{"_id":"48ab4d8a7cacf7ebd8db78ae781d2449","slug":"trkoen-wheels-paused-je-on-strike-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रको के पहिये थमे, जेई भी हड़ताल पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रको के पहिये थमे, जेई भी हड़ताल पर
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 01 Oct 2015 11:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। टोल बैरियर के विरोध में ट्रांसपोर्टरों की
विज्ञापन
देशव्यापी हड़ताल में बुंदेलखंड में भी ज्यादातर ट्रकों के पहिये थम गए।
बृहस्पतिवार को हड़ताल का पहला दिन था। उधर, बिजली विभाग के अवर अभियंताओं
ने भी ग्रेड-पे के लिए 48 घंटे की हड़ताल और उपवास शुरू कर दिया।
इस बीच बिजली का कोई भी फाल्ट दुरुस्त नहीं कराएंगे। फिलहाल प्रशासन और बिजली विभाग यह मानकर खामोश हैं कि दोनों ही हड़तालों की मांगें केंद्र और राज्य सरकारों से संबंधित है। हड़ताल लंबी खिंची तो प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था करेगा।
जनपद में ज्यादातर खाद्य वस्तुएं और दवाएं कानपुर, लखनऊ सहित विभिन्न जनपदों से आती हैं। सब्जी की आवक भी बाहरी जनपदों से होती है। ट्रांसपोर्टरों की मानें तो हर रोज करीब 400 टन सब्जी, कास्मेटिक, दवाएं और रोजमर्रा में प्रयोग होने वाली चीजें जिले में ट्रकों के जरिये आती हैं।
हड़ताल लंबी खिंची तो दवा, सब्जी और कई अन्य जरूरी चीजों की किल्लत हो सकती है। बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा असर मौरंग, बालू और गिट्टी पर पड़ेगा। चित्रकूटधाम मंडल के बांदा, हमीरपुर, महोबा व चित्रकूट से रोजाना एक हजार से ज्यादा ट्रक ये खनिज संपदा लेकर आते-जाते हैं।
बिल्डिंग मैटेरियल की आवक रुकने से मकान का निर्माण करा रहे लोगों को परेशानी हो सकती हैं। ट्रक आपरेटर एसोसिएशन जिलाध्यक्ष राजकुमार गर्ग ने दावा कि पहले ही दिन जनपद में लगभग एक हजार ट्रकों के पहिये थम गए हैं।
उधर, जूनियर इंजीनियर संघ की 48 घंटे की हड़ताल शुरू हो गई है। इस दौरान वे फाल्ट नहीं दुरुस्त कराएंगे। बांदा मुख्यालय समेत गांवों में रोजाना फाल्टों की भरमार रहती है। मरम्मत न होने पर शहर और गांवाें में बिजली संकट गहरा सकता है।
इस बीच बिजली का कोई भी फाल्ट दुरुस्त नहीं कराएंगे। फिलहाल प्रशासन और बिजली विभाग यह मानकर खामोश हैं कि दोनों ही हड़तालों की मांगें केंद्र और राज्य सरकारों से संबंधित है। हड़ताल लंबी खिंची तो प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था करेगा।
जनपद में ज्यादातर खाद्य वस्तुएं और दवाएं कानपुर, लखनऊ सहित विभिन्न जनपदों से आती हैं। सब्जी की आवक भी बाहरी जनपदों से होती है। ट्रांसपोर्टरों की मानें तो हर रोज करीब 400 टन सब्जी, कास्मेटिक, दवाएं और रोजमर्रा में प्रयोग होने वाली चीजें जिले में ट्रकों के जरिये आती हैं।
हड़ताल लंबी खिंची तो दवा, सब्जी और कई अन्य जरूरी चीजों की किल्लत हो सकती है। बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा असर मौरंग, बालू और गिट्टी पर पड़ेगा। चित्रकूटधाम मंडल के बांदा, हमीरपुर, महोबा व चित्रकूट से रोजाना एक हजार से ज्यादा ट्रक ये खनिज संपदा लेकर आते-जाते हैं।
बिल्डिंग मैटेरियल की आवक रुकने से मकान का निर्माण करा रहे लोगों को परेशानी हो सकती हैं। ट्रक आपरेटर एसोसिएशन जिलाध्यक्ष राजकुमार गर्ग ने दावा कि पहले ही दिन जनपद में लगभग एक हजार ट्रकों के पहिये थम गए हैं।
उधर, जूनियर इंजीनियर संघ की 48 घंटे की हड़ताल शुरू हो गई है। इस दौरान वे फाल्ट नहीं दुरुस्त कराएंगे। बांदा मुख्यालय समेत गांवों में रोजाना फाल्टों की भरमार रहती है। मरम्मत न होने पर शहर और गांवाें में बिजली संकट गहरा सकता है।