{"_id":"570e8cf34f1c1bde5e4a6ae5","slug":"the-crisis-has-grown-so-bad-reminiscence-of-hand-pumps","type":"story","status":"publish","title_hn":"संकट बढ़ा तो खराब हैंडपंपों की आई सुध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संकट बढ़ा तो खराब हैंडपंपों की आई सुध
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 13 Apr 2016 11:46 PM IST
विज्ञापन
जानवर तक झेल रहे पानी का संकट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। कहावत है कि ‘प्यास लगी तो आई कुआं खोदने की याद’। जल निगम और शासन का कुछ यही रवैया है। सूखे के चलते चारोें तरफ पीने के पानी की हायतौबा मचने लगी तो जल निगम और शासन को खराब पड़े हैंडपंप दुरुस्त करने की सुध आई है। इसके बजट में भी कंजूसी की गई है। जिले के 2700 हैंडपंप रिबोर के लिए चिह्नित किए गए हैं। इनमें भी मात्र 600 हैंडपंपों को रिबोर करने के लिए बजट आया है।
विज्ञापन
सरकारी मानक के मुताबिक 75 मीटर दूरी और 150 व्यक्तियों पर एक हैंडपंप होना चाहिए, यानी मानक के मुताबिक जिले में अधिकतम लगभग साढ़े 13 हजार हैंडपंप लगाए जा सकते थे, लेकिन जल निगम ने इससे दोगुना लगभग 27 हजार हैंडपंप लगा दिए हैं।
विज्ञापन
सबसे ज्यादा हैंडपंप बुंदेलखंड पैकेज और सांसद व विधायक निधियों से लगाए गए हैं। जल निगम अधिकारियों के मुताबिक इस साल रिबोर के लिए 2700 हैंडपंपों की सूची बनाई गई है। इनके लिए लगभग 15 करोड़ रुपये बजट की दरकार है, लेकिन शासन ने सिर्फ सवा तीन करोड़ रुपये दिए हैं, जिससे सिर्फ 600 हैंडपंपों का ही रिबोर हो सकता है।
विज्ञापन
सभी 2700 हैंडपंपोें के रिबोर का बजट मांगा गया था। फिलहाल 600 हैंडपंप का बजट मिला है। शेष बजट के लिए शासन से अनुरोध किया गया है। मौजूदा पैसे में पहले उन्हीं हैंडपंपों का रिबोर होगा जो ज्यादा जरूरी हैं। इनकी सूची बनाई जा रही है।
-चंचल गुप्ता, सहायक अभियंता, जल निगम, बांदा।