फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   Silver mafia killing the right people are cut

लोगों का हक मार माफिया काट रहे चांदी

Fri, 15 Apr 2016 11:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Fri, 15 Apr 2016 11:45 PM IST
विज्ञापन
Silver mafia killing the right people are cut
पेयजल संकट

बांदा। हर साल करोड़ों रुपये जल कर अदा करने वाले लोग जहां पानी के लिए तरस रहे हैं, वहीं घरेलू कनेक्शन लेकर वाटर प्लांट चला रहे माफिया हर दिन हजारों रुपये की कमाई कर रहे हैं। जल संस्थान रोज प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, जबकि माफिया को बिना किसी अड़चन के पानी की सप्लाई दी जा रही है।   

विज्ञापन


मंडल मुख्यालय समेत जिले के सभी नगरीय क्षेत्रों में जल संस्थान पाइप लाइन के जरिये पानी की आपूर्ति कर जल कर और जल मूल्य छमाही या सालाना उपभोक्ताओं से वसूलता है। उपभोक्ताओं को पानी कम, जल संस्थान के बिल ज्यादा हाथ लगते हैं।
विज्ञापन


जलापूर्ति अक्सर बाधित रहती है या नाममात्र को आपूर्ति होती है। उपभोक्ता पानी के लिए तरसते और भटकते हैं। दूसरी तरफ वाटर प्लांट लगाकर बोतल, पाउच और गैलन में पानी बेंचने वाले कारोबारियों को भरपूर पानी उपलब्ध हो रहा है। घरेलू कनेक्शन लेकर व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। जल संस्थान या प्रशासन का कोई भी विभाग इनकी जांच पड़ताल की जुर्रत नहीं करता।
विज्ञापन
विज्ञापन


बांदा शहर मेें तीन वाटर प्लांट चल रहे हैं। कुछ और नए खुलने वाले हैं। 20 हजार से ज्यादा पानी की बोतल बिक रही हैं। एक बोतल की कीमत 20 रुपये ली जा रही है। 20 लीटर पानी का गैलन 250 रुपये में बेंचा जा रहा है। लगभग 10 हजार पाउच रोजाना दो रुपये की दर से बिक रहे हैं।

लाखों लीटर रोजाना पानी बेंचने वालों को यह पानी घर बैठे मिल रहा है। दूसरी तरफ जल संस्थान उपभोक्ताओं को मानक के मुताबिक 135 लीटर प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन पानी देने में नाकाम है। बमुश्किल 80 लीटर के आसपास ही आपूर्ति हो रही है।

70 फीसदी से ज्यादा हैंडपंप खराब
अतर्रा। शहरी व ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहरा गया है। जल निगम, नगर पालिका और जल संस्थान ने पेयजल समस्या दूर करने के लिए गांवों व नगर में हैंडपंप लगवाए, लेकिन वे नाकाफी हैं। हैंडपंप लगने के बाद ही उनमें पानी की जगह सिर्फ हवा निकल रही है। नरैनी, महुआ, बिसंडा ब्लाक क्षेत्र में हैंडपंपों की संख्या हजारों में है।

इसके अलावा जनप्रतिनिधियों ने भी हैंडपंपों पर निधि की तमाम धनराशि ठिकाने लगा दी। ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र में करीब 70 फीसदी हैंडपंप खराब हैं। कई हैंडपंपों से गंदा पानी निकल रहा है। कुओं का जलस्तर नीचे चले जाने से उनसे भी पानी की उम्मीद नहीं है। शासन-प्रशासन का पेयजल व्यवस्था दुरुस्त कराने का दावा इस भीषण गर्मी में खोखला साबित हो रहा है। महुआ, हीवर बाबा का पुरवा, झंडू पुरवा, आरख पुरवा, यादव पुरा, अतर्रा ग्रामीण, चौसड़, बल्लान, पौहार, ऐंचवारा, शंकर पुरवा, कारीडाड़ी, डढ़वामानपुर आदि गांवों में ग्रामीण पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं।


ट्यूबवेल खराब, पानी का संकट
बबेरू। काजीटोला गांव में सिंचाई नलकूप संख्या 144 खराब होने से मवेशियों के लिए पानी का संकट है। किसान मनीशंकर यादव ने बताया कि अभियंताओं को ट्यूबवेल खराब होने की जानकारी देने के बावजूद कोई तवज्जो नहीं दी गई। मवेशी व जंगली जानवरों के लिए पानी ढूंढे नहीं मिल रहा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed