ही टैंपो व आटो पर भी बच्चों को भूसा की तरह भरकर ढोया जा रहा है लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। विभाग भी तभी चेतता है जब कोई बड़ा हादसा हो जाए नहीं तो ऐसे ही चलता रहता है।
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ये होने चाहिए वाहनों के मानक
स्कूलों में चलने वाले वाहनों के मानक के मुताबिक वाहन के चालक के पास कम से कम पांच साल का अनुभव होना चाहिए। प्रत्येक वाहन मेें दो दरवाजे होने चाहिए। वाहन के अंदर सीट ऐसी होनी चाहिए की बच्चे आराम से बैठे सकें। बच्चों को बैठाकर वाहन कम रफ्तार में चलाना चाहिए। वाहनों में फायर उपकरण होने चाहिए व एलपीजी गैस किट लगे वाहनों से बच्चों को ले जाना पूर्णतया प्रतिबंधित है। लेकिन नियमों का पालन बहुत कम ही स्कूलों द्वारा किया जाता है।
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सीएनजी वाहनों पर रोक लगाने की जरूरत
स्कूल मेें चलने वाले सभी छोटे व बड़े वाहनो का फिटनेस एआरटीओ द्वारा पास करवाया जाता है। बच्चों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए हर दिन वाहन चालकों के साथ बैठकर उन्हें दिशा निर्देश दिए जाते हैं कि बच्चों को लाने ले जाने के दौरान पूरी सावधानी बरती जाए। स्कूलों में सिर्फ डीजल वाहन ही चलाने चाहिए व सीएनजी वाहनों पर पूरी तरह से रोक लगाने की जरूरत है।
-रामकिशोर शुक्ला, प्रधानाचार्य महारानी लक्ष्मीबाई मेमोरियल इंटर कॉलेज, लखपेड़ाबाग

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- स्कूल में चलने वाले वाहन एआरटीओ के फिटनेस के आधार पर ही चलते है। वाहन चालकों को भी हर समय बताया जाता है कि बच्चों को लाने ले जाने के दौरान सावधानी बरतें और रफ्तार कम रखें।
अंकुर माथुर, प्रबंधक बालाजी का बपचन कांवेट स्कूल, सत्यप्रेमीनगर
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पांच सौ वाहन पंजीकृत
एआरटीओ कार्यालय में जिले के स्कूलों में चलने वाले करीब पांच सौ वाहन पंजीकृत कराए गए है। हालांकि विभाग का दावा है कि स्कूलों में बिना पंजीकरण के कोई वाहन नहीं चलते है लेकिन इसके बावजूद कई जगहों पर निजी तरीके से बच्चों को लाने ले जाने के लिए वाहन लगाए गए है। परिवहन विभाग के आंकड़ों की माने तो एक साल में अनफिट मिले 72 स्कूली वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

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चलेगा चेकिंग अभियान
स्कूलों में चलने वाले प्रत्येक वाहनों के फिटनेस की जांच कराने के लिए जिले के समस्त थानों की पुलिस को चेकिंग अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। बच्चों को स्कूल ले जाने व लाने वाले वाहन सही हो और उनकी पूरी फिटनेस हो यदि इसमें किसी स्कूल संचालक की लापरवाही उजाकर होगी तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शशीकांत तिवारी, प्रभारी एसपी
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