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मांगा मुआवजा, मिलीं लाठियां
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 28 Jan 2016 11:44 PM IST
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बांदा। सूखे से कराह रहे किसानों ने मुआवजे की मांग
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को लेकर अनशन शुरू किया तो पुलिस ने लाठियां बरसाई। आधी रात को भारी संख्या
में पहुंची फोर्स ने धरना दे रहे किसानों के तंबू उखाड़ दिए।
किसानों ने विरोध किया तो दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। इन्हें पीएसी की गाड़ी में भरकर जिले की सीमा के बाहर छोड़ दिया। सुबह किसान दोबारा एकजुट हुए तो उन्हें फिर खदेड़ दिया गया।
बुंदेलखंड किसान यूनियन के बैनर तले 50 से अधिक किसान 20 जनवरी से अनशन पर बैठे थे। इन किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर फुटपाथ पर तंबू लगाया था।
ये मांग कर रहे थे कि बुंदेलखंड के सभी किसानों को सूखे राहत के रूप में मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही कर्जमाफ हो, बिजली, पानी और सिंचाई की मुफ्त सुविधा दी जाए।
आमरण अनशन में महिला किसान भी शामिल थीं। बुधवार रात करीब एक बजे अचानक अनशन स्थल पर पुलिस और पीएसी पहुंची। सिपाहियों ने तंबू में सो रहे लोगों को लाठी-डंडों से पीटकर खदेड़ दिया और तंबू उखाड़ फेंका। कुछ किसानों ने विरोध किया तो उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। फोर्स की पिटाई से दो महिलाओं समेत छह किसान चुटहिल हो गए।
उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इसके बाद पुलिस ने रात में ही अनशनकारी किसानों को वाहन में बैठाया और जिले की सीमा के बाहर छोड़ दिया। किसानों का नेतृत्व कर रहे यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल शर्मा और उनके कई साथियों को जिला अस्पताल के नेत्र वार्ड में नजरबंद कर दिया गया।
अस्पताल के बाहर पुलिस फोर्स लगा दी गई। बृहस्पतिवार सुबह कुछ किसान दोबारा कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास जुटने लगे। यह देख परिसर में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई।
दोपहर बाद करीब 13 घंटे बाद विमल शर्मा को छोड़ा गया। वे स्वराज कालोनी स्थित अपने आवास आए। उनके साथ बड़ी संख्या में किसान और पुलिस फोर्स मौजूद रही। किसान यूनियन नेता और पूर्व जिला पंचायत सदस्य दलपत सिंह भी डटे रहे।
किसानों ने विरोध किया तो दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। इन्हें पीएसी की गाड़ी में भरकर जिले की सीमा के बाहर छोड़ दिया। सुबह किसान दोबारा एकजुट हुए तो उन्हें फिर खदेड़ दिया गया।
बुंदेलखंड किसान यूनियन के बैनर तले 50 से अधिक किसान 20 जनवरी से अनशन पर बैठे थे। इन किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर फुटपाथ पर तंबू लगाया था।
ये मांग कर रहे थे कि बुंदेलखंड के सभी किसानों को सूखे राहत के रूप में मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही कर्जमाफ हो, बिजली, पानी और सिंचाई की मुफ्त सुविधा दी जाए।
आमरण अनशन में महिला किसान भी शामिल थीं। बुधवार रात करीब एक बजे अचानक अनशन स्थल पर पुलिस और पीएसी पहुंची। सिपाहियों ने तंबू में सो रहे लोगों को लाठी-डंडों से पीटकर खदेड़ दिया और तंबू उखाड़ फेंका। कुछ किसानों ने विरोध किया तो उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। फोर्स की पिटाई से दो महिलाओं समेत छह किसान चुटहिल हो गए।
उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इसके बाद पुलिस ने रात में ही अनशनकारी किसानों को वाहन में बैठाया और जिले की सीमा के बाहर छोड़ दिया। किसानों का नेतृत्व कर रहे यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल शर्मा और उनके कई साथियों को जिला अस्पताल के नेत्र वार्ड में नजरबंद कर दिया गया।
अस्पताल के बाहर पुलिस फोर्स लगा दी गई। बृहस्पतिवार सुबह कुछ किसान दोबारा कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास जुटने लगे। यह देख परिसर में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई।
दोपहर बाद करीब 13 घंटे बाद विमल शर्मा को छोड़ा गया। वे स्वराज कालोनी स्थित अपने आवास आए। उनके साथ बड़ी संख्या में किसान और पुलिस फोर्स मौजूद रही। किसान यूनियन नेता और पूर्व जिला पंचायत सदस्य दलपत सिंह भी डटे रहे।