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महामारी से बचने के लिए खुशी से सह लिया टीके का दर्द

Wed, 16 Mar 2022 11:15 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 16 Mar 2022 11:15 PM IST
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To avoid the epidemic, happily tolerated the pain of the vaccine
To avoid the epidemic, happily tolerated the pain of the vaccine - फोटो : BANDA
बांदा। 12 वर्ष की कम उम्र में इंजेक्शन का दर्द बच्चों को पसंद नहीं आया, लेकिन जानलेवा महामारी से बचने के लिए यह दर्द खुशी से सह लिया। बुधवार को टीकाकरण अभियान के पहले 12 से 14 वर्ष के बच्चों का कुछ यही नजरिया रहा। जिला अस्पताल में आयोजित शिविर में मात्र 40 बच्चों को टीके लगाए गए। लक्ष्य 76,223 बच्चों को टीके लगाने का है।
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60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को बूस्टर डोज और 15 से 17 वर्ष के किशोर-किशोरियों को टीके के दायरे में लाने के बाद अब 12 से 14 साल उम्र वाले बच्चों को भी कोरोना से बचाव वाले टीकाकरण के दायरे में लाया गया है। उनको कोर्बेवैक्स वैक्सीन की दो डोज लगाई जाएंगी। पहली डोज के बाद दूसरी डोज में 28 दिन का अंतर होगा। पूरे देश में बुधवार को इसकी शुरूआत हुई। मंडल मुख्यालय बांदा में जिला अस्पताल में शिविर आयोजित कर इस अभियान का आगाज हुआ।
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डीएम अनुराग पटेल व सीएमएस डा.एसएन मिश्र सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बच्चों का हौंसला बढ़ाने के लिए मौजूद रहे। ज्यादातर बच्चे अभिभावकों के समझाने-बुझाने पर आए। स्वेच्छा से आने वाले बच्चों की संख्या कम रही।
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शिविर की लाज बचाने को स्कूल से बालिकाएं बुलाई गई थीं। उन्हें उनकी शिक्षिकाएं लेकर आईं। अभिभावकों, अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों ने बच्चों को कोरोना से बचने के लिए टीकाकरण जरूरी बताते हुए राजी किया। कई बालक-बालिकाओं ने हंसी-खुशी वैक्सीन ली। उधर, टीकाकरण के बाद बच्चों को 30 मिनट अस्पताल में ही डाक्टरों की देखरेख में रखने की गाइड लाइन का पालन नहीं हुआ।
आवास विकास के 13 वर्षीय नीव गौर का कहना है कि उसे इंजेक्शन पसंद नहीं है, लेकिन कोरोना से बचाने के लिए डैडी (पापा) उसे लिवा लाए। उन्हीं ने अपने हाथों से पहले खाना खिलाया और फिर इंजेक्शन लगवाने के लिए फुसलाकर ले आए।

शुकुलकुआं की 12 वर्षीय श्रेयांशी का कहना है कि सुई से डरती हूं। मैं टीका लगवाने के लिए तैयार नहीं थी। पापा जबरदस्ती टीका लगवाने ले आए और पकड़कर इंजेक्शन लगवाया। हालांकि थोड़ा सा दर्द हुआ, लेकिन अब डर नहीं लग रहा।
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