{"_id":"6236197400557f709745181e","slug":"10-thousand-sq-ft-photo-of-sardar-paterl-soon-creats-record-barabanki-news-lko6222645163","type":"story","status":"publish","title_hn":"दस हजार स्क्वॉयर फिट में बनी तस्वीर बनाएगी रिकार्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दस हजार स्क्वॉयर फिट में बनी तस्वीर बनाएगी रिकार्ड
विज्ञापन
बाराबंकी। देशभर में स्वयं के साथ गांव का नाम रोशन करने के लिए बैचलर ऑफ फाइन आर्ट के छात्रों ने दिन-रात कड़ी मेहनत कर दस हजार स्क्वायर फीट में सरदार वल्लभ भाई पटेल की भव्य तस्वीर तैयार की है। जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है। छात्रों का कहना है कि इस तस्वीर को इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज कराने की तैयारी है।
हरख ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम नानमऊ निवासी रवि धीमान अपने अन्य साथियों राहुल, राघवेंद्र, अनुपम, शशांक, बृजेश और अर्जुन के साथ अपने ही गांव में कलाकारी का परिचय देते हुए सरदार वल्लभ भाई पटेल की दस हजार स्क्वायर फीट में तस्वीर तैयार की है। इसे बनाने में दो सप्ताह का समय लगा है। यह सभी छात्र बैचलर ऑफ फाइन आर्ट के तीसरे वर्ष के छात्र हैं।
रवि धीमान ने बताया कि उनकी टीम ने सोचा कि कुछ ऐसा बड़ा काम ऐसा किया जाए जिससे स्वयं के साथ गांव का भी नाम देश में हो और यही वजह रही कि आज वह विश्व की सबसे बड़ी तस्वीर बनाने का दावा करते हुए इस इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज करने की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि गांव में ही इतनी बड़ी जगह को चुनकर उसे सही करने में ही पांच दिन लग गए। जबकि एक सप्ताह तस्वीर को तैयार करने में लगा है।
विज्ञापन
हरख ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम नानमऊ निवासी रवि धीमान अपने अन्य साथियों राहुल, राघवेंद्र, अनुपम, शशांक, बृजेश और अर्जुन के साथ अपने ही गांव में कलाकारी का परिचय देते हुए सरदार वल्लभ भाई पटेल की दस हजार स्क्वायर फीट में तस्वीर तैयार की है। इसे बनाने में दो सप्ताह का समय लगा है। यह सभी छात्र बैचलर ऑफ फाइन आर्ट के तीसरे वर्ष के छात्र हैं।
विज्ञापन
रवि धीमान ने बताया कि उनकी टीम ने सोचा कि कुछ ऐसा बड़ा काम ऐसा किया जाए जिससे स्वयं के साथ गांव का भी नाम देश में हो और यही वजह रही कि आज वह विश्व की सबसे बड़ी तस्वीर बनाने का दावा करते हुए इस इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज करने की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि गांव में ही इतनी बड़ी जगह को चुनकर उसे सही करने में ही पांच दिन लग गए। जबकि एक सप्ताह तस्वीर को तैयार करने में लगा है।