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सुहागिनों ने वट वृक्ष के फेरे लगाए
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The honeymooners made rounds of the banyan tree
- फोटो : BANDA
बांदा। ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर सूर्य ग्रहण से पहले ही सुहागिनों ने उत्साह के साथ वट वृक्ष की पूजा की। अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए सुहागिनों ने व्रत रखकर वट वृक्ष के 108 फेरे लगाए। कोरोना के खतरे के बाद भी वट वृक्षों में महिलाओं का जमघट रहा। भीड़ और पूजन से कोविड गाइडलाइन का पालन भी दरकिनार रहा।
बृहस्पतिवार को अमावस्या पर वट वृक्ष पूजन की तैयारियां सुहागिनों ने सुबह से की थीं। सूर्यग्रहण से पहले ही महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर ली। शहर के कई स्थानों पर बरगद के पेड़ तले महिलाओं ने विधिवत पूजन किया। फल-फूल व मीठे पकवान आदि चढ़ाए और वट सावित्री की कथा सुनी।
पति की दीर्घायु की कामना की। पूजन के दौरान कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं हो सका। पुलिस भी नदारद रही। वहीं कोरोना के खौफ के चलते अधिकांश महिलाओं ने घर पर ही पूजा-अर्चना की। जरैली कोठी के पंडित हर्षित महाराज ने बताया कि अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर रखा जाता है। मान्यता है कि पति की आयु बढ़ती है।
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वट वृक्ष के पूजन से सावित्री ने अपने संकल्प और श्रद्धा के बल पर यमराज से अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। तभी से इसके पूजन का विशेष महत्व है।
अतर्रा कृषि फार्म में पांच दशक से ज्यादा पुराने वट वृक्ष में महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। बबेरू, नरैनी, तिंदवारी, बदौसा, गिरवां, खत्री पहाड़, खप्टिहा कलां, मटौंध, जसपुरा, बेंदा घाट, ओरन, मरका, बिसंडा, कमासिन, करतल आदि क्षेत्र में वट वृक्ष की पूजा के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं सुबह से ही सजधज कर पहुंचती रहीं।
उधर, शनि जयंती पर अतर्रा के गौरा बाबा धाम परिसर में स्थित मंदिर में श्रद्धालुओं ने प्रसाद चढ़ाया। मंदिर व्यवस्थापक मुन्ना महाराज सहित भरतलाल गुप्ता आदि ने धूमधाम से जयंती मनाई। शनि मंदिर में झांकी सजाई गई।
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बृहस्पतिवार को अमावस्या पर वट वृक्ष पूजन की तैयारियां सुहागिनों ने सुबह से की थीं। सूर्यग्रहण से पहले ही महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर ली। शहर के कई स्थानों पर बरगद के पेड़ तले महिलाओं ने विधिवत पूजन किया। फल-फूल व मीठे पकवान आदि चढ़ाए और वट सावित्री की कथा सुनी।
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पति की दीर्घायु की कामना की। पूजन के दौरान कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं हो सका। पुलिस भी नदारद रही। वहीं कोरोना के खौफ के चलते अधिकांश महिलाओं ने घर पर ही पूजा-अर्चना की। जरैली कोठी के पंडित हर्षित महाराज ने बताया कि अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर रखा जाता है। मान्यता है कि पति की आयु बढ़ती है।
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वट वृक्ष के पूजन से सावित्री ने अपने संकल्प और श्रद्धा के बल पर यमराज से अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। तभी से इसके पूजन का विशेष महत्व है।
अतर्रा कृषि फार्म में पांच दशक से ज्यादा पुराने वट वृक्ष में महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। बबेरू, नरैनी, तिंदवारी, बदौसा, गिरवां, खत्री पहाड़, खप्टिहा कलां, मटौंध, जसपुरा, बेंदा घाट, ओरन, मरका, बिसंडा, कमासिन, करतल आदि क्षेत्र में वट वृक्ष की पूजा के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं सुबह से ही सजधज कर पहुंचती रहीं।
उधर, शनि जयंती पर अतर्रा के गौरा बाबा धाम परिसर में स्थित मंदिर में श्रद्धालुओं ने प्रसाद चढ़ाया। मंदिर व्यवस्थापक मुन्ना महाराज सहित भरतलाल गुप्ता आदि ने धूमधाम से जयंती मनाई। शनि मंदिर में झांकी सजाई गई।