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कोरोना की मार से लाखों के घाटे में मूर्तिकार

Tue, 29 Sep 2020 11:21 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2020 11:21 PM IST
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Sculptor in loss of millions due to corona hit
दुर्गा प्रतिमा तैयार करता मूर्तिकार रामजी शर्मा। - फोटो : BANDA
बांदा। जगह-जगह सजे पंडालों की रौनक बनने वाली दुर्गा प्रतिमाएं अबकी कोरोना की मार से मूर्तिकारों के पंडालों में ही धरी रह जाएंगी। सार्वजनिक स्थानों पर दुर्गा पंडालों पर शासन के रोक लगा देने से यह स्थिति आई है। बंगाल और मध्य प्रदेश के मूर्तिकारों द्वारा यहां तैयार की गई करीब 800 प्रतिमाएं श्रद्धालु नहीं ले जा सकेंगे। नतीजे में मूर्तिकारों को कीमत/न्योछावर के रूप में मिलने वाले लगभग 10 लाख रुपये तो मिलेंगे ही नहीं, साथ ही प्रतिमा बनाने में लगाई करीब आठ लाख की पूंजी भी डूब जाएगी। मजदूरपेशा मूर्तिकार इसे लेकर काफी मायूस और परेशान हैं। मूर्तिकारों का कहना है कि ऐसे में वे मूर्तियां निर्माण स्थल पर ही छोड़कर अपने घर लौट जाएंगे।
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बांदा शहर और जनपद के कस्बों में नवरात्र पर हर साल बड़ी तादाद में दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। ये प्रतिमाएं कोलकाता और मध्य प्रदेश आदि के मूर्तिकार यहां आकर तैयार करते हैं। इसके लिए वह महीनों पहले जमीन किराए पर लेते हैं। मूर्ति के मैटेरियल में लाखों रुपये लगाते हैं। इस वर्ष भी इन मूर्तिकारों ने करीब एक माह पहले यहां डेरा डाल दिया था। शहर के क्योटरा, कालूकुआं, कटरा आदि इलाकों में दुर्गा प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। लगभग 800 प्रतिमाएं बन चुकी हैं।
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मूर्तिकार इन्हें अंतिम रूप दे रहे थे लेकिन अब शासन ने कोरोना के चलते सार्वजनिक स्थानों पर दुर्गा पंडाल सजाने पर रोक लगा दी है। ऐसे में मूर्तिकारों की पूंजी फंस गई है। उन्हें तगड़ी आर्थिक चपत लगेगी। मूर्तिकारों का कहना है कि इन हालात में वह इन मूर्तियों को इसी जगह छोड़कर अपने घरों को लौट जाएंगे।
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मूर्तिकार रामजी शर्मा (कोलकाता) का कहना है कि प्रतिमा बनाने में 10 से 12 लोग लगते हैं। प्रत्येक प्रतिमा पर लगभग 800 से 1000 रुपये खर्च आता है। अधिकांश प्रतिमाएं तैयार हो गई हैं। उनमें रंग-रोगन का काम किया जा रहा था। अब इन पर रोक लगाने से हम मूर्तिकारों के सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी।

कहा, जिनसे एडवांस पैसा ले लिया है, उन्हें कहां से वापस करेंगे? इसी तरह ग्वालियर से आए मूर्तिकार रामलाल ओझा का कहना है कि सरकार ने पंडाल लगाने की अनुमति न दी तो मूर्तियों को निर्माण स्थल पर ही छोड़ घर चले जाएंगे। मजदूरी करके परिवार चलाएंगे। सरकार को हमारे नुकसान की भरपाई करना चाहिए।
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