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पानी के पेंच में फंस गया 14वें वित्त आयोग का 13 करोड़
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बांदा। 14वें वित्त आयोग के साढ़े 13 करोड़ से ज्यादा का फंड पिछले 6 माह से खर्च नहीं हो पा रहा। इस फंड को लेकर नगर पालिका और डीएम के बीच एक राय नहीं बन पा रही। नगर पालिका अध्यक्ष ने नगर विकास मंत्री को पत्र भेजकर डीएम से प्रस्तावों की स्वीकृति दिलवाने का अनुरोध किया है। कहा है कि 31 दिसंबर तक इस फंड का उपयोग होना जरूरी है।
इस वर्ष की शुरुआत में नगर पालिका परिषद बांदा ने 14वें वित्त आयोग से शहर के विभिन्न इलाकों में निर्माण कार्य के प्रस्ताव स्वीकृति के लिए डीएम को भेजे थे। इस पर डीएम ने यह आपत्ति जताई थी कि बांदा नगर में पेयजल संकट है। नागरिकों में रोष है। अत: वित्त आयोग की संस्तुतियों के तहत जलापूर्ति के प्रस्ताव भी शामिल किए जाएं। नगर पालिका अध्यक्ष मोहन साहू ने हाल ही में प्रदेश के नगर विकास मंत्री को अपने हस्ताक्षरों से भेजे पत्र में कहा है कि 14वें वित्त आयोग फंड का उपभोग 31 दिसंबर तक होना है।
नगर पालिका ने 5 करोड़ 35 लाख 20 हजार 45 रुपये के निर्माण कार्य, 44 लाख 74 हजार 500 रुपये ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, फुटपाथ एवं स्ट्रीट लाइट पर 98 लाख 76 हजार 472 रुपये आदि के प्रस्ताव 28 फरवरी को डीएम को भेजे थे। डीएम के निर्देश पर 28 मई को पुन: संशोधित इस्टीमेट/प्रस्ताव भेजकर इसमें तालाब, कुआं और जल निकासी के प्रस्ताव शामिल किए गए, लेकिन अभी अनुमोदन नहीं मिला है। डीएम का निर्देश है कि 14वें वित्त आयोग के फंड से मात्र कुएं, तालाब और कुओं की मरम्मत व सफाई के प्रस्ताव प्रेषित किए जाएं।
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अध्यक्ष ने दलील दी है कि बुंदेलखंड में जलापूर्ति के लिए जल संस्थान है। जलकर वसूली भी वही करता है।
उसका बजट अलग मिलता है। नगर पालिका ने एक करोड़ रुपये जल संस्थान को दिए हैं। इसके पहले 2.85 लाख रुपये दिए थे। जिसका आज तक उपभोग प्रमाणपत्र नहीं दिया गया। अध्यक्ष ने अपने पत्र में कहा है कि स्वीकृति न मिलने से बांदा शहर के लोगों में रोष उत्पन्न हो रहा है। 31 दिसंबर के बाद इस धनराशि का पूर्ण उपभोग करना संभव नहीं हो पाएगा।
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इस वर्ष की शुरुआत में नगर पालिका परिषद बांदा ने 14वें वित्त आयोग से शहर के विभिन्न इलाकों में निर्माण कार्य के प्रस्ताव स्वीकृति के लिए डीएम को भेजे थे। इस पर डीएम ने यह आपत्ति जताई थी कि बांदा नगर में पेयजल संकट है। नागरिकों में रोष है। अत: वित्त आयोग की संस्तुतियों के तहत जलापूर्ति के प्रस्ताव भी शामिल किए जाएं। नगर पालिका अध्यक्ष मोहन साहू ने हाल ही में प्रदेश के नगर विकास मंत्री को अपने हस्ताक्षरों से भेजे पत्र में कहा है कि 14वें वित्त आयोग फंड का उपभोग 31 दिसंबर तक होना है।
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नगर पालिका ने 5 करोड़ 35 लाख 20 हजार 45 रुपये के निर्माण कार्य, 44 लाख 74 हजार 500 रुपये ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, फुटपाथ एवं स्ट्रीट लाइट पर 98 लाख 76 हजार 472 रुपये आदि के प्रस्ताव 28 फरवरी को डीएम को भेजे थे। डीएम के निर्देश पर 28 मई को पुन: संशोधित इस्टीमेट/प्रस्ताव भेजकर इसमें तालाब, कुआं और जल निकासी के प्रस्ताव शामिल किए गए, लेकिन अभी अनुमोदन नहीं मिला है। डीएम का निर्देश है कि 14वें वित्त आयोग के फंड से मात्र कुएं, तालाब और कुओं की मरम्मत व सफाई के प्रस्ताव प्रेषित किए जाएं।
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अध्यक्ष ने दलील दी है कि बुंदेलखंड में जलापूर्ति के लिए जल संस्थान है। जलकर वसूली भी वही करता है।
उसका बजट अलग मिलता है। नगर पालिका ने एक करोड़ रुपये जल संस्थान को दिए हैं। इसके पहले 2.85 लाख रुपये दिए थे। जिसका आज तक उपभोग प्रमाणपत्र नहीं दिया गया। अध्यक्ष ने अपने पत्र में कहा है कि स्वीकृति न मिलने से बांदा शहर के लोगों में रोष उत्पन्न हो रहा है। 31 दिसंबर के बाद इस धनराशि का पूर्ण उपभोग करना संभव नहीं हो पाएगा।