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सन्नाटे को चीरती रहीं पीड़ितों की चीखें और सिसकियां
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 23 Mar 2015 11:13 PM IST
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बारिश और ओलों से फसल की तबाही पर जान गंवाने वाले किसानों के घरों में सिर्फ सिसकियां गूंज रही हैं। इनके घरों की हालत इनकी मुफलिसी बयान कर रही है।
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पीड़ित परिजनों को अपने अजीज की मौत का गम तो है ही, इनमें किसी को बेटी के ब्याह की चिंता खाए जा रही है तो कोई यह सोचकर परेशान है कि अब परिवार की गाड़ी कैसे खिंचेगी। इनके गम में गांववाले भी शरीक हैं। सोमवार को इन गांवों में मरघट सा सन्नाटा पसरा रहा।
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इस सन्नाटे को तोड़ रही हैं तो सिर्फ पीड़ितों की चीखें और सिसकियां। पीड़ितों को अभी तक मदद के नाम पर एक धेला भी नहीं मिला है। प्रशासन से अगर कुछ मिला है तो केवल आश्वासन। हमदर्दी जताने वाले इक्का-दुक्का नेता भी इनके घरों में पहुंचे। शासन-प्रशासन के बेरुखी से गांववालों में गुस्सा भी बढ़ रहा है। इन सबके बीच सदमे से मौतों का सिलसिला भी नहीं थमा।
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सिकलोढ़ी गांव में युवा किसान रामनरेश द्विवेदी उर्फ राजाबाबू द्वारा अपने भाई की लाइसेंसी रायफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर लेने के बाद गांव में शोक भरा सन्नाटा पसरा है। अलबत्ता मृतक के घर में रोने-चीखने की आवाजें लगातार गूंज रही हैं।
अफसर और नेताआें की आमदरफ्त गांव का सन्नाटा तोड़ रही है। किसी जमाने का खुशहाल किसान रहा रामनरेश अब घर की बिजली का बिल भी अदा नहीं कर पा रहा था। सुसाइड से चंद घंटे पहले उसे 31,285 रुपये बकाए का बिल मिला था।
रविवार को दोपहर बाद खेत से मसूर की फसल की दुर्दशा देखकर लौटे रामनरेश द्विवेदी ने खुद को रायफल से गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी। उस पर किसान क्रेडिट कार्ड का 88 हजार रुपये कर्ज था। यह कर्ज उसने इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की पुनाहुर शाखा से लिया था। बैंक प्रबंधक और उनके गुर्गे लगातार अदायगी या रिन्यूवल का दबाव बना रहे थे।
रामनरेश कुछ वर्षों पहले तक खुशहाल था। कोई तंगहाली नहीं थी। पर कई सालों से लगातार फसलों पर टूट रहे कुदरत के कहर ने उसे कंगाली की हालत में ला खड़ा किया। तंगहाली का एक उदाहरण यह भी है कि पिछले कई वर्षों से घर की बिजली का बिल नहीं अदा कर पा रहा था। यह बढ़कर 31,285 रुपये हो गया है। अंतिम बिल आत्महत्या से कुछ घंटे पहले ही मिला था।
अब शोक मेें डूबे घर में पत्नी रेखा और 16 वर्षीय बेटी ग्रीष्मा उर्फ शीलू तथा 14 वर्षीय पुत्र अंकित व 13 वर्षीय मयंक है। मृतक के चाचा अवधेश द्विवेदी ने बताया कि रामनरेश कई दिनों से रोजाना खेत जाता था और वहां से परेशान हाल में लौटता था।
सोमवार को सुबह उप जिलाधिकारी (अतर्रा) आरके श्रीवास्तव और लेखपाल मृतक किसान के घर पहुंचे। उधर, प्रदेश कांग्रेस के संगठन मंत्री साकेत बिहारी मिश्र और सचिव पंकज मिश्र तथा कांग्रेस नेता सुनीलदत्त पांडेय ने भी मृतक के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। कांग्रेस नेताओं ने सरकार से इस वर्ष को ‘किसान आपदा वर्ष’ घोषित किए जाने की मांग की है।
अनथुवा (महुआ ब्लाक) में शुक्रवार को शाम फसल के सदमे में दिल का दौरा पड़ने से चल बसे किसान रामऔतार कुशवाहा (60) के घर सरकारी अफसराें और नेताआें की आमदरफ्त शुरू हो गई है। तीन दिनोें में मदद तो कुछ नहीं मिली, आश्वासन और सांत्वना के ढेर लग गए। उधर, विधवा हो गई पत्नी को अपनी सयानी हो गई बिटिया की शादी की चिंता सता रही है। इसी वर्ष शादी होनी है।
शुक्रवार को शाम रामऔतार कुशवाहा खेत से लौटते ही दिल का दौरा पड़ने से चल बसा था। पत्नी सतवंती ने बताया कि पांच बीघा खुद की जमीन है और छह बीघा बटाई पर ले रखी है। इलाहाबाद बैंक की महोतरा शाखा से 1,20,000 रुपया का कर्ज है।
परिवार में पत्नी के अलावा पुत्री विमला (23) और रजनी (16) है। विमला की शादी इसी वर्ष होनी है। अचानक टूट पड़े गम के इस पहाड़ से पूरा परिवार शोक में डूबा है। खानदानी और गांव के लोग लगातार आ-जा रहे हैं। मृतक किसान की पत्नी और बच्चों को सांत्वना दे रहे हैं। तीसरे दिन सोमवार को नायब तहसीलदार और लेखपाल मृतक किसान के घर आए और आर्थिक सहायता दिलाए जाने का आश्वासन दे गए। किसान की मौत से पूरे गांव मेें शोक है।
मौसम की मार से फसल खत्म हो जाने पर खुद को जिंदा जलाकर आत्महत्या की कोशिश में बुरी तरह झुलस गए कर्जदार युवा किसान सिद्धपाल की हालत अभी खतरे से बाहर नहीं है। उसका जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। इसी हालत में उसने कहा कि- ‘सरकार मदद देई तौ बच्चा पाल लइबे। नहीं तौ दूसरन के भरोसे जियबे, कर्ज वालन के हाथ-पांव जोड़ लइबे’।
जसपुरा क्षेत्र के नांदादेव गांव में रविवार को सुबह 35 वर्षीय सिद्धा पाल ने अपने मकान के खपरैल में चढ़कर अपने ऊपर मिट्टी का तेल डाला और आल लगा ली। उसने 40 बीघा जमीन बलकट पर लेकर बुआई की थी। कर्ज लेकर फसल तैयार की, जो ओला-बारिश की भेंट चढ़ गई। बुरी तरह झुलस गए सिद्धा पाल को बचाने में उसका बड़ा भाई राम प्रसाद भी झुलस गया। वह भी अभी जिला अस्पताल में है। इलाज में भी खर्च के लाले हैं।
फिलहाल विधायक दलजीत सिंह द्वारा दिए गए 10 हजार रुपये से काम चल रहा है। हैरत की बात यह है कि मीडिया में प्रमुखता से यह खबर छपने के बाद भी जिला अस्पताल में प्रशासन का कोई अदना सा अफसर भी इन झुलसे किसानों के आंसू पोंछने या उनकी खैर खबर लेने नहीं गया। सपा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद, विधायक दलजीत सिंह और भाजपा के जिलाध्यक्ष बालमुकुंद शुक्ला व जगराम सिंह ने अस्पताल आकर दोनों भाइयों से मुलाकात की।