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Banda News: दो छात्रों की मौत के बाद स्कूल में ताला, 200 से अधिक बच्चों की पढ़ाई ठप

Sun, 23 Aug 2026 11:07 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Sun, 23 Aug 2026 11:07 PM IST
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School locked following the deaths of two students; education of over 200 children stalled.
बांदा। झील का पुरवा स्थित बीएल विद्या मंदिर निजी आवासीय विद्यालय में दो छात्रों की मौत के बाद स्कूल में ताला लटक गया है। 17 अगस्त से विद्यालय का संचालन बंद है। इससे यहां पढ़ने वाले 200 से अधिक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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दो छात्रों की मौत की घटना की जांच अपनी जगह है लेकिन लंबे समय तक स्कूल बंद रहने से अन्य बच्चों के भविष्य पर भी असर पड़ रहा है। अभिभावक अब बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंतित हैं। विद्यालय के हॉस्टल में रहने वाले 34 बच्चों में से दो की मौत हो चुकी है। कक्षा छह के छात्र नितिन और कक्षा दो के छात्र अरुण की तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हुई थी।
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घटना के बाद विद्यालय में पढ़ने वाले अन्य बच्चों के परिजन उन्हें अपने साथ घर ले गए। इसके बाद से विद्यालय का संचालन पूरी तरह बंद है। वहीं, विद्यालय में करीब 200 बच्चे डे बोर्डिंग के तौर पर पढ़ते थे। स्कूल बंद होने के कारण इन बच्चों की कक्षाएं भी नहीं लग पा रही हैं। 17 अगस्त से पढ़ाई बंद होने के कारण बच्चों की पढ़ाई लगातार पिछड़ रही है। सबसे ज्यादा परेशानी उन विद्यार्थियों को हो रही है, जिनकी नियमित पढ़ाई और आगामी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हो रही है।
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जांच के साथ पढ़ाई की भी हो व्यवस्था
दो छात्रों की मौत का मामला गंभीर है और इसकी जांच पूरी होना जरूरी है। साथ ही विद्यालय में पढ़ने वाले अन्य बच्चों की शिक्षा को अनिश्चितकाल तक रोकना भी उचित नहीं है। बेसिक शिक्षा विभाग और प्रशासन को जल्द तय करना होगा कि बच्चों की पढ़ाई किस वैकल्पिक व्यवस्था के तहत शुरू कराई जाए।
अभिभावकों का कहना है कि जांच और कार्रवाई के साथ बच्चों की शिक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। यदि विद्यालय का संचालन फिलहाल संभव नहीं है तो बच्चों को किसी अन्य विद्यालय में अस्थायी तौर पर पढ़ाने अथवा ऑनलाइन या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था करने पर विचार किया जा सकता है। जिम्मेदार विभाग को जल्द निर्णय लेकर बच्चों की पढ़ाई शुरू कराने की दिशा में कदम उठाना चाहिए, ताकि दो छात्रों की दुखद मौत के बाद बाकी बच्चों का भविष्य भी प्रभावित न हो।
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विद्यालय में ताला और प्रबंधक का मोबाइल बंद, जांच पर ब्रेक
बांदा। झील का पुरवा स्थित आवासीय विद्यालय में दो छात्रों की मौत के मामले में पुलिस की जांच रविवार को स्थित रही। स्कूल का ताला और प्रबंधक का मोबाइल बंद चल रहा है।
इस कारण पुलिस अब तक न तो सीसीटीवी, डीवीआर हासिल कर सकी है और न ही घटना से जुड़े सवालों का जवाब प्रबंधक से हासिल कर सकी है।
पुलिस टीम शुक्रवार और शनिवार को विद्यालय पहुंची थी लेकिन दरवाजे पर ताला बंद मिला था। ऐसे में प्रबंधक के मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास हुआ लेकिन फोन बंद मिलने के कारण कोई सफलता नहीं मिली। पुलिस टीम ने रविवार को भी विद्यालय पहुंचकर स्थिति देखी लेकिन ताला बंद था। ऐसे में पुलिस वापस लौट आई।
प्रकरण के विवेचक इंस्पेक्टर विपिन यादव ने बताया कि प्रबंधक का मोबाइल व विद्यालय में ताला बंद होने के कारण अब तक सीसीटीवी फुटेज व डीवीआर नहीं मिल सका है और न ही किसी प्रकार की जानकारी हासिल की जा सकी है। एक-दो दिन में अगर ताला नहीं खुलता है और प्रबंधक जांच में सहयोग नहीं करते हैं तो विधिक प्रक्रिया के तहत ताला खुलवाने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
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अग्निशमन विभाग आज कर सकता है नोटिस चस्पा
बिना एनओसी के भवन का व्यावसायिक प्रयोग करने, सुरक्षा व्यवस्था नहीं करने जैसे बिंदुओं को लेकर अग्निशमन विभाग की ओर से सोमवार को जांच की जा सकती है। हालांकि विद्यालय बंद होने के कारण जांच संभव नहीं है। ऐसे में विभाग की ओर से गेट पर नोटिस चस्पा कर सकता है।
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विद्यालय व अस्पताल के बीच उलझी इलाज की गुत्थी
नितिन का इलाज 16 अगस्त की रात कहां हुआ था। इसे लेकर गुत्थी उलझी हुई है। सूत्रों के अनुसार विद्यालय में काम करने वाले एक युवक ने घटना की रात प्रबंधक की बाइक पर बैठाकर नितिन को इलाज के लिए ले गया था। दावा है कि नितिन का इलाज जिला अस्पताल में ही कराया गया था। हालांकि जिला अस्पताल में नितिन के इलाज का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। पुलिस के लिए सबसे अहम जांच का बिंदु यही बन रहा है। हालांकि पुलिस ने अभी तक अस्पताल से संपर्क नहीं किया है।
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विद्यालय में मौजूद 32 चश्मदीद तय कर सकते हैं विवेचना की दिशा
बांदा। छात्रों की मौत के मामले में विवेचक ने अब तक प्राथमिकी दर्ज कराने वाले विजय पाल कुशवाहा उनके दूसरे पौत्र उत्कर्ष (मृतक अरुण का भाई व आवासीय विद्यालय का छात्र) का बयान दर्ज किया है।
इसी तरह से मृतक छात्र नितिन के पिता सुनील प्रजापति व उनके दूसरे पुत्र हर्ष का बयान दर्ज करने की तैयारी में है। पुलिस गवाह खोज रही है जबकि घटना की रात जब नितिन और अरुण बीमार हुए तो विद्यालय कर्मचारियों के अलावा वहां 30 छात्र और थे जो दो कमरों में लेटे थे।
जब रात एक बजे सबसे पहले नितिन ने पेट दर्द की शिकायत की और छटपटाया था तो हाॅस्टल कक्ष संख्या दो में लेटे अन्य बच्चे उठ गए थे। इसके साथ ही कक्ष संख्या एक के बजे भी शोरगुल सुनकर जग गए थे। घटना के बाद बच्चों ने परिजनों को जानकारी भी दी थी कि रात में क्या-क्या हुआ था। नितिन को अस्पताल ले जाने से लेकर उसके वापस आने और फिर से सुबह सात बजे अस्पताल ले जाने और अरुण को अस्पताल ले जाने का दृश्य उनके जेहन में मौजूद है।
पुलिस के सामने कुल 32 चश्मदीद छात्र और विद्यालय के कर्मचारी हैं। जो इस जांच की दिशा को तय कर सकते हैं। हालांकि पुलिस को सबसे पहले इन बच्चों के नाम व उनका पता मालूम करना होगा और यह काम विद्यालय के अभिलेखों से ही मिल सकता है। जो दरवाजे के पीछे बंद हैं।

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प्रयोगशाला नहीं गया विसरा, जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण
बांदा। इस पूरे प्रकरण में दोनों छात्रों की विसरा रिपोर्ट की जांच सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विसरा रिपोर्ट आने पर ही विवेचक को यह पता चलेगा कि लापरवाही किस स्तर से हुई है और वह विवेचना में आरोपियों के नाम घटा व बढ़ा सकते हैं और वह किसी निष्कर्ष पर पहुंचेंगे। विसरा नमूने को अभी तक प्रयोगशाला जांच के लिए नहीं भेजा जा सका है। जबकि घटना की प्राथमिकी बृहस्पतिवार को दर्ज हुई है। कोतवाली पुलिस सोमवार को विसरा जांच के लिए भेजने का आश्वासन दे चुकी है।
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