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पर्यावरण की अनदेखी से हालात भयावह
Updated Mon, 05 Jun 2017 02:19 PM IST
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पर्यावरण की अनदेखी से हालात भयावह
44.4 डिग्री पहुंचा पारा, प्रदूषण के चलते दूषित हो रहीं नदियां
विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष :
अमर उजाला ब्यूरो
पर्यावरण के प्रति दिनों-दिन हो रही अनदेखी, पेड़ो पर चल रहा आरा, नदियों में प्रदूषित पानी। वाटर रिचार्ज की बात तो दूर घर-घर समरसेबल पंप लगाकर पानी का दोहन दिनों-दिन हमारे हालात को भयावह बनाते जा रहे है। एक दशक के तापमान पर नजर डालें तो एक-दो बार को छोड़ हालात बिगड़ते ही जा रहे है। बिगड़ते पर्यावरण का ही यह नतीजा है कि रविवार को पारा 44.4 डिग्री पहुंच गया। जिससे लोगों को दोपहर में घरों में कैद होना पड़ा। यही नहीं पर्यावरण संरक्षण में बरती जा रही लापरवाही की बात करें तो जिले में जीवनदायिनी कही जाने वाली नदियां गंदे नालों में तब्दील होकर बीमारियां फैलाने लगी। हजारों पौधे बीते साल लगे, पर अब वहां ठूठ ही नजर आ रहे हैं। अस्पताल हों या सड़क व गलियां, जहां देखिए कूड़ा-कचरा लगा है। पेड़ों की अधाधुंध कटान से खुले में सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। जो आदमी से लेकर पशु-पक्षियों पर भारी पड़ रहा है। ऐसे में अगर हम अब भी जागरूक नहीं हुए तो भविष्य में इसका खामियाजा भावी पीढ़ी को भुगतना होगा।
भीषण गर्मी से जनजीवन बेहाल, रविवार रहा सीजन का सबसे अधिक गर्म दिन
विश्व पर्यावरण दिवस से एक दिन पूर्व गर्मी ने अपना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। रविवार को इस वर्ष की गर्मी का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस रहा। तापमान बढ़ने से आसमान से ही नहीं धरती से भी आग निकलने लगी। रविवार का दिन होने के कारण लोग घरों में दुबके रहे। वहीं अनुरक्षण कार्य के चलते बंद विद्युत आपूर्ति से लोग बिलबिला उठे।
रविवार की सुबह से ही मौसम का मिजाज तल्ख रहा। दोपहर में तो तेज तपिश से मानों आसमान से आग बरस रही हो। तापमान भी अब तक की शिखर ऊंचाई 44.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। जमीन से निकल रही गर्म भभक ने लोगों की मुसीबत और बढ़ा रखची थी। राहगीर तो अगौंछा, स्टॉल व छतरी के सहारे घर से निकलने की हिम्मत जुटाई। लेकिन सब बेअसर रहा। ठेलों पर एक से दो रुपये में ठंडे पानी के गिलास बिकेे। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को तापमान अधिकतम 44.4 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस अधिकतम आर्द्रता 74 फीसद दर्ज की गई।
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मुख्य बाजार में पसरा रहा सन्नाटा
दोपहर में कड़ी धूप के चलते मुख्य बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। रविवार के चलते कई दुकाने बंद भी रही। दोपहर करीब एक बजे हमेशा व्यस्त रहने वाला देवा तिराहे पर भी सन्नाटा दिखाई दिया। राहगीर पानी की तलाश में इधर उधर भटकते रहे।
अनुरक्षण कार्य के चलते बंद आपूर्ति से हुई परेशानी
भीषण गर्मी में बिजली की बार-बार आवाजाही से उपभोक्ता बेहाल है। न सिर्फ शहरी बल्कि ग्रामीण इलाके में भी कटौती हो रही है। विद्युत वितरण खंड के अंतर्गत विद्युत उपकेंद्र पल्हरी से जुड़े मोहल्ले लखपेड़ाबाग, महर्षि नगर, बाल बिहार कालोनी, कार्तिक विहार की विद्युत आपूर्ति सुबह आठ बजे से बारह बजे तक बंद रही।
बीते 10 वर्षों में चार जून का अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस में)
वर्ष - अधिकतम तापमान
2007 - 43.6
2008 - 42.6
2009- 43.8
2010 - 44.1
2011 - 45.1
2012 - 44.7
2013- 43.9
2014- 44.3
2015 - 44.7
2016 - 44.3
04 जूून 2017- 44.4
प्रदूषण के कारण काला हो गया रेठ नदी का पानी
नदी में छोड़ा जा रहा स्लाटर हाउस का गंदा पानी व मवेशियों के अवशेष
कुर्सी थाना क्षेत्र में ग्राम मीरनगर बनौगा के पास एक स्लाटर हाउस से मवेशियों का खून व अवशेष रेठ नदी में बहाया जा रहा है। नदी को कई अन्य जगह पर गंदा किया जा रहा है। इससे नदी में मछलियां मर गई हैं। इन सबके बावजूद प्रशासन द्वारा रेठ नदी के प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। हद तो तब हो गई जब बीते छह अप्रैल को नदी के पानी का सैंपल लिया गया और उसकी जांच रिपोर्ट में पानी को स्वच्छ बता दिया है। वहीं नदी के आसपास के रहने वाले लोगों के घरों के नलों से भी दूषित पानी निकलने पर पेयजल की समस्या खड़ी हो गई है।
जिल में घाघरा, कल्याणी, रेठ तीन नदियां हैं। जिसमें रेठ नदी सबसे ज्यादा प्रदूषित है। हाल ही में जिले की एक संस्था द्वारा गोमती और उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए यात्रा निकाली गई। इसके बाद भी रेठ नदी को स्वच्छ बनाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं हो सकी। अमरून फैक्ट्री में कटने वाले मवेशियों का खून व उनका अवशेष मीर नगरबनौगा के पास रेठ नदी में बहाया जा रहा है। जिससे यहां का पानी काला हो गया है। इससे नदी में मछलियां मर गईं हैं। मवेशी तक नदी का पानी नहीं पीते। नदी में फैक्ट्री द्वारा छोड़ी जा रही गंदगी के चलते उठने वाली दुर्गंध से आस-पास के ग्रामीणों का जीना मुहाल है। ग्राम उमरा के पास सोना गोल्ड फैक्ट्री मुर्गी दाना बनाती है, इसका गंदा पानी भी नदी में छोड़ा जा रहा है।
जमुरिया में भी गिरता था पालिका बूचड़खाने का पानी
शहर के बीच निकला जमुरिया नाला (जुबली रीवर) में शहर के गंदे पानी के अलावा नगर पालिका क्षेत्र के पीरबटावन स्थित बूचड़ खाने में कटने वाले मवेशियों का खून व अवशेष बहाए जाते थे। जून 2005 में पर्यावरण प्रदूषण टीम ने पानी का नमूना लिया था, जिसमें पानी दूषित मिला था। टीम ने जिलाधिकारी को पत्र लिख बूचड़ खाने को आबादी से दूर किए जाने को कहा था। जमुरिया का दूषित पानी आगे जाकर रेठ नदी को भी दूषित कर रही है।
वर्जन-
रेठ नदी का पानी दूषित तो है ही, प्रदूषण स्तर की जांच के लिए हाल ही में पानी का नमूना भरा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। जब तक जिला प्रशासन का सहयोग नहीं मिलेगा, नदी को प्रदूषण मुक्त नहीं किया जा सकता है।
-चंद्रेश कुमार सिंह, प्रदूषण नियंत्रण प्रकोष्ठ जिला समन्वयक
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44.4 डिग्री पहुंचा पारा, प्रदूषण के चलते दूषित हो रहीं नदियां
विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष :
अमर उजाला ब्यूरो
पर्यावरण के प्रति दिनों-दिन हो रही अनदेखी, पेड़ो पर चल रहा आरा, नदियों में प्रदूषित पानी। वाटर रिचार्ज की बात तो दूर घर-घर समरसेबल पंप लगाकर पानी का दोहन दिनों-दिन हमारे हालात को भयावह बनाते जा रहे है। एक दशक के तापमान पर नजर डालें तो एक-दो बार को छोड़ हालात बिगड़ते ही जा रहे है। बिगड़ते पर्यावरण का ही यह नतीजा है कि रविवार को पारा 44.4 डिग्री पहुंच गया। जिससे लोगों को दोपहर में घरों में कैद होना पड़ा। यही नहीं पर्यावरण संरक्षण में बरती जा रही लापरवाही की बात करें तो जिले में जीवनदायिनी कही जाने वाली नदियां गंदे नालों में तब्दील होकर बीमारियां फैलाने लगी। हजारों पौधे बीते साल लगे, पर अब वहां ठूठ ही नजर आ रहे हैं। अस्पताल हों या सड़क व गलियां, जहां देखिए कूड़ा-कचरा लगा है। पेड़ों की अधाधुंध कटान से खुले में सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। जो आदमी से लेकर पशु-पक्षियों पर भारी पड़ रहा है। ऐसे में अगर हम अब भी जागरूक नहीं हुए तो भविष्य में इसका खामियाजा भावी पीढ़ी को भुगतना होगा।
भीषण गर्मी से जनजीवन बेहाल, रविवार रहा सीजन का सबसे अधिक गर्म दिन
विश्व पर्यावरण दिवस से एक दिन पूर्व गर्मी ने अपना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। रविवार को इस वर्ष की गर्मी का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस रहा। तापमान बढ़ने से आसमान से ही नहीं धरती से भी आग निकलने लगी। रविवार का दिन होने के कारण लोग घरों में दुबके रहे। वहीं अनुरक्षण कार्य के चलते बंद विद्युत आपूर्ति से लोग बिलबिला उठे।
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रविवार की सुबह से ही मौसम का मिजाज तल्ख रहा। दोपहर में तो तेज तपिश से मानों आसमान से आग बरस रही हो। तापमान भी अब तक की शिखर ऊंचाई 44.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। जमीन से निकल रही गर्म भभक ने लोगों की मुसीबत और बढ़ा रखची थी। राहगीर तो अगौंछा, स्टॉल व छतरी के सहारे घर से निकलने की हिम्मत जुटाई। लेकिन सब बेअसर रहा। ठेलों पर एक से दो रुपये में ठंडे पानी के गिलास बिकेे। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को तापमान अधिकतम 44.4 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस अधिकतम आर्द्रता 74 फीसद दर्ज की गई।
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मुख्य बाजार में पसरा रहा सन्नाटा
दोपहर में कड़ी धूप के चलते मुख्य बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। रविवार के चलते कई दुकाने बंद भी रही। दोपहर करीब एक बजे हमेशा व्यस्त रहने वाला देवा तिराहे पर भी सन्नाटा दिखाई दिया। राहगीर पानी की तलाश में इधर उधर भटकते रहे।
अनुरक्षण कार्य के चलते बंद आपूर्ति से हुई परेशानी
भीषण गर्मी में बिजली की बार-बार आवाजाही से उपभोक्ता बेहाल है। न सिर्फ शहरी बल्कि ग्रामीण इलाके में भी कटौती हो रही है। विद्युत वितरण खंड के अंतर्गत विद्युत उपकेंद्र पल्हरी से जुड़े मोहल्ले लखपेड़ाबाग, महर्षि नगर, बाल बिहार कालोनी, कार्तिक विहार की विद्युत आपूर्ति सुबह आठ बजे से बारह बजे तक बंद रही।
बीते 10 वर्षों में चार जून का अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस में)
वर्ष - अधिकतम तापमान
2007 - 43.6
2008 - 42.6
2009- 43.8
2010 - 44.1
2011 - 45.1
2012 - 44.7
2013- 43.9
2014- 44.3
2015 - 44.7
2016 - 44.3
04 जूून 2017- 44.4
प्रदूषण के कारण काला हो गया रेठ नदी का पानी
नदी में छोड़ा जा रहा स्लाटर हाउस का गंदा पानी व मवेशियों के अवशेष
कुर्सी थाना क्षेत्र में ग्राम मीरनगर बनौगा के पास एक स्लाटर हाउस से मवेशियों का खून व अवशेष रेठ नदी में बहाया जा रहा है। नदी को कई अन्य जगह पर गंदा किया जा रहा है। इससे नदी में मछलियां मर गई हैं। इन सबके बावजूद प्रशासन द्वारा रेठ नदी के प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। हद तो तब हो गई जब बीते छह अप्रैल को नदी के पानी का सैंपल लिया गया और उसकी जांच रिपोर्ट में पानी को स्वच्छ बता दिया है। वहीं नदी के आसपास के रहने वाले लोगों के घरों के नलों से भी दूषित पानी निकलने पर पेयजल की समस्या खड़ी हो गई है।
जिल में घाघरा, कल्याणी, रेठ तीन नदियां हैं। जिसमें रेठ नदी सबसे ज्यादा प्रदूषित है। हाल ही में जिले की एक संस्था द्वारा गोमती और उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए यात्रा निकाली गई। इसके बाद भी रेठ नदी को स्वच्छ बनाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं हो सकी। अमरून फैक्ट्री में कटने वाले मवेशियों का खून व उनका अवशेष मीर नगरबनौगा के पास रेठ नदी में बहाया जा रहा है। जिससे यहां का पानी काला हो गया है। इससे नदी में मछलियां मर गईं हैं। मवेशी तक नदी का पानी नहीं पीते। नदी में फैक्ट्री द्वारा छोड़ी जा रही गंदगी के चलते उठने वाली दुर्गंध से आस-पास के ग्रामीणों का जीना मुहाल है। ग्राम उमरा के पास सोना गोल्ड फैक्ट्री मुर्गी दाना बनाती है, इसका गंदा पानी भी नदी में छोड़ा जा रहा है।
जमुरिया में भी गिरता था पालिका बूचड़खाने का पानी
शहर के बीच निकला जमुरिया नाला (जुबली रीवर) में शहर के गंदे पानी के अलावा नगर पालिका क्षेत्र के पीरबटावन स्थित बूचड़ खाने में कटने वाले मवेशियों का खून व अवशेष बहाए जाते थे। जून 2005 में पर्यावरण प्रदूषण टीम ने पानी का नमूना लिया था, जिसमें पानी दूषित मिला था। टीम ने जिलाधिकारी को पत्र लिख बूचड़ खाने को आबादी से दूर किए जाने को कहा था। जमुरिया का दूषित पानी आगे जाकर रेठ नदी को भी दूषित कर रही है।
वर्जन-
रेठ नदी का पानी दूषित तो है ही, प्रदूषण स्तर की जांच के लिए हाल ही में पानी का नमूना भरा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। जब तक जिला प्रशासन का सहयोग नहीं मिलेगा, नदी को प्रदूषण मुक्त नहीं किया जा सकता है।
-चंद्रेश कुमार सिंह, प्रदूषण नियंत्रण प्रकोष्ठ जिला समन्वयक