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Banda News: ईंट लगने से हुई पिता की मौत में पुत्र दोषमुक्त
Mon, 21 Sep 2026 11:32 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 21 Sep 2026 11:32 PM IST
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बांदा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम प्रवीण कुमार सिंह द्वितीय ने छत से फेंकी गई ईंट लगने से पिता की मौत के मामले में पुत्र को दोषमुक्त कर दिया है। तीन साल पहले शराब के नशे में हंगामा करने के दौरान यह घटना हुई थी।
बबेरू के गांव पवइया निवासी ओमप्रकाश ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था कि छोटा भाई पवन तिवारी तीन अप्रैल 2023 को शराब के नशे में घर में हंगामा कर रहा था। पिता कमलेश तिवारी ने उसे समझाने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं माना था। बाद में पवन को चारपाई से बांध दिया था।
कुछ देर बाद पिता ने उसे खोल दिया था। पवन घर की छत पर चढ़ गया और वहां से ईंटें आंगन में फेंकने लगा। एक ईंट पिता कमलेश के सिर में लग गई थी। उनकी मौत हो गई थी। पुलिस ने पवन के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था।
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मामले में 19 जनवरी 2024 को आरोप तय हुए। करीब ढाई साल तक चली सुनवाई के बाद तीन सितंबर 2026 को पवन का बयान दर्ज किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित न होने पर पवन को संदेह का लाभ दिया और दोषमुक्त कर दिया।
फैसले के समय पवन न्यायिक अभिरक्षा में था। अदालत ने अपील की स्थिति में उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए धारा 437-ए के तहत 20 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि के दो प्रतिभू दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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बबेरू के गांव पवइया निवासी ओमप्रकाश ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था कि छोटा भाई पवन तिवारी तीन अप्रैल 2023 को शराब के नशे में घर में हंगामा कर रहा था। पिता कमलेश तिवारी ने उसे समझाने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं माना था। बाद में पवन को चारपाई से बांध दिया था।
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कुछ देर बाद पिता ने उसे खोल दिया था। पवन घर की छत पर चढ़ गया और वहां से ईंटें आंगन में फेंकने लगा। एक ईंट पिता कमलेश के सिर में लग गई थी। उनकी मौत हो गई थी। पुलिस ने पवन के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था।
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मामले में 19 जनवरी 2024 को आरोप तय हुए। करीब ढाई साल तक चली सुनवाई के बाद तीन सितंबर 2026 को पवन का बयान दर्ज किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित न होने पर पवन को संदेह का लाभ दिया और दोषमुक्त कर दिया।
फैसले के समय पवन न्यायिक अभिरक्षा में था। अदालत ने अपील की स्थिति में उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए धारा 437-ए के तहत 20 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि के दो प्रतिभू दाखिल करने का निर्देश दिया है।