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Banda News: खतौनी में कई खातेदार, एक ने ऋण लिया तो पूरी जमीन बंधक
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बांदा। खतौनी में अब नाम के साथ ही खातेदार का अंश भी अंकित होगा। अंश निर्धारित न होने एक ही खतौनी में कई खातेदारों का नाम अंकित होता है। यदि किसी खातेदार ने बैंक से ऋण ले लिया तो पूरी जमीन बंधक हो जाती है। इससे अन्य खाताधारक परेशान हैं।
खेती वाली जमीनों की खतौनी में यह काम तो आसानी से हो गया, लेकिन पुराने आवासीय प्लाटों से संबंधित अभिलेख न होने से खतौनियों में अंश निर्धारण दिक्कत आ रही है। उधर, तमाम लेखपालों ने गलत तरीके से अंश निर्धारण कर दिए हैं, जिससे लोग खासे परेशान हैं।
शासन ने खतौनी में अब नाम के साथ ही खातेदार का अंश भी अंकित करने के आदेश दिए हैं, जिससे जमीन की खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी न हो सके। सह खातेदार की जमीन भी सुरक्षित बनी रहे। अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि जमीन विक्रय के बाद खतौनी से विक्रेता का नाम खारिज कर क्रेता का नाम तीन दिन के अंदर दर्ज किया जाए। कई खातेदार हों तो उनका खतौनी में अलग-अलग अंश निर्धारित किया जाए।
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राजस्व विभाग के अधिकारियों की मानें तो जिले में 1.21 लाख काश्तकार हैं, जिनके अंश निर्धारण का काम शुरू कर दिया गया है। लेखपालों का कहना है कि कृषि भूमि के खातेदारों का अंश निर्धारण का काम तो आसानी से हो गया है। इनमें त्रुटि भी नहीं है, लेकिन विभिन्न तहसीलों में 21 हजार ऐसे काश्तकार हैं, जिन्होंने अपनी हाईवे और बाईपास के आसपास पड़ने वाली जमीन को छोटे-छोटे आवासीय टुकड़ों में बेचा है। एक-एक खतौनी में 200-200 खातेदार हैं। उनके पास अंश से संबंधित कोई अभिलेख भी नहीं हैं। खातेदार भी ढूंढे नहीं मिल रहे। कोई प्लाट लेने के बाद दिल्ली तो कोई कानपुर और प्रयागराज में रह रहा है। जमीन का मुख्य काश्तकार भी नहीं मिल रहा है। बैनामा आदि मिले तो अंश निर्धारण किया जाए। लेखपालों का कहना है कि ऐसे काश्तकारों की तलाश की जा रही है। बताते है कि कुछ लेखपालों ने जल्दबाजी में गलत तरीके से अंश निर्धारित कर दिए हैं, जिससे लोग खासे परेशान हैं और अधिकारियों को आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।
केस-एक
उमरहनी के देवेंद कुमार ने बताया कि खतौनी में चार अलग-अलग हिस्सेदार हैं। अंश निर्धारित न होने से एक खातेदार ने बैंक से ऋण ले लिया और पूरी जमीन बंधक हो गई।
केस-दो
उड़की गांव के बाबूलाल का कहना है कि 45 बीघा जमीन में 34 खातेदार हैं। इसमें 11 खातेदारों ने बैंक ऋण ले रखा है। अंश निर्धारण न होने से बैंक ने पूरी जमीन बंधक कर ली है।
20 फीसदी ही अंश निर्धारण शेष
लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार बुंदेला का कहना है कि खतौनी में काश्तकारों के अंश निर्धारण का काम 80 फीसदी पूरा हो गया है। शेष 20 फीसदी काम भी जल्द पूरा होगा।
संशोधन का काम शुरू
तहसीलदार राधेश्याम सिंह का कहना है कि शासन के आदेश पर अंश निर्धारण का काम किया गया था। अब आपत्तियों पर संशोधन का काम भी तेजी के साथ शुरू कर दिया है।
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खेती वाली जमीनों की खतौनी में यह काम तो आसानी से हो गया, लेकिन पुराने आवासीय प्लाटों से संबंधित अभिलेख न होने से खतौनियों में अंश निर्धारण दिक्कत आ रही है। उधर, तमाम लेखपालों ने गलत तरीके से अंश निर्धारण कर दिए हैं, जिससे लोग खासे परेशान हैं।
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शासन ने खतौनी में अब नाम के साथ ही खातेदार का अंश भी अंकित करने के आदेश दिए हैं, जिससे जमीन की खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी न हो सके। सह खातेदार की जमीन भी सुरक्षित बनी रहे। अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि जमीन विक्रय के बाद खतौनी से विक्रेता का नाम खारिज कर क्रेता का नाम तीन दिन के अंदर दर्ज किया जाए। कई खातेदार हों तो उनका खतौनी में अलग-अलग अंश निर्धारित किया जाए।
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राजस्व विभाग के अधिकारियों की मानें तो जिले में 1.21 लाख काश्तकार हैं, जिनके अंश निर्धारण का काम शुरू कर दिया गया है। लेखपालों का कहना है कि कृषि भूमि के खातेदारों का अंश निर्धारण का काम तो आसानी से हो गया है। इनमें त्रुटि भी नहीं है, लेकिन विभिन्न तहसीलों में 21 हजार ऐसे काश्तकार हैं, जिन्होंने अपनी हाईवे और बाईपास के आसपास पड़ने वाली जमीन को छोटे-छोटे आवासीय टुकड़ों में बेचा है। एक-एक खतौनी में 200-200 खातेदार हैं। उनके पास अंश से संबंधित कोई अभिलेख भी नहीं हैं। खातेदार भी ढूंढे नहीं मिल रहे। कोई प्लाट लेने के बाद दिल्ली तो कोई कानपुर और प्रयागराज में रह रहा है। जमीन का मुख्य काश्तकार भी नहीं मिल रहा है। बैनामा आदि मिले तो अंश निर्धारण किया जाए। लेखपालों का कहना है कि ऐसे काश्तकारों की तलाश की जा रही है। बताते है कि कुछ लेखपालों ने जल्दबाजी में गलत तरीके से अंश निर्धारित कर दिए हैं, जिससे लोग खासे परेशान हैं और अधिकारियों को आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।
केस-एक
उमरहनी के देवेंद कुमार ने बताया कि खतौनी में चार अलग-अलग हिस्सेदार हैं। अंश निर्धारित न होने से एक खातेदार ने बैंक से ऋण ले लिया और पूरी जमीन बंधक हो गई।
केस-दो
उड़की गांव के बाबूलाल का कहना है कि 45 बीघा जमीन में 34 खातेदार हैं। इसमें 11 खातेदारों ने बैंक ऋण ले रखा है। अंश निर्धारण न होने से बैंक ने पूरी जमीन बंधक कर ली है।
20 फीसदी ही अंश निर्धारण शेष
लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार बुंदेला का कहना है कि खतौनी में काश्तकारों के अंश निर्धारण का काम 80 फीसदी पूरा हो गया है। शेष 20 फीसदी काम भी जल्द पूरा होगा।
संशोधन का काम शुरू
तहसीलदार राधेश्याम सिंह का कहना है कि शासन के आदेश पर अंश निर्धारण का काम किया गया था। अब आपत्तियों पर संशोधन का काम भी तेजी के साथ शुरू कर दिया है।