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तीसरी लहर की आहट, पर तैयार नहीं ऑक्सीजन प्लांट

Wed, 21 Jul 2021 10:36 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jul 2021 10:36 PM IST
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The sound of the third wave, but the oxygen plant is not ready
The sound of the third wave, but the oxygen plant is not ready - फोटो : BANDA
बांदा। कोरोना की तीसरी लहर की आहट शुरू हो गई है, लेकिन बांदा में एक को छोड़कर सभी ऑक्सीजन प्लांट अधूरे हैं। कहीं काम चल रहा है तो कहीं उपकरण आना या सेट करना बाकी है। मेडिकल कालेज में दो में से एक ऑक्सीजन प्लांट पूरी तरह तैयार है। नरैनी सीएचसी में बने ऑक्सीजन प्लांट के लिए मशीनें आ गईं। अब इंजीनियरों की टीम का इंतजार है।
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कोरोना की दूसरी लहर में चित्रकूटधाम मंडल का एकलौता मेडिकल कालेज एल-3, जिला अस्पताल और नरैनी सीएचसी एल-वन कोविड अस्पताल बनाए गए थे। कोरोना के गंभीर मरीजों के भर्ती होने से मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन की सबसे ज्यादा खपत थी।
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कानपुर, हमीरपुर, कबरई और नौगांव (एमपी) से ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही थी। इसके बाद भी मरीजों को जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन नहीं मिल रही थी। ऑक्सीजन के अभाव में कई मरीजों ने दम भी तोड़ दिया। हालांकि अभिलेखों में मौत का कारण कुछ और बताया गया। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने ऑक्सीजन संकट से कोई मौत नहीं मानी, फिर भी ऑक्सीजन को लेकर शासन की तैयारियां जरूर जोरशोर से शुरू हो गईं। मेडिकल कालेज समेत बांदा में कुल पांच ऑक्सीजन प्लांट स्वीकृत किए गए।
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मेडिकल कालेज में स्वीकृत दो ऑक्सीजन प्लांट में एक पूरी तरह तैयार है। सिर्फ उद्घाटन की रस्म बाकी है। दूसरे प्लांट के लिए उपकरण आ गए हैं। प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव ने बताया कि मशीनें इंस्टाल करने के लिए बंगलूरू से इंजीनियरों को आना है। शीघ्र ही दूसरा प्लांट भी चालू हो जाएगा।
उधर, सीएमएस डॉ. यूबी सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में दो ऑक्सीजन प्लांट मंजूर हुए हैं। दोनों पर काम चल रहा है। उपकरण आना बाकी हैं। वहीं उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमसी पाल ने बताया कि नरैनी सीएचसी के आक्सीजन प्लांट के लिए उपकरण आ गए। अभी सेट नहीं किए जा सके। इसके अलावा जसपुरा सीएचसी और बबेरू या बहेरी सीएचसी में भी एक-एक ऑक्सीजन प्लांट प्रस्तावित है। शासन की मंजूरी मिलते ही यहां भी काम शुरू हो जाएगा।
दो प्लांटों से मिलेगी 1620 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन
मेडिकल कॉलेज में दोनों ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो जाने से यहां 1620 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन तैयार होगी। एक प्लांट की क्षमता 960 लीटर प्रति मिनट और दूसरे प्लांट की क्षमता 660 लीटर प्रति मिनट है। प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि पांच लीटर प्रति मिनट खपत के हिसाब से लगभग साढ़े 300 बेडों पर आसानी से ऑक्सीजन उपलब्ध हो सकेगी। आईसीयू में भर्ती प्रति मरीज को 30-40 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन की जरूरत होती है। फिलहाल अभी ऑक्सीजन की जरूरत कम है। रोजाना बमुश्किल 20-30 सिलिंडर की खपत हो रही है।
50 फीसदी ही रह गई मेडिकल कॉलेज की ओपीडी
राजकीय मेडिकल कालेज को एल-3 कोविड अस्पताल बनाए जाने से यहां ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या लगभग 50 फीसदी घट गई है। जबकि जिला अस्पताल में रोजाना एक हजार से ऊपर मरीज ओपीडी में इलाज कराने पहुंच रहे हैं।

कोरोना के डर से साधारण मरीज मेडिकल कालेज जाने से परहेज कर रहे हैं। नतीजे में यहां पूर्व की तरह ओपीडी में मरीजों की भीड़ नहीं लग रही है। मौजूदा में रोजाना बमुश्किल 600-700 मरीज ओपीडी में इलाज को पहुंच रहे हैं, जबकि कोरोना से पहले 1300 से 1500 मरीज इलाज कराने यहां आते थे।
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