{"_id":"5b42476b4f1c1b55238b52fc","slug":"111531070315-barabanki-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानकों को दरकिनार कर संचालित हो रहे मेडिकल स्टोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानकों को दरकिनार कर संचालित हो रहे मेडिकल स्टोर
Updated Sun, 08 Jul 2018 11:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मानकों को दरकिनार कर
मेडिकल स्टोरों का संचालन
क्रासर
- बिना फार्मासिस्टों की मौजूदगी के बेची जा रही दवाएं
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। मानकों को दरकिनार कर जिले में मेडिकल स्टोरों का संचालन किया जा रहा है। लाइसेंस बनवाने के दौरान फार्मासिस्ट की डिग्री तो लगा दी लेकिन मौके पर किसी भी मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट मौजूद नहीं मिलते। इनके संचालक ही खुलेआम दवाओं की बिक्री कर रहे हैं लेकिन विभाग इनके खिलाफ कार्रवाई का साहस नहीं कर पा रहा है। जिले में करीब 12 सौ से ज्यादा मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं। औषधि प्रशासन की ओर से इनको लाइसेंस जारी किए गए है। इसके अलावा कितने मेडिकल स्टोर बिना लाइसेंस के संचालित हो रही है इसकी जानकारी किसी को नहीं है। जबकि अभी कुछ माह पहले हुई छापेमारी में तीन मेडिकल स्टोर बिना लाइसेंस के संचालित होते पाए जाने पर इनके संचालकों के खिलाफ मुकदमा तक लिखाया गया है। विभाग की माने तो नियमानुसार बिना फार्मासिस्ट की मौजूदगी के दवाओं की बिक्री नहीं की जा सकती है। इसलिए लाइसेंस बनवाने के दौरान फार्मासिस्ट की डिग्री को लगाया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। मेडिकल स्टोर संचालक जब लाइसेंस बनवाते है तो उनकी दुकान पर कौन सा फार्मासिस्ट मौजूद रहेगा इसका पूरा विवरण देते हैं। लेकिन जिले में इसका पालन किसी भी मेडिकल स्टोर पर नहीं हो रहा है। इस बाबत औषधि निरीक्षक सुमित वर्मा का कहना है कि समय-समय पर मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण किया जाता है जो मानकों पर खरा नहीं उतरते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
विज्ञापन
मेडिकल स्टोरों का संचालन
क्रासर
- बिना फार्मासिस्टों की मौजूदगी के बेची जा रही दवाएं
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। मानकों को दरकिनार कर जिले में मेडिकल स्टोरों का संचालन किया जा रहा है। लाइसेंस बनवाने के दौरान फार्मासिस्ट की डिग्री तो लगा दी लेकिन मौके पर किसी भी मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट मौजूद नहीं मिलते। इनके संचालक ही खुलेआम दवाओं की बिक्री कर रहे हैं लेकिन विभाग इनके खिलाफ कार्रवाई का साहस नहीं कर पा रहा है। जिले में करीब 12 सौ से ज्यादा मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं। औषधि प्रशासन की ओर से इनको लाइसेंस जारी किए गए है। इसके अलावा कितने मेडिकल स्टोर बिना लाइसेंस के संचालित हो रही है इसकी जानकारी किसी को नहीं है। जबकि अभी कुछ माह पहले हुई छापेमारी में तीन मेडिकल स्टोर बिना लाइसेंस के संचालित होते पाए जाने पर इनके संचालकों के खिलाफ मुकदमा तक लिखाया गया है। विभाग की माने तो नियमानुसार बिना फार्मासिस्ट की मौजूदगी के दवाओं की बिक्री नहीं की जा सकती है। इसलिए लाइसेंस बनवाने के दौरान फार्मासिस्ट की डिग्री को लगाया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। मेडिकल स्टोर संचालक जब लाइसेंस बनवाते है तो उनकी दुकान पर कौन सा फार्मासिस्ट मौजूद रहेगा इसका पूरा विवरण देते हैं। लेकिन जिले में इसका पालन किसी भी मेडिकल स्टोर पर नहीं हो रहा है। इस बाबत औषधि निरीक्षक सुमित वर्मा का कहना है कि समय-समय पर मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण किया जाता है जो मानकों पर खरा नहीं उतरते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।