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इस वर्ष भी खेत तालाब को हरी झंडी
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बांदा। बुंदेलखंड में किसानों द्वारा खुद से शुरू किए गए खेत तालाब अभियान को अब प्रदेश सरकार भी परवान चढ़ा रही है। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बुंदेलखंड के सातों जनपदों बांदा, महोबा, चित्रकूट, हमीरपुर, झांसी, जालौन और ललितपुर समेत सीमावर्ती जिलों में 10 हजार छोटे और मझोले तालाब खेतों में खुदाई के लिए मंजूरी दी है।
पिछले वर्षों में भी इस योजना में किसानों को 50 फीसदी तक छूट दी गई है। बारिश का पानी खेत से बहकर नाली और नालों में चला जाता है। साथ ही खेत की उपजाऊ मिट्टी को भी बारिश का पानी बहा ले जाता है। ऐसे में किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है। कुछ वर्षों से किसानों और कुछ स्वयंसेवी संगठनों ने बुंदेलखंड में खेतों में बरसाती पानी रोकने के लिए तालाब खुदाई का बीड़ा उठाया। इसे अभियान का रूप भी मिला। बड़ी तादाद में किसानों ने अपने खेतों में छोटे, बड़े और मझोले तालाब खुदवाकर बारिश का पानी रोका और इसे सिंचाई में इस्तेमाल किया।
इससे जहां फसल की पैदावार बढ़ी वहीं भूजल स्तर में भी वृद्धि हुई। खेत तालाब योजना को इस चालू वर्ष 2021-22 में भी जारी रखते हुए प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड के सातों जनपदों समेत सीमावर्ती मिर्जापुर, सोनभद्र, प्रयागराज आदि जनपदों में 10 हजार छोटे, मझोले खेत तालाबों की मंजूरी दी है। इस पर एक अरब रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार का राज्यांश होगा।
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तालाबों में लगेगा स्प्रिकंलर सिस्टम
चालू वर्ष में स्वीकृत हुए 10 हजार लघु और मझोलेे तालाबों को कृषि विभाग तैयार कराएगा। इसमें स्प्रिकंलर सिंचाई सिस्टम की स्थापना उद्यान विभाग करेगा। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल के जरिए आनलाइन आवेदन करना होगा। तालाबों के जरिए वर्षा जल संचयन के उत्कृष्ट कार्यों की जानकारी के लिए एक्सपोजर विजिट होगा।
बुंदेलखंड में दो आकार के तालाब
खेत तालाब अभियान संयोजक पुष्पेंद्र भाई बताते हैं कि बुंदेलखंड में खेत तालाब योजना में दो आकार के तालाब खुद रहे हैं। एक होता है लघु आकार तालाब, जो 22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा, तीन मीटर गहरा होता है। इसकी जल धारण करने की क्षमता 2320 घन मीटर तक होती है। दूसरा होता है मध्यम आकार तालाब, जो 35 मीटर लंबा, 30 मीटर चौड़ा और तीन मीटर गहरा होता। इन तालाबों की जल धारण की क्षमता 3150 घन मीटर होती है। एक किसान अपने खेत में दो तालाब बना सकता है। बकौल पुष्पेंद्र भाई, बुंदेलखंड में ऐसे भी गांव हैं जहां 80 से 100 तक तालाब किसानों ने बनाए हैं।
पीएम सराह चुके हैं किसानों की कवायद
बुंदेलखंड के सातों जिलों महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, बांदा, जालौन, झांसी और ललितपुर में जल संरक्षण की चल रहीं कवायदों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सराह चुके हैं। पिछले रविवार को मन की बात प्रसारण में उन्होंने बांदा जनपद के अधांव गांव में किसानों द्वारा की जा रही अपने खेतों में मेड़बंदी और खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में अभियान का जिक्र किया था। इसके अलावा मध्यप्रदेश के सतना जिले के एक किसान द्वारा बाग लगाकर जड़ी-बूटियों के पेड़ लगाकर पीएम के मन की बात में सराहना पाई थी।
खेतों में तालाब खुदवाने वाले किसान बोले
कई वर्ष पूर्व अपने खेत में दो लघु तालाब बनवाए थे। तालाबों से पहले अक्सर सिंचाई का जरिया न होने से फसलें खराब होतीं या कम होतीं थीं। तालाब के बाद फसलें दो से तीन ले रहे हैं। भूजल स्तर भी बढ़ा है। गांव के 20 अन्य किसानों ने भी खेत में तालाब बनवाए हैं। इसके अच्छे नतीजे आने पर अन्य किसान भी तालाब खुदवाने का मन बना रहे हैं।
-धनंजय सिंह, किसान, रिवई गांव, महोबा
ग्यारह बीघा खेत है। पूर्व में कुआं और बोरिंग में लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी सफलता नहीं मिली। तीन वर्ष खेत में तालाब खुदवाकर बरसाती पानी का संचय किया और अब उम्दा फसल ले रहे हैं। आमदनी बढ़ने से बाग, पशुपालन के साथ अपने लिए खाद भी तैयार कर रहे हैं। भूजल स्तर बढ़ा है। उनकी प्रेरणा से अन्य किसानों ने भी खेतों में तालाब खुदवाए हैं।
-नवल किशोर, किसान, पडुई गांव, बांदा
पिछले वर्ष उन्होंने भूमि संरक्षण इकाई के माध्यम से अपने खेत में मध्यम आकार के दो तालाब खुदवाए। इनमें बारिश का पानी भंडार हो रहा है। इस वर्ष खरीफ की फसल में तिल, उर्द, मूूंग की अच्छी पैदावार हुई। रबी फसलों के साथ सब्जियां भी पैदा की हैं। करीब 650 पौधे लगाए हैं। कहतीं हैं कि बुंदेलखंड में किसानों को जल संरक्षण पर गंभीरता से काम करना होगा।
-कमला त्रिपाठी, किसान, चरखारी तहसील क्षेत्र, महोबा
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पिछले वर्षों में भी इस योजना में किसानों को 50 फीसदी तक छूट दी गई है। बारिश का पानी खेत से बहकर नाली और नालों में चला जाता है। साथ ही खेत की उपजाऊ मिट्टी को भी बारिश का पानी बहा ले जाता है। ऐसे में किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है। कुछ वर्षों से किसानों और कुछ स्वयंसेवी संगठनों ने बुंदेलखंड में खेतों में बरसाती पानी रोकने के लिए तालाब खुदाई का बीड़ा उठाया। इसे अभियान का रूप भी मिला। बड़ी तादाद में किसानों ने अपने खेतों में छोटे, बड़े और मझोले तालाब खुदवाकर बारिश का पानी रोका और इसे सिंचाई में इस्तेमाल किया।
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इससे जहां फसल की पैदावार बढ़ी वहीं भूजल स्तर में भी वृद्धि हुई। खेत तालाब योजना को इस चालू वर्ष 2021-22 में भी जारी रखते हुए प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड के सातों जनपदों समेत सीमावर्ती मिर्जापुर, सोनभद्र, प्रयागराज आदि जनपदों में 10 हजार छोटे, मझोले खेत तालाबों की मंजूरी दी है। इस पर एक अरब रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार का राज्यांश होगा।
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तालाबों में लगेगा स्प्रिकंलर सिस्टम
चालू वर्ष में स्वीकृत हुए 10 हजार लघु और मझोलेे तालाबों को कृषि विभाग तैयार कराएगा। इसमें स्प्रिकंलर सिंचाई सिस्टम की स्थापना उद्यान विभाग करेगा। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल के जरिए आनलाइन आवेदन करना होगा। तालाबों के जरिए वर्षा जल संचयन के उत्कृष्ट कार्यों की जानकारी के लिए एक्सपोजर विजिट होगा।
बुंदेलखंड में दो आकार के तालाब
खेत तालाब अभियान संयोजक पुष्पेंद्र भाई बताते हैं कि बुंदेलखंड में खेत तालाब योजना में दो आकार के तालाब खुद रहे हैं। एक होता है लघु आकार तालाब, जो 22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा, तीन मीटर गहरा होता है। इसकी जल धारण करने की क्षमता 2320 घन मीटर तक होती है। दूसरा होता है मध्यम आकार तालाब, जो 35 मीटर लंबा, 30 मीटर चौड़ा और तीन मीटर गहरा होता। इन तालाबों की जल धारण की क्षमता 3150 घन मीटर होती है। एक किसान अपने खेत में दो तालाब बना सकता है। बकौल पुष्पेंद्र भाई, बुंदेलखंड में ऐसे भी गांव हैं जहां 80 से 100 तक तालाब किसानों ने बनाए हैं।
पीएम सराह चुके हैं किसानों की कवायद
बुंदेलखंड के सातों जिलों महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, बांदा, जालौन, झांसी और ललितपुर में जल संरक्षण की चल रहीं कवायदों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सराह चुके हैं। पिछले रविवार को मन की बात प्रसारण में उन्होंने बांदा जनपद के अधांव गांव में किसानों द्वारा की जा रही अपने खेतों में मेड़बंदी और खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में अभियान का जिक्र किया था। इसके अलावा मध्यप्रदेश के सतना जिले के एक किसान द्वारा बाग लगाकर जड़ी-बूटियों के पेड़ लगाकर पीएम के मन की बात में सराहना पाई थी।
खेतों में तालाब खुदवाने वाले किसान बोले
कई वर्ष पूर्व अपने खेत में दो लघु तालाब बनवाए थे। तालाबों से पहले अक्सर सिंचाई का जरिया न होने से फसलें खराब होतीं या कम होतीं थीं। तालाब के बाद फसलें दो से तीन ले रहे हैं। भूजल स्तर भी बढ़ा है। गांव के 20 अन्य किसानों ने भी खेत में तालाब बनवाए हैं। इसके अच्छे नतीजे आने पर अन्य किसान भी तालाब खुदवाने का मन बना रहे हैं।
-धनंजय सिंह, किसान, रिवई गांव, महोबा
ग्यारह बीघा खेत है। पूर्व में कुआं और बोरिंग में लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी सफलता नहीं मिली। तीन वर्ष खेत में तालाब खुदवाकर बरसाती पानी का संचय किया और अब उम्दा फसल ले रहे हैं। आमदनी बढ़ने से बाग, पशुपालन के साथ अपने लिए खाद भी तैयार कर रहे हैं। भूजल स्तर बढ़ा है। उनकी प्रेरणा से अन्य किसानों ने भी खेतों में तालाब खुदवाए हैं।
-नवल किशोर, किसान, पडुई गांव, बांदा
पिछले वर्ष उन्होंने भूमि संरक्षण इकाई के माध्यम से अपने खेत में मध्यम आकार के दो तालाब खुदवाए। इनमें बारिश का पानी भंडार हो रहा है। इस वर्ष खरीफ की फसल में तिल, उर्द, मूूंग की अच्छी पैदावार हुई। रबी फसलों के साथ सब्जियां भी पैदा की हैं। करीब 650 पौधे लगाए हैं। कहतीं हैं कि बुंदेलखंड में किसानों को जल संरक्षण पर गंभीरता से काम करना होगा।
-कमला त्रिपाठी, किसान, चरखारी तहसील क्षेत्र, महोबा