फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   seen destroyed crop, farmers died due to shock

फसल के सदमे ने छीन ली तीन और की जिंदगी

Wed, 06 May 2015 11:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Wed, 06 May 2015 11:52 PM IST
विज्ञापन
seen destroyed crop, farmers died due to shock

फसल बर्बाद होने के सदमे से किसानों की जान जाने का सिलसिला थम नहीं रहा। बीते चौबीस घंटों में तीन और किसानों की मौत हो गई। इनमें से दो पर बैंक व साहूकारों का कर्ज था।

विज्ञापन


सदर तहसील के माटा (तिंदवारी) गांव निवासी उमाशंकर उर्फ मुन्ना द्विवेदी (60) पुत्र दशरथ ने मंगलवार को फसल की थ्रेसिंग कराई थी। उसने 12 बीघे में गेहूं बोया था। इसमें मात्र 15 कुंतल गेहूं निकला। चार बीघे में बाई चना व मसूर की फसल पूरी तरह चौपट हो गई थी।
विज्ञापन


भतीजे नीलू ने बताया कि फसल के सदमे से उमाशंकर रात में ठीक से सो नहीं पाया। बुधवार को सुबह दिल का दौरा पड़ गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक ने इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक, तिंदवारी से 75 हजार रुपये का केसीसी कर्ज लिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


उधर, एसडीएम प्रहलाद सिंह ने बताया कि अभी तक घटना की उन्हें जानकारी नहीं मिल पाई। तत्काल राजस्व कर्मियों को भेजकर पता लगाएंगे।

एक अन्य घटना में बबेरू तहसील के मियां बरौली गांव निवासी चंद्रपाल (60) पुत्र दयाल मंगलवार को शाम खलिहान में फसल मड़ाई कराने के दौरान बेहोश हो गया। परिजनों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। बुधवार को दोपहर यहां उसकी मौत हो गई।

पुत्र भूरेलाल ने बताया कि मृतक ने 6 बीघा में गेहूं और 2 बीघा में चना बोया था। इसमें तीन कुंतल गेहूं, 20 किलो चना और 10 किलो मसूर पैदा हुई। चना-मसूर में बीज भी वापस नहीं हुआ। उसने इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक, पतवन शाखा से 50 हजार रुपये कर्ज लिया था।

अब ब्याज समेत यह 90 हजार रुपये हो गया। 30 हजार रुपये साहूकारों का कर्ज है। एसडीएम विनय कुमार पाठक ने बताया कि घटना अभी उनके संज्ञान में नहीं है। नायब तहसीलदार को भेजकर जांच कराएंगे। हर संभव मदद की जाएगी।

बदौसा प्रतिनिधि के मुताबिक फतेहगंज थाना क्षेत्र के महुई गांव में किसान रामऔतार उर्फ नाकेदार रैदास (45) के पास ढाई बीघा जमीन थी। 6 बीघा बटाई पर ले ली थी। इसी से परिवार पाल रहा था। लेकिन फसल में कुछ हाथ नहीं लगा। बीज भी नहीं लौटा।

पति-पत्नी मजदूरी से पेट भरते रहे। इस वर्ष की फसल का सदमा रामऔतार को बर्दाश्त नहीं हो सका। बुधवार को खलिहान से मायूस लौटा और दरवाजे पर मायूस बैठ गया। कुछ ही देर में हार्टअटैक से वहीं मौत हो गई। ग्राम प्रधान गंगादीन यादव ने बताया कि उसने तुरंत फोन पर एसडीएम, तहसीलदार और लेखपाल को सूचना दी। शाम तक सिर्फ लेखपाल ही मौके पर पहुंचे।

आग लगाने वाले किसान की पांचवें दिन मौत
फसल के सदमे में आत्मदाह करने की कोशिश में झुलसे किसान की पांचवें दिन जिला अस्पताल में मौत हो गई। बल्लान (अतर्रा) गांव के किसान रामखिलावन (50) पुत्र बद्री ने फसल तबाह होने से क्षुब्ध होकर पांच दिन पूर्व घर में खुद को आग लगा ली थी।


पुत्र शिवकरन ने बताया कि पिता के पास दो बीघा जमीन है। दूसरे पुत्र विनोद के इलाज में साहूकारों का 90 हजार रुपये कर्ज हो गया था। फसल का सदमा और बेटे के इलाज न करा पाने के तनाव में आग लगा ली थी। एसडीएम आरके श्रीवास्तव का कहना है कि घटना की जांच कराएंगे। उसी के मुताबिक सरकारी सहायता दिलाई जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed