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महिला की हत्या के दोषी को छह वर्ष का कारावास
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बांदा। महिला की कुल्हाड़ी से हत्या के दोषी को बृहस्पतिवार को अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) मोहम्मद कमरुज्जमां खां ने छह साल की सजा सुनाई है। 10 हजार रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह अतिरिक्त जेल भुगतना होगी।
अहार (बबेरू) गांव निवासी शिवबरन ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पांच नवंबर 2015 की रात लगभग 9.50 बजे गांव का कालका कुल्हाड़ी लेकर अपनी पुत्री को ढूंढते हुए उसके घर आया। उसने कालका से कहा कि उसके घर में उसकी पुत्री नहीं है। फिर भी कालका ने उसे और पत्नी समेत परिजनों के साथ अभद्रता की।
गुस्से में कालका ने उसकी पत्नी गुल्डी के सिर पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया। हमले के बाद कालका भाग गया। जिला अस्पताल से प्रयागराज ले जाते समय रास्ते में पत्नी गुल्डी की मौत हो गई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया।
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न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। सहायक शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) जयप्रकाश साहू ने 8 गवाह पेश किए। अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) मोहम्मद कमरुज्जमां खां ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद अभियुक्त कालका को दोषी पाते हुए छह साल की जेल व 10 हजार रुपये जुर्माना किया।
धारा 504 में एक वर्ष की जेल व एक हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। अभियुक्त के अधिवक्ता ने रोगों की दलील देकर अभियुक्त की सजा कम से कम देने की अदालत से याचना की, लेकिन सहायक शासकीय अधिवक्ता ने विरोध करते हुए न्यायाधीश से अधिक सजा देने की वकालत की।
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अहार (बबेरू) गांव निवासी शिवबरन ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पांच नवंबर 2015 की रात लगभग 9.50 बजे गांव का कालका कुल्हाड़ी लेकर अपनी पुत्री को ढूंढते हुए उसके घर आया। उसने कालका से कहा कि उसके घर में उसकी पुत्री नहीं है। फिर भी कालका ने उसे और पत्नी समेत परिजनों के साथ अभद्रता की।
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गुस्से में कालका ने उसकी पत्नी गुल्डी के सिर पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया। हमले के बाद कालका भाग गया। जिला अस्पताल से प्रयागराज ले जाते समय रास्ते में पत्नी गुल्डी की मौत हो गई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया।
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न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। सहायक शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) जयप्रकाश साहू ने 8 गवाह पेश किए। अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) मोहम्मद कमरुज्जमां खां ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद अभियुक्त कालका को दोषी पाते हुए छह साल की जेल व 10 हजार रुपये जुर्माना किया।
धारा 504 में एक वर्ष की जेल व एक हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। अभियुक्त के अधिवक्ता ने रोगों की दलील देकर अभियुक्त की सजा कम से कम देने की अदालत से याचना की, लेकिन सहायक शासकीय अधिवक्ता ने विरोध करते हुए न्यायाधीश से अधिक सजा देने की वकालत की।