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रामबहादुर को लेने के लिए टीम अमृतसर रवाना
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बांदा। बारह साल बाद पाक के लाहौर जेल से रिहा हुए रामबहादुर की माता-पिता से मिलने की हसरत अब जल्द पूरी हो जाएगी।
डीएम आनंद कुमार सिंह के आदेश पर सरकारी वाहन से टीम उसे लेने के लिए सोमवार को अमृतसर (पंजाब) रवाना हो गई। टीम में बबेरू नायब तहसीलदार अभिनव तिवारी और अतर्रा थाना उप निरीक्षक सुधीर चौरसिया तथा रामबहादुर का छोटा भाई मैकू शामिल हैं।
रामबहादुर यहां पचोखर गांव का रहने वाला है। 15 साल पूर्व वह नरैनी बाजार के लिए निकला था और फिर लापता हो गया था। पिता गिल्ला और मां कुसुमा समेत पूरे परिवार ने उसे मृत समझ लिया था।
लेकिन इसी वर्ष जनवरी में पाक से आई चिट्ठी से पता लगा कि रामबहादुर जिंदा है और पाकिस्तान के लाहौर जेल में कैद है। लगभग छह दिन पूर्व पाकिस्तान ने उसे रिहा कर दिया। अमृतसर में उसे अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया गया और परिवार के लोगों की जानकारी जुटाई गई।
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आर्थिक तंगी के चलते उसे लेने के लिए परिजनों को मदद की आस थी। आखिरकार डीएम के आदेश पर स्थानीय प्रशासनिक और पुलिस की टीम उसे लेने के लिए रवाना हो गई। मंगलवार की देर रात तक रामबहादुर के यहां पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।
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डीएम आनंद कुमार सिंह के आदेश पर सरकारी वाहन से टीम उसे लेने के लिए सोमवार को अमृतसर (पंजाब) रवाना हो गई। टीम में बबेरू नायब तहसीलदार अभिनव तिवारी और अतर्रा थाना उप निरीक्षक सुधीर चौरसिया तथा रामबहादुर का छोटा भाई मैकू शामिल हैं।
रामबहादुर यहां पचोखर गांव का रहने वाला है। 15 साल पूर्व वह नरैनी बाजार के लिए निकला था और फिर लापता हो गया था। पिता गिल्ला और मां कुसुमा समेत पूरे परिवार ने उसे मृत समझ लिया था।
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लेकिन इसी वर्ष जनवरी में पाक से आई चिट्ठी से पता लगा कि रामबहादुर जिंदा है और पाकिस्तान के लाहौर जेल में कैद है। लगभग छह दिन पूर्व पाकिस्तान ने उसे रिहा कर दिया। अमृतसर में उसे अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया गया और परिवार के लोगों की जानकारी जुटाई गई।
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आर्थिक तंगी के चलते उसे लेने के लिए परिजनों को मदद की आस थी। आखिरकार डीएम के आदेश पर स्थानीय प्रशासनिक और पुलिस की टीम उसे लेने के लिए रवाना हो गई। मंगलवार की देर रात तक रामबहादुर के यहां पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।