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Banda News: राम और सीता के वन जाने से अयोध्या में छाया दुख
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फोटो-04 बीएनडीपी-06 मुरवल गांव में रामलीला का मंचन करते कलाकार।
बबेरू ब्लॉक के ग्राम मुरवल में रामलीला का मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
बबेरू। ब्लॉक के ग्राम मुरवल में चल रही रामलीला के तीसरे दिन शनिवार को कलाकारों ने श्रीराम विवाह, राम वन गमन एवं केवट संवाद की लीला का मंचन किया। श्रीराम सीता और लक्ष्मण के वन गमन की जानकारी होते ही अयोध्यावासियों में दुख छा गया। कलाकारों की मोहक प्रस्तुति देख दर्शक भाव विभोर हो गए।
कलाकारों ने मंचन में दिखाया कि श्रीराम धनुष तोड़कर सीता स्वयंवर की शर्त पूरी करते हैं। ऋषि विश्वामित्र के कहने पर राजा जनक अयोध्या दूत भेजकर गुरु वशिष्ठ, राजा दशरथ, भरत और शत्रुघ्न को बुलाते हैं। चारों भाइयों का वैदिक मंत्रोचार के साथ विवाह कराया जाता है। राम के साथ सीता, भरत के साथ मांडवी, लक्ष्मण के साथ उर्मिला और शत्रुघ्न के साथ सुतकीर्ति का विवाह होता है। इसके बाद सभी अयोध्या पहुंचते हैं। इससे पूरे राज्य में हर्षोल्लास छा जाता है।
राजमहल में मंगल गीत गूंजने लगते हैं। राजा दशरथ राम का राज्याभिषेक करने की घोषणा करते हैं। तब मंथरा के कहने पर कैकेयी राजा दशरथ को दो वर देने के वचन की याद दिलाती हैं। कैकेयी उनसे भरत का राज्याभिषेक और राम को 14 वर्ष का वनवास देने का वर मांगती हैं। व्यथित दशरथ दिया गया वचन पूरा करने के लिए कैकेयी को वर देते हैं।
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इसके बाद राम लक्ष्मण और सीता वन की तरफ प्रस्थान करते हैं। इससे पूरी अयोध्या में दुख की लहर छा जाती है। वन गमन के दौरान रास्ते में श्रीराम की निषाद राज और केवट से भेंट होती है। कलाकारों का सुंदर मंचन देख श्रोता भाव विभोर हो गए। दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
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बबेरू ब्लॉक के ग्राम मुरवल में रामलीला का मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
बबेरू। ब्लॉक के ग्राम मुरवल में चल रही रामलीला के तीसरे दिन शनिवार को कलाकारों ने श्रीराम विवाह, राम वन गमन एवं केवट संवाद की लीला का मंचन किया। श्रीराम सीता और लक्ष्मण के वन गमन की जानकारी होते ही अयोध्यावासियों में दुख छा गया। कलाकारों की मोहक प्रस्तुति देख दर्शक भाव विभोर हो गए।
कलाकारों ने मंचन में दिखाया कि श्रीराम धनुष तोड़कर सीता स्वयंवर की शर्त पूरी करते हैं। ऋषि विश्वामित्र के कहने पर राजा जनक अयोध्या दूत भेजकर गुरु वशिष्ठ, राजा दशरथ, भरत और शत्रुघ्न को बुलाते हैं। चारों भाइयों का वैदिक मंत्रोचार के साथ विवाह कराया जाता है। राम के साथ सीता, भरत के साथ मांडवी, लक्ष्मण के साथ उर्मिला और शत्रुघ्न के साथ सुतकीर्ति का विवाह होता है। इसके बाद सभी अयोध्या पहुंचते हैं। इससे पूरे राज्य में हर्षोल्लास छा जाता है।
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राजमहल में मंगल गीत गूंजने लगते हैं। राजा दशरथ राम का राज्याभिषेक करने की घोषणा करते हैं। तब मंथरा के कहने पर कैकेयी राजा दशरथ को दो वर देने के वचन की याद दिलाती हैं। कैकेयी उनसे भरत का राज्याभिषेक और राम को 14 वर्ष का वनवास देने का वर मांगती हैं। व्यथित दशरथ दिया गया वचन पूरा करने के लिए कैकेयी को वर देते हैं।
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इसके बाद राम लक्ष्मण और सीता वन की तरफ प्रस्थान करते हैं। इससे पूरी अयोध्या में दुख की लहर छा जाती है। वन गमन के दौरान रास्ते में श्रीराम की निषाद राज और केवट से भेंट होती है। कलाकारों का सुंदर मंचन देख श्रोता भाव विभोर हो गए। दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।