फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   ukraine

घर पहुंची अलीशा, आपबीती बताने में बीता दिन

Mon, 07 Mar 2022 11:05 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 07 Mar 2022 11:05 PM IST
विज्ञापन
ukraine
ukraine - फोटो : BANDA
बांदा। यूक्रेन से बचकर घर लौटी अलीशा के घर सोमवार को जश्न जैसा माहौल था। परिजनों और पड़ोसियों से लेकर अन्य खानदानियों के आने का तांता लगा हुआ था। इन सभी को माता-पिता मिठाई खिलाकर बेटी की सकुशल वापसी पर खुशी जता रहे थे। उधर, सुबह करीब 6 बजे यूपी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से बांदा आई अलीशा को लगभग पूरा दिन सिर्फ आपबीती बताने में ही बीता। दादा-दादी ने उसे मिठाई खिलाकर खुशी जताई।
विज्ञापन

घर आते ही अलीशा को उसके दादा नजीर बख्श, दादी शबनम, मां सलमा, पिता रफीक, ताऊ अजीज मंसूरी, ताई शेफी मंसूरी, बुआ हिना, भाई रजी व हसनैन और मौसा नूर अहमद आदि ने अलीशा को गले लगा लिया। सभी की आंखों में खुशी के आंसू थे। चाय बनकर आई तो ड्राइंग रूम में पूरे घर के लोग अलीशा को घेरकर बैठ गए। अलीशा ने वह सब बयां किया जो यूक्रेन के कीव शहर से लेकर दिल्ली एयरपोर्ट आने तक उसके साथ बीता। बताया कि ओ.ओ.बोगोमुलिट्स यूनिवर्सिटी में पढ़ रही थी। लेकिन यूनिवर्सिटी डीन ने युद्ध की शुरूआत होने पर भी ऑनलाइन क्लास की अनुमति नहीं दी। इस दौरान उसने 17 फरवरी को अपनी कोरोना जांच करा ली, ताकि वापसी में दिक्कत न हो। 24 को रूस का हमला हो गया। पहला धमाका सुबह 5:20 बजे सुनाई पड़ा। 27 फरवरी तक कीव में कर्फ्यू लगा रहा।
विज्ञापन

अलीशा ने बताया कि 28 फरवरी को तीन प्राइवेट कारों से 12 छात्र-छात्राओं को वोक्सालना रेलवे स्टेशन के लिए रवाना किया गया, लेकिन रास्ते में बमबारी ज्यादा होने से वोक्सालना न जाकर हंगरी बार्डर की तरफ निकल गए। अलीशा ने बताया कि रास्ते में रूस का क्षतिग्रस्त टैंक भी देखा। यूक्रेन की फौज ने हमें जाने का रास्ता बताया। 800 मीटर का सफर तय करके हंगरी बार्डर के पास चोप रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां हमारे पासपोर्ट में हंगरी में इंट्री के लिए मुहर लगाई गई। वहां से ट्रेन में वह हंगरी के पहले रेलवे स्टेशन जुहानी पहुंची। वहां भारतीय दूतावास द्वारा उपलब्ध कराई गई बसों से साढ़े 3 घंटे का सफर तय कर हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंचे। वहां से भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई फ्लाइट से इंडिया लाए गए। हालांकि उसे बुडापेस्ट में अपनी बारी का इंतजार चार दिन रुककर करना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed