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Banda News: खंभा टूटा, 50 हजार लोगों को सात घंटे नहीं मिली बिजली
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डिग्री कॉलेज रोड में रात के समय पोल बदलते बिजली कर्मचारी।
- फोटो : स्रोत परिजन।
बांदा। डिग्री कॉलेज रोड पर शुक्रवार की रात अचानक बिजली का जर्जर खंभा टूटकर गिर गया। इससे रात दस बजे चार वार्डों की बिजली गुल हो गई। भीषण गर्मी में लोगों ने रात सड़कों पर घूमकर काटी। शनिवार को करीब सात घंटे बाद सुबह पांच बजे पोल बदलने के बाद आपूर्ति बहाल हुई। करीब 50 हजार आबादी बिना बिजली गर्मी में परेशान रही। इसके अलावा शहर के अन्य इलाकों में भी बिजली की आपूर्ति प्रभावित रही।
जिले में इस समय प्रचंड गर्मी पड़ रही है। कूलर-पंखे और एसी ही गर्मी में राहत दे रहे हैं। वहीं बिजली विभाग उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली देने में नाकाम है। हालांकि बिजली विभाग ने गर्मी में बेहतर आपूर्ति देने के लिए विशेष योजना से करीब 40 करोड़ रुपये खर्च कर खंभे बदलवाए, नए तार लगवाए और ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़वाई, लेकिन यह सब कागजी ही साबित हुआ।
गर्मी के जोर पकड़ते ही शहर व ग्रामीण इलाकों की बिजली आपूर्ति पहले जैसे ही पटरी से उतर गई। दिन भर कामकाज करने के बाद शुक्रवार की रात जैसे ही लोग खाना खाकर सोने पहुंचे, बिजली गुल हो गई। इससे कालूकुआं, बिजलीखेड़ा, शांति नगर, डिग्री कॉलेज रोड आदि चार वार्डों में अंधेरा छा गया। लोग घंटे-दो घंटे बिजली आने का इंतजार करते रहे। जब 12 बजे तक नहीं आई तो अधिकरियों को फोन मिलाया, पर किसी ने फोन भी नहीं उठाया।
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बिजली विभाग के व्हाट्सएप ग्रुप पर बिजली न आने की सूचना डाली। इसके बाद बिजली कर्मचारियों की टीम निकली तो पता चला कि जेएन डिग्री कॉलेज के पास जर्जर खंभा टूटकर गिरा है। इससे इन चार वार्डों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। लोगों ने सुबह पांच बजे तक जागकर रात गुजारी। गर्मी व बिजली कटौती से परेशान लोगों ने कालूकुआं चौराहे पर जाम लगाने का प्रयास किया तो बिजली कर्मचारियों ने रात में ही बिजली पोल बदलने का काम शुरू कर दिया। हालांकि इस प्रक्रिया में सुबह के पांच बज गए। तब लोगों को राहत मिली।
बिजली विभाग के अफसरों पर हो कार्रवाई
कालूकुआं की नीतू ने कहा कि गर्मी में बिजली कटौती रुला रही है। कब आती है और कब जाती है पता नहीं चलता। रात में पूरे समय जागकर गुजारना पड़ा। डीएम को बिजली विभाग के अफसरों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
बिजलीखेड़ा के आकाश ने बताया कि अधिकारियों ने पोल बदलने में करोड़ों खर्च कर दिए। अब यह जर्जर पोल कहां से आ रहे हैं। योजना में सरकारी धन का बंदरबांट करने वाले अफसरों को जेल भेजना चाहिए।
कालूकुआं की सुधा का कहना है कि दिन भार कामकाज के बाद रात में सब कोई सोने की सोचता है, लेकिन बिजली विभाग के अफसर सोने नहीं देते। खुद तो चैन की नींद सोते हैं। इनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
वर्जन-
-कालूकुआं में बिजली का खंभा टूटने की जैसी ही सूचना मिली, तुरंत कर्मचारियों को भेजा गया। खंभा बदलकर बिजली आपूर्ति बहाल कराई गई।
-राजीव रंजन, अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड नगरीय।
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जिले में इस समय प्रचंड गर्मी पड़ रही है। कूलर-पंखे और एसी ही गर्मी में राहत दे रहे हैं। वहीं बिजली विभाग उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली देने में नाकाम है। हालांकि बिजली विभाग ने गर्मी में बेहतर आपूर्ति देने के लिए विशेष योजना से करीब 40 करोड़ रुपये खर्च कर खंभे बदलवाए, नए तार लगवाए और ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़वाई, लेकिन यह सब कागजी ही साबित हुआ।
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गर्मी के जोर पकड़ते ही शहर व ग्रामीण इलाकों की बिजली आपूर्ति पहले जैसे ही पटरी से उतर गई। दिन भर कामकाज करने के बाद शुक्रवार की रात जैसे ही लोग खाना खाकर सोने पहुंचे, बिजली गुल हो गई। इससे कालूकुआं, बिजलीखेड़ा, शांति नगर, डिग्री कॉलेज रोड आदि चार वार्डों में अंधेरा छा गया। लोग घंटे-दो घंटे बिजली आने का इंतजार करते रहे। जब 12 बजे तक नहीं आई तो अधिकरियों को फोन मिलाया, पर किसी ने फोन भी नहीं उठाया।
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बिजली विभाग के व्हाट्सएप ग्रुप पर बिजली न आने की सूचना डाली। इसके बाद बिजली कर्मचारियों की टीम निकली तो पता चला कि जेएन डिग्री कॉलेज के पास जर्जर खंभा टूटकर गिरा है। इससे इन चार वार्डों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। लोगों ने सुबह पांच बजे तक जागकर रात गुजारी। गर्मी व बिजली कटौती से परेशान लोगों ने कालूकुआं चौराहे पर जाम लगाने का प्रयास किया तो बिजली कर्मचारियों ने रात में ही बिजली पोल बदलने का काम शुरू कर दिया। हालांकि इस प्रक्रिया में सुबह के पांच बज गए। तब लोगों को राहत मिली।
बिजली विभाग के अफसरों पर हो कार्रवाई
कालूकुआं की नीतू ने कहा कि गर्मी में बिजली कटौती रुला रही है। कब आती है और कब जाती है पता नहीं चलता। रात में पूरे समय जागकर गुजारना पड़ा। डीएम को बिजली विभाग के अफसरों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
बिजलीखेड़ा के आकाश ने बताया कि अधिकारियों ने पोल बदलने में करोड़ों खर्च कर दिए। अब यह जर्जर पोल कहां से आ रहे हैं। योजना में सरकारी धन का बंदरबांट करने वाले अफसरों को जेल भेजना चाहिए।
कालूकुआं की सुधा का कहना है कि दिन भार कामकाज के बाद रात में सब कोई सोने की सोचता है, लेकिन बिजली विभाग के अफसर सोने नहीं देते। खुद तो चैन की नींद सोते हैं। इनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
वर्जन-
-कालूकुआं में बिजली का खंभा टूटने की जैसी ही सूचना मिली, तुरंत कर्मचारियों को भेजा गया। खंभा बदलकर बिजली आपूर्ति बहाल कराई गई।
-राजीव रंजन, अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड नगरीय।