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Banda News: कोषागार घोटाला, अब तक 1.58 करोड़ से अधिक की रिकवरी
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चित्रकूट। जिले में कोषागार विभाग के 43 करोड़ से अधिक के घोटाले में अब तक एक करोड़ 58 लाख 25 हजार 837 रुपये की रिकवरी हो चुकी है। वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने बताया कि बुधवार को पांच आरोपियों ने 34 लाख 63 हजार 362 रुपये जमा कराए हैं।
वरिष्ठ कोषाधिकारी के मुताबिक बुधवार को लक्ष्मी देवी ने पांच लाख 99 हजार 829, नत्थू राम ने दस लाख 74 हजार 846, ब्रजनंदन ने एक लाख पचास हजार, रानीदेवी ने 14 लाख 17 हजार 687 व सरमनिया देवी ने दो लाख 21 हजार रुपये जमा कराए हैं।
कोषागार घोटाला में बुधवार को विभाग के दो आरोपियों समेत 15 को जेल भेजा गया है। इनमें रामपुर तरौंहा निवासी चंद्रिका प्रसाद, मनकुंवार निवासी शिवबहादुर, नांदी निवासी नत्थूराम यादव, अनीपुर निवासी बलवंत यादव, करौंधी कला निवासी दीनानाथ यादव, टिटिहरा निवासी नवल किशाेर, भंभेट निवासी महिपाल यादव, लोधौरा बरेठी निवासी नाथू राम, चतनपुर अमौली थाना चांदपुर जिला फतेहपुर निवासी विकास सिंह सचान (कोषागार विभाग), सिविल लाइन तुलसी नगर पार्क के सामने शांति नगर बांदा निवासी अशोक कुमार(कोषागार विभाग), हनुवा निवासी दयाराम त्रिपाठी, भेदवरा निवासी रुकमणि देवी, बैर निवासी जगुवा देवी, नारायणपुर निवासी सुनीता देवी, नई दुनिया निवासी लीला देवी हैं।
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अपर एसपी सत्यपाल सिंह ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई कर दो दिन में 30 नामजद को जेल भेजा है। आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी।
चित्रकूट। कोषागार के 43 करोड़ से अधिक के घोटाले में हर दिन नए राज खुलकर सामने आ रहे हैं। हर जांच में यही सवाल उभरता है कि आखिर सात साल से यह घोटाला लगातार कैसे चलता रहा, जबकि हर साल दो ऑडिट टीमें जांच करने आती हैं। जांच में ये पकड़ में क्यों नहीं आया। कई जानकारों ने तो ऑडिट टीम व कोषाधिकारियों की भूमिका को ही संदिग्ध माना है। यह भी सवाल उठते हैं कि इनके खिलाफ जांच क्यों नहीं हो रही है।
खुद वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह बताते हैं कि कोषागार में हर साल दो विभागीय ऑडिट टीम आती हैं, जिसकी रिपोर्ट लगती है। ऐसे में यह सवाल उठा कि जांच रिपोर्ट आखिर क्या रहती थी। जानकारों के अनुसार इस साल भी सितंबर माह में टीम आयी थी। कुछ दस्तावेज नहीं मिलने पर अनियमितता की शंका हुई। इसी सूचना के आधार पर कार्यालय प्रयागराज से दूसरी विशेष ऑडिट टीम बिना कोई सूचना के कोषागार पहुंची थी। टीम ने लगातार पांच दिन दस्तावेज खंगाले थे। इसके बाद से कोषागार के घोटाले की परतें खुलने लगी थीं। ऑडिट टीम में शामिल दो एक्सपर्ट ने जब ट्रेजरी के रिकार्ड मांगे तो घपलेबाजों ने बहाना बनाना शुरु कर दिया। पहले तो उन्होंने कंप्यूटर में वायरस होने की बात कहकर ट्रेजरी एक्सेस व रिकार्ड देने से मना किया था।
इसके बाद टीम ने उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद निर्देश मिलने पर जांच तेज हो गई। टीम ने किए गए घोटाले की पोल खोल दी। इसमें कोषागार से 43.13 करोड़ रुपये के घोटाले का पता चला, जिसमें यह घोटाला 2018 से किए जाने की बात कही गई।जांच में संदिग्ध खातों में से 13 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन सामने आया। इसमें तीन खाते मृत पेंशनरों के नाम से हैं। चौथा खाता राजेंद्र कुमार के नाम से सक्रिय पाया गया है। मृतका शिक्षिका गिरजेश कुमारी का खाता बता रहा है जबकि उसकी मौत 2018 में हो चुकी है।
इस पूरे मामले में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं में सपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अनुज यादव व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेेटी के सदस्य पंकज मिश्रा ने हर साल दो बार हाेने वाले ऑडिट और कोषाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आठ साल में इन अधिकारियों के किए गए कामों की जांच कराकर रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की है।
अपर एसपी सत्यपाल सिंह ने बताया कि जांच में जो भी तथ्य सामने आ रहे हैं, उनमें एसआईटी जांच व पूछताछ कर रही है। किसी को छोड़ा नहीं जाएगा। उधर वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया मिली जानकारी के अनुसार रिपोर्ट दर्ज है। जांच जारी है। हर दोषी के खिलाफ जांच होगी।
बुधवार को कोतवाली से लेकर अस्पताल और न्यायालय में आरोपियों के परिजन व शुभचिंतकों की भीड़ लगी रही। पेंशनरों के परिजन नांदी के सुरेश कुमार व ऐंचवारा के चुनकावन प्रसाद ने आरोप लगाया कि कोषागार विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों ने उनके परिजनों को बरगलाकर यह कांड कराया। अब वृद्धावस्था में कष्ट भोगना पड़ रहा है। कोतवाली व अस्पताल में बार बार भीड़ बढ़ने पर पुलिस को भी मशक्कत करनी पड़ी। अपर एसपी सत्यपाल सिंह ने भीड़ को बाहर करने के निर्देश दिए।
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वरिष्ठ कोषाधिकारी के मुताबिक बुधवार को लक्ष्मी देवी ने पांच लाख 99 हजार 829, नत्थू राम ने दस लाख 74 हजार 846, ब्रजनंदन ने एक लाख पचास हजार, रानीदेवी ने 14 लाख 17 हजार 687 व सरमनिया देवी ने दो लाख 21 हजार रुपये जमा कराए हैं।
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कोषागार घोटाला में बुधवार को विभाग के दो आरोपियों समेत 15 को जेल भेजा गया है। इनमें रामपुर तरौंहा निवासी चंद्रिका प्रसाद, मनकुंवार निवासी शिवबहादुर, नांदी निवासी नत्थूराम यादव, अनीपुर निवासी बलवंत यादव, करौंधी कला निवासी दीनानाथ यादव, टिटिहरा निवासी नवल किशाेर, भंभेट निवासी महिपाल यादव, लोधौरा बरेठी निवासी नाथू राम, चतनपुर अमौली थाना चांदपुर जिला फतेहपुर निवासी विकास सिंह सचान (कोषागार विभाग), सिविल लाइन तुलसी नगर पार्क के सामने शांति नगर बांदा निवासी अशोक कुमार(कोषागार विभाग), हनुवा निवासी दयाराम त्रिपाठी, भेदवरा निवासी रुकमणि देवी, बैर निवासी जगुवा देवी, नारायणपुर निवासी सुनीता देवी, नई दुनिया निवासी लीला देवी हैं।
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अपर एसपी सत्यपाल सिंह ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई कर दो दिन में 30 नामजद को जेल भेजा है। आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी।
चित्रकूट। कोषागार के 43 करोड़ से अधिक के घोटाले में हर दिन नए राज खुलकर सामने आ रहे हैं। हर जांच में यही सवाल उभरता है कि आखिर सात साल से यह घोटाला लगातार कैसे चलता रहा, जबकि हर साल दो ऑडिट टीमें जांच करने आती हैं। जांच में ये पकड़ में क्यों नहीं आया। कई जानकारों ने तो ऑडिट टीम व कोषाधिकारियों की भूमिका को ही संदिग्ध माना है। यह भी सवाल उठते हैं कि इनके खिलाफ जांच क्यों नहीं हो रही है।
खुद वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह बताते हैं कि कोषागार में हर साल दो विभागीय ऑडिट टीम आती हैं, जिसकी रिपोर्ट लगती है। ऐसे में यह सवाल उठा कि जांच रिपोर्ट आखिर क्या रहती थी। जानकारों के अनुसार इस साल भी सितंबर माह में टीम आयी थी। कुछ दस्तावेज नहीं मिलने पर अनियमितता की शंका हुई। इसी सूचना के आधार पर कार्यालय प्रयागराज से दूसरी विशेष ऑडिट टीम बिना कोई सूचना के कोषागार पहुंची थी। टीम ने लगातार पांच दिन दस्तावेज खंगाले थे। इसके बाद से कोषागार के घोटाले की परतें खुलने लगी थीं। ऑडिट टीम में शामिल दो एक्सपर्ट ने जब ट्रेजरी के रिकार्ड मांगे तो घपलेबाजों ने बहाना बनाना शुरु कर दिया। पहले तो उन्होंने कंप्यूटर में वायरस होने की बात कहकर ट्रेजरी एक्सेस व रिकार्ड देने से मना किया था।
इसके बाद टीम ने उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद निर्देश मिलने पर जांच तेज हो गई। टीम ने किए गए घोटाले की पोल खोल दी। इसमें कोषागार से 43.13 करोड़ रुपये के घोटाले का पता चला, जिसमें यह घोटाला 2018 से किए जाने की बात कही गई।जांच में संदिग्ध खातों में से 13 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन सामने आया। इसमें तीन खाते मृत पेंशनरों के नाम से हैं। चौथा खाता राजेंद्र कुमार के नाम से सक्रिय पाया गया है। मृतका शिक्षिका गिरजेश कुमारी का खाता बता रहा है जबकि उसकी मौत 2018 में हो चुकी है।
इस पूरे मामले में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं में सपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अनुज यादव व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेेटी के सदस्य पंकज मिश्रा ने हर साल दो बार हाेने वाले ऑडिट और कोषाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आठ साल में इन अधिकारियों के किए गए कामों की जांच कराकर रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की है।
अपर एसपी सत्यपाल सिंह ने बताया कि जांच में जो भी तथ्य सामने आ रहे हैं, उनमें एसआईटी जांच व पूछताछ कर रही है। किसी को छोड़ा नहीं जाएगा। उधर वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया मिली जानकारी के अनुसार रिपोर्ट दर्ज है। जांच जारी है। हर दोषी के खिलाफ जांच होगी।
बुधवार को कोतवाली से लेकर अस्पताल और न्यायालय में आरोपियों के परिजन व शुभचिंतकों की भीड़ लगी रही। पेंशनरों के परिजन नांदी के सुरेश कुमार व ऐंचवारा के चुनकावन प्रसाद ने आरोप लगाया कि कोषागार विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों ने उनके परिजनों को बरगलाकर यह कांड कराया। अब वृद्धावस्था में कष्ट भोगना पड़ रहा है। कोतवाली व अस्पताल में बार बार भीड़ बढ़ने पर पुलिस को भी मशक्कत करनी पड़ी। अपर एसपी सत्यपाल सिंह ने भीड़ को बाहर करने के निर्देश दिए।