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यमुना खतरे के पार, केन कुछ दूर

Sat, 07 Aug 2021 11:32 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 07 Aug 2021 11:32 PM IST
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Yamuna beyond danger, Ken some distance
बांदा/खप्टिहा कलां/चिल्ला। पहाड़ों में भारी बारिश होने से यमुना नदी खतरे का लाल निशान पार कर गई। यहां खतरे का निशान 100 मीटर है और मौजूदा में यमुना नदी 80 सेंटीमीटर ऊपर से बह रही है। उधर, एमपी के बांध उफना जाने पर केन नदी के जलस्तर में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। शनिवार को यह खतरे के निशान से मात्र तीन मीटर दूर है। केन नदी का लाल निशान 104 मीटर है।
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दोनों नदियों के नजदीक गांवों और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। गांव टापू नजर आने लगे हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग नावों से सुरक्षित ठिकानों में जा रहे हैं। वहीं प्रशासन भी मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क करने में जुटा है। बाढ़ चौकियों में व्यवस्थाएं के निर्देश दिए गए हैं। केन नदी का जल स्तर 101 मीटर पहुंच गया है। इसके साथ चंद्रायल नदी भी उफना गई है।
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खप्टिहा कलां गांव के मजरे छनिया डेरा, शिवपाल डेरा, डिप्पा डेरा व पंडित डेरा समेत गौरीकलां, अमारा, पैलानी डेरा, सिंधनकलां आदि गांवों के ग्रामीण अपने गृहस्थी के सामान समेत सुरक्षित ठिकानों की ओर चल पड़े हैं। ये सभी गांव पानी से घिरे चुके हैं। एक-दूसरे गांवों से संपर्क भी कट गया है। आने-जाने के लिए ग्रामीणों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों ने बताया गांवों में बाढ़ का पानी आ जाने पर गृहस्थी के सामान के साथ बच्चों व महिलाओं को लेकर सुरक्षित ठिकानों में जा रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्ग और बीमार लोगों को हो रही है। उधर, चिल्ला में यमुना नदी खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने पर दो दर्जन से ज्यादा गांव पानी से घिर गए हैं।
हाईवे से जुड़ा दोहतरा गांव टापू बन गया है। जलस्तर में लगातार वृद्धि होने पर प्रशासन ने ग्रामीणों को सतर्क करना शुरू कर दिया है। बाढ़ चौकियों को सक्रिय करने और प्रभावित लोगों के लिए व्यवस्थाओं के निर्देश दिए हैं। मुनादी भी कराई जा रही है। हालांकि, प्रशासन की बाढ़ से निपटने की तैयारियां फिलहाल धरातल पर नजर नहीं आ रहीं। उधर, केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक दोनों नदियां (केन व यमुना) 10 से 15 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है।
ग्रामीणों के लिए तीन नाव, बाढ़ चौकी बनाईं
खप्टिहा कलां। बाढ़ के खतरे के मद्देनजर जिला प्रशासन ने गांव की तीन नाव को अधिगृहीत कर लिया है। नाव के पुराने अनुभवी मल्लाहों शंकर व भूरा निषाद ने बताया कि नाव में 60 से 70 लोग ले जाने की क्षमता है, लेकिन वह 30 से 40 लोग ही नाव में बैठा रहे हैं।
किराया पुराने दर पर लिया जा रहा है। सुबह से लेकर रात 8 बजे तक नाव चलती है। उधर, परमहंस रणछोड़ दास इंटर कॉलेज के व्यावसायिक भवन पर बाढ़ चौकी बनाई गई है। तहसीलदार पैलानी तिमीराज सिंह ने बताया कि नाविकों को ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने के निर्देश दिए गए हैं।
मेनलाइन डूबी, सब स्टेशनों से बिजली बंद
खप्टिहा कलां। पैलानी गांव में यमुना, चंद्रायल और केन नदी के लगातार जलस्तर बढ़ने से जसपुरा और कानाखेड़ा सब स्टेशन की 33 केवी मेन लाइन शंकर पुरवा के पास डूबने से बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई।
जसपुरा व कानाखेड़ा सब स्टेशन से जुड़े लगभग आधा सैकड़ा गांवों व मजरों की बिजली आपूर्ति बंद हो गई। अवर अभियंता ने उपभोक्ताओं से कहा है कि जलस्तर घटने के बाद आपूर्ति बहाल की जाएगी।
मकान में गिरा पेड़
खप्टिहा कलां। लगातार बारिश से पोली हुई जमीन से पेड़ उखड़ गए। जसपुरा गांव में जगरूप सिंह ने बताया कि बारिश से पीपल का पेड़ घर की दीवार में आ गिरा। मकान क्षतिग्रस्त हो गया। गृहस्थी का सामान दबकर बर्बाद हो गया।
घर की महिलाएं व बच्चे बाल-बाल बच गए। इसके अलावा बारिश में शत्रुघन सिंह का मकान भी ढह गया।
बढ़ते जलस्तर से हाईवे ठप होने की कगार पर
चिल्ला। यमुना, केन व चंद्रावल नदियों के बढ़ने से तलहटी पर बसे गांवों के खेतों में पानी भर गया है। कई रास्तों का आवागमन बंद है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन ने चौकसी बढ़ा दी है। केन नदी में यमुना का पानी आने से तहसील क्षेत्र के तारा गांव का प्राथमिक विद्यालय, बजरंगी डेरा भी डूब गया है। तीन दर्जन से अधिक गांवों के संपर्क मार्ग बंद होने से ग्रामीण नावों का सहारा ले रहे हैं।

केंद्रीय जल आयोग एसडीओ भारत कुमार चौरसिया ने चिल्ला कार्यालय से बाढ़ के हालातों की जानकारी ली। राजेंद्र भारती ने बताया कि शनिवार को शाम यमुना खतरे के निशान से 90 सेमी ऊपर बह रही है। अभी और बढ़ने की संभावना है। पैलानी एसडीएम रामकुमार ने बताया कि पूरे तहसील क्षेत्र में 17 बाढ़ चौकी व 3 सेक्टर बनाए गए हैं। अभी तक कोई गांव नहीं खाली कराया गया है। लेखपालों को निर्देश दिए गए हैं।
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